ज्ञानी जैल सिंह के परपोते एक्टर, लेखक, निर्माता निर्देशक सोहराब खंडेलवाल की फिल्म ‘बाफ्टा’ के लिए क्वालीफाई किया

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लेखक-निर्देशक निर्माता और अभिनेता सोहराब खंडेलवाल की फिल्म ’के सेरा सेरा’ ने हाल ही में बाफ्टा क्वालिफाइंग ’कारमाथेन बे फिल्म फेस्टिवल’ में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार जीता और इस तरह बाफ्टा के लिए क्वालीफाई किया।

अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, लेखक श्री खंडेलवाल, भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के परपोते हैं जिन्हें हाल ही में फीचर फिल्म ’सरदार का ग्रैंडसन’ में भी देखा गया था।

यह फिल्म ‘न्यू फिल्ममेकर’ के ‘न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल’ और रूस में ’किनो ड्यूएल फिल्म फेस्टिवल’ में फाइनलिस्ट भी थी। इसके अलावा पेरिस ’लिफ्ट-ऑफ’ फिल्म फेस्टिवल, ‘आइडिलविल्ड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ और ’फ्यूजन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ के लिए भी नामांकित किया गया था।

खंडेलवाल बहुत उत्साहित हैं। इस फ़िल्म को लेकर चली बातचीत में उन्होंने कहा, “बाफ्टा क्वालीफाइंग फेस्टिवल में जीतना बहुत अच्छा लगा है। मैं एक ऐसी फिल्म बनाना चाहता था जो पुराने स्कूल के रोमांस की याद दिलाए, जब प्यार को पल्लवित करने के लिए लोगों के पास एक-दूसरे के लिए समय होता था। लेकिन उन दिनों मेरे पास तब तक कोई संसाधन नहीं था जब तक मुझे नहीं लगा कि संसाधन मुझे कहानी कहने से नहीं रोकेंगे। मैं एक ऐसी कहानी बताना चाहता था जो दर्शकों को सकारात्मकता की भावना के साथ कुछ सोचने पर विवश करें और मैं उन चीजों पर भी प्रतिबिंबित करना चाहता था जो भारत में समाज को प्रभावित करती हैं। गोरी त्वचा के प्रति आकर्षण या परिवार के दबाव जैसी चीजें, जो लोगों को आर्ट विषय को ना चुनने  के लिए मजबूर करती हैं।  इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने ’के सेरा सेरा’ लिखी और फिर मैंने एक ऐसी क्रू को पाया जो इस दृष्टि को जीवंत करने में मेरी मदद करने का साहस रखते थे। मैं मुंबई को इस तरह से शूट करना चाहता था जो पहले कभी उन जगहों पर शूट नहीं किया गया था जहां आपको आमतौर पर शूट करने की अनुमति नहीं मिलती थी। मैं ऐसी फिल्में बनाना चाहता था, जो दुनिया भर के लोगों से जुड़ सकें। यही मुक्त और उत्साही चरित्र को कबीर तथा लूसिया, फ़िल्म की कहानी में लाते हैं।”

‘के सेरा सेरा’ की कहानी, दो अजनबियों की कहानी है जो मुंबई में अचानक तब मिलते है जब उनका वहाँ से जाने का वक्त हो जाता है।

मुंबई और उसके आसपास फिल्माई गई, यह युवा कवि कबीर और युवा लूसिया द बैलेरीना की कहानी है जो एक-दूसरे की कंपनी में कम्फर्ट ढूंढती हैं क्योंकि वे एक साथ शहर को एक्स्प्लोर करना चाहते हैं। उनका क्या होगा, इस प्रश्न का जवाब ढूंढिए, ’के सेरा सेरा’ में।

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Mayapuri