कामुकता के अंकुशों को चैलेंज करती, ऋचा चड्ढा, अली फ़ज़ल की पहली इंडियन प्रोडक्शन ‘ गर्ल्स विल बी गर्ल्स ‘ बर्लिनेल स्क्रिप्ट स्टेशन में शामिल

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अली फ़ज़ल

बॉलीवुड की फेवरेट चर्चित जोड़ियों में से एक ऋचा चड्ढा और अली फज़ल हाल ही में निर्माता बने हैं और खुद की क्रिएटर्स लैब शुरू की है। ज्ञात हो कि फज़ल, डेम जूडी डेंच के साथ हॉलीवुड फिल्म ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’ में मुख्य भूमिका निभा चुके हैं और इस साल के अंत में केनेथ ब्रानघ की मैग्नस ओपस कृत ‘डेथ ऑन द नाइल’ में दिखाई देंगे। वे अकादमी के सदस्य भी हैं। ऋचा चड्ढा ने भी अपनी फिल्मों के साथ कान्स की यात्रा की और मोरोक्को के माराकेच और जापान के नारा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों की निर्णायक मंडल में शामिल हुईं।

उनकी नई कंपनी ‘पुशिंग बटन्स स्टूडियो’ का उद्देश्य ग्लोबल दर्शकों को भारतीय मूल में निहित कहानियों को बताना है। उनकी पहली निर्मित हो रही यह स्क्रिप्ट ‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स’ पिचिंग स्टेज में है और यह शुचि तलाटी द्वारा निर्देशित और लिखित है। ‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स’ ’प्रतिष्ठित बर्लीनेल स्क्रिप्ट स्टेशन 2021 में आमंत्रित एकमात्र भारतीय स्क्रिप्ट है। यह एक ऐसी प्रयोगशाला है जो हर साल दुनिया भर से केवल 10 प्रोजेक्ट्स का चयन करती है। इस साल जेरूसलम स्क्रिप्ट लैब में भी यह एकमात्र भारतीय प्रोजेक्ट है जहां इसे जुलाई में जेरूसलम फिल्म समारोह में प्रस्तुत किया जाएगा। इससे पहले, रितेश बत्रा की दूसरी फिल्म, ‘फोटोग्राफ’ भी इसी कार्यक्रम में शामिल हुई थी।

यह फिल्म उत्तरीय भारत के एक छोटे हिमालयी पहाड़ी में स्तिथ एक एलीट बोर्डिंग स्कूल की है। कहानी में सोलह वर्षीय मीरा यौवन के द्वार पर आते ही विद्रोही और कामुकता के वश में आ जाती है जिसे उसकी माँ दबाने की कोशिश में लगी रहती है। माँ और बेटी का रिश्ता, पटकथा के माध्यम से साथ साथ विकसित होते हैं और दोनों का अंततः प्यार भरा रिश्ता फिल्म की धड़कन बन जाती है। फिल्म के बारे में बताते हुए, ऋचा चड्ढा कहती हैं, “शुचि ने जो दुनिया दिखाई है, वह भरोसेमंद है और अक्सर क्रूर भी हो सकती है लेकिन कभी आशाहीन या शून्यवादी नहीं हो सकती। यह बहुत ही अजीब कहानी है जो आपको चकित कर देगा पर रुलाएगा नहीं। यह रेटेबल, भोगी हुई घटनाओं पर आधारित है। हमारी कहानी में जो माँ है वो सामान्य भारतीय त्यागमई माँ की रूढ़िवादिता को चकित करती है – वह जटिल है, प्रतिरोधी है लेकिन शहीद होने वाली नहीं है। भारतीय और ग्लोबल सिनेमा में माँ और बेटी के बीच की डायनामिकता को हमेशा अंडर एक्सप्लोर किया जाता रहा है। इसलिए ‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स’ की प्रस्तुति बहुत सारी संभावनाएँ और रोमांच जगाती हैं।”

अली फज़ल हमें बताते हैं, “यह पहली बार है जब ऋचा और मैं एकजुट होकर बतौर फ़िल्म निर्माता काम कर रहें हैं और अब तक का अनुभव बहुत ही रिवार्डिंग और दिल के करीब रहा है। मैं इस बात से भी उत्साहित हूं कि हमारा स्टूडियो इस तरह की प्रगतिशील, महिला प्रधान कहानी के साथ मार्केट में प्रवेश करेगा। हमें उम्मीद हैं कि हम हास्य और प्रेम भरी थॉट प्रोवोकिंग यूनिवर्सल कहानियां बता सकें।

फिल्म की लेखिका और निर्देशका शुचि तलाती, न्यूयॉर्क से बाहर की एक भारतीय निर्देशक हैं। वह बताती हैं, “मुझे लिंग भेद, कामुकता और भारतीय पहचान के आसपास के डॉमिनेन्ट नरेटिव्स को चुनौती देने का काम बहुत पसंद है।” तलाटी ने ‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स ’की स्क्रिप्ट के लिए प्रतिष्ठित ‘न्यूयॉर्क स्टेट काउंसिल ऑफ द आर्ट्स ग्रांट’ जीता है जो एक डेवेलपमेंट फंड है। वे ‘बर्लीनेल टैलेंट’ और उनकी सबसे हालिया शार्ट फिल्म ‘ए पीरियड पीस’ के लिए चुनी गई है, जिसका प्रीमियर 2020 में एस एक्स एस डब्ल्यू फिल्म फेस्टिवल में किया गया था। यह शार्ट, मार्च 2021 से सिएटल एशियाई अमेरिकन फ़िल्म फेस्टिवल में भी दिखाया जाएगा और उस दौरान अमेरिका में स्ट्रीम करने के लिए भी उपलब्ध होगा।

शुचि और ऋचा ने पहले ‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स ‘ को एनएफडीसी फ़िल्म बाज़ार में सह-निर्माण मार्किट के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया, जहाँ उन्हें अपने जैसे प्रोड्यूसिंग पार्टनर्स संजय गुलाटी (क्रॉलिंग एंजल फिल्म्स दिल्ली के) और डॉल्से वीटा फ़िल्म, फ्रांस के, क्लेयर चास्सगने जैसे साथी मिले।
क्रॉलिंग एंजल फिल्म्स के संजय गुलाटी और पूजा चौहान का उपमहाद्वीप में ग्राउंडब्रेकिंग, अवार्ड विनिंग फिल्में बनाने का ट्रैक रिकॉर्ड है।
साथ ही डोल्से वीटा फिल्म्स के क्लेयर चेसगैन ‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स’ के सह-निर्माता भी होंगे, इस तरह यह फिल्म को-इंडो-फ्रेंच तथा को-प्रोडक्शन वेंचर में बदल जाएगा। डोल्से वीटा ने पहले भारत में पार्थो सेनगुप्ता की ‘सनराइज’ का निर्माण किया था जो बुसान और ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई गयी थी। उनकी हालिया पेशकश ‘अ सन’ का प्रीमियर वेनिस ओरियोजोंटी में हुआ।

शुचि और ऋचा लंबे समय से एक दूसरे के सहयोगी रहे हैं और जब वे मुंबई के सोफिया कॉलेज के छात्र थे तब असाइनमेंट के तौर पर उन्होंने औटिज्म और डाउन सिंड्रोम वाले वयस्कों पर एक डाक्यूमेंट्री का सह-निर्देशन किया था, फिर ऋचा एक अभिनेत्री बन गई और शुचि निर्देशिका बन गई, दोनों करीबी दोस्त बने रहे और अक्सर एक साथ फिल्में बनाने की बात करते थे। ऋचा हमें बताती हैं, ” शुचि एक अद्भुत बुलंद आवाज़ है और मैं वर्षों से उसके ग्रोथ को फॉलो कर रही हूं, यह जानते हुए कि एक दिन उसके मस्तिष्क से एक गरमागरम फिल्म पैदा होगी। वह निश्चित रूप से एक बेहतरीन फिल्म निर्माता के रूप में सामने आएगी।”

Ali Fazal, Richa Chadha

 


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Mayapuri

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