मूवी रिव्यू: एक उद्देश्यात्मक बेहतरीन एक्शन फिल्म है – घायल वन्स अगेन

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रेटिंग***

लेखक, निर्देशक तथा बतौर अभिनेता सनी देओल की फिल्म ‘घायल वन्स अगेन’  उतनी ही बेहतरीन, मनोरंजक और उद्देश्यात्मक फिल्म है जितनी कि पच्चीस साल पहले बनी ‘घायल’ थी। इस फिल्म की हाईलाइट ये है कि पच्चीस साल पहले की कहानी से आज के यूथ को जोड़ते हुये खूबसूरती से आगे बढ़ाया है।

कहानी

पच्चीस साल पहले अजय मेहरा यानि सनी देओल का भी, बलवंत राय और उसका साम्राज्य खत्म करने के बाद 14 साल की जेल काट कर वापस आने तक सब खत्म हो चुका था यानि उसका भाई, भाभी, पत्नि और यार दोस्त सब मर या मारे जा चुके थे और वो भी दिमागी तौर पर ठीक नहीं था उसे ठीक किया डा.रिया यानि सोहा अली खान ने तथा बाद में वो उसकी जीवन संगिनी भी बनी। लेकिन अपने बाकी के जीवन का मकसद पाने के लिये अजय ने सत्यकाम नामक संस्था बनाकर उसमें नौजवानों को शामिल किया। ये संस्था मजबूरों को और जिन्हें सही न्याय नहीं मिलता उसे न्याय दिलाने में आगे रहती है।  अजय के साथ उस दौरान के रिटायर पुलिस ऑफिसर डीसूजा यानि ओमपुरी भी हैं जो दूर दराज के गांव वालों के लिये लड़ रहे हैं। अचानक वे एक एक्सीडेंट में मारे जाते हैं लेकिन चार किशोर बच्चों अंचल मुंजाल, डायना खान, शिवम पाटिल तथा रिषभ अरोड़ा में से जोया को नेट पर बड़े उद्योगपति राज बंसल यानि नरेन्द्र झा, होम मिनिस्टर मनोज जोशी तथा बंसल के बेटे को ओमपुरी को गोली मारते हुये वीडियो दिखाई दे जाता है। दरअसल ओमपुरी राज्य के एक गांव वालों को बेवकूफ बनाकर उनकी जमीन हड़प लेने वालों के खिलाफ लड़ रहे थे जिसकी वजह से बंसल का बेटा उन्हें गोली मार देता है और बाद में उस मर्डर को एक्सीडेंट का रूप दे दिया जाता है। यानि एक बार फिर अजय एक और बलवंत राय से अपने मित्र की मौत के खिलाफ जंग का बिगुल बजा देता है और इस बार भी अन्याय पर न्याय की जीत हासिल करके दिखाता है।

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निर्देशन

पिछले दो साल से सनी इस कहानी पर काम कर रहे थे, बाद में उन्होंने इसे खुद डायरेक्ट करने का निश्चय करते हुये एक कुशल निर्देशक की तरह एक बेहतरीन फिल्म बनाकर दिखाई। जिसकी कथा पटकथा, सवांद सभी कुछ चुस्त दुरूस्त हैं। बहुत ही बढि़या तरह से पिछली कहानी के साथ आज की कहानी को मिक्स किया है। यही नहीं फिल्म की कास्टिंग भी बहुत शानदार है खासकर चार यंग किरदार। मुबंई की लोकेशंस बहुत ही नई और युनिक हैं। हां हैलीकॉप्टर का अजय द्वारा चलाना फिल्मी लिबर्टी लेना ही कहा जायेगा। वरना सनी निर्देशक के तौर पर शुरू से अंत तक फिल्म की रफ्तार को बनाये रखने में सफल रहे हैं।

अभिनय

सनी देओल ने अपनी मौजूदा उम्र की भूमिका को पूरी शिद्दत से निभाया है उनका एक्शन भी प्रभावशाली है। चार चार यंग नये कलाकारों ने भी कमाल का काम किया है। जहां सोहा अली के लिये ज्यादा कुछ करने के लिये नहीं था बावजूद इसके जितना भी उसके हिस्से में आया उसने अच्छा निभाया। नरेन्द्र झा और उसके शार्ट टेंपर बेटे की भूमिका निभाने वाले कलाकार दोनों ने ही बेहतरीन अभिव्यक्ति दी है। इनके अलावा इनका टिस्का चोपड़ा, रमेश देव, सचिन खेडे़कर, सत्यजीत, नीना कुलकर्णी, नादिरा बब्बर तथा मनोज जोशी आदि सभी ने अपनी भूमिकायें बढि़या ढंग से निभाई हैं।

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संगीत

इस तरह की एक्शन फिल्म में म्यूजिक की जगह न के बराबर होती हैं बावजूद शंकर एहसान लॉय की कम्पोजिंग अच्छी रही खासकर लपक झपक गाना बहुत अच्छा रहा। इसके अलावा फिल्म का विपिन मिश्रा का बैकग्राउंड म्यूजिक बहुत प्रभावी रहा।

क्यों देखें

सनी देओल के अभिनय उनके एक्शन और एक अच्छी फिल्म के तौर पर ये फिल्म जरूर देखी सकती है।

 

 

 


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Mayapuri

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