अलविदा विनोद…! ये ‘कैंसर’ खा रहा आसमां कैसे कैसे! फिर एक सितारा टूटा है!

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संपादकीय

वर्षों पहले जब विनोद खन्ना ओशो रजनीश के चेलागिरी से उकताकर बॉलीवुड में वापस आ गये थे। फिल्मीस्तान स्टूडियो के एक मेकअप रूम (तब वैनिटी वैन का प्रचलन नहीं था) में हम कुछ प्रेसवालों से बातचीत करते हुए बोले – ‘मुझे बड़ी लम्बी पारी खेलनी है विलेन से हीरो बना, हीरो से सन्यासी बना, आगे पता नहीं क्या क्या बनूंगा कई पड़व पार करने हैं ईश्वर ने मुझे 100 साल के लिए भेजा है।’ पर वह सौ साल का आंकड़ा छू ही नहीं पाए। पारी तो कई खेली, कई पड़ाव पार किए मगर अफसोस 70 साल में ही चल बसे। उनकी मौत का कारण बना ‘कैंसर’ – जिससे पर्दे के विजेता निजी जिंदगी में बार-बार हार जाया करते हैं।

यह हार ही तो थी जिससे मधुबाला, नरगिस दत्त, राजेन्द्र कुमार, राजकुमार, फिरोज खान, राजेश खन्ना, ऋचा शर्मा (संजय दत्त की पत्नी), मेधा जलोटा (अनूप जलोटा की पत्नी) आदेश श्रीवास्तव और अब विनोद खन्ना लड़ाई लड़ते हुए हार गए। कैंसर के ग्रास की शिकार हॉलीवुड की एंजिलिना जोली ही नहीं, बॉलीवुड की मनीषा कोईराला भी बनी हैं (ईश्वर इन्हें लम्बी उम्र दें) जो इस बिमारी से लम्बी लड़ाई लड़ रह़ी हैं। कैंसर वह असाध्य रोग है जिससे पूरी दुनिया आज भयाक्रांत है। बॉलीवुड पर तो जैसे इस दुरदान्त मृत्यु रूपी दैत्य का प्रहार ज्यादा ही होता जा रहा है यह सोच का विषय हो सकता है कि ऐसा क्यों है?- बाहरी दुनिया पर इसका आक्रमण तो है ही, अगर सिर्फ फिल्मों की बात करें तो फिल्म इंडस्ट्री में सितारों पर ही इस महा-विनाशक-बीमारी का अटैक ज्यादा होता है? स्व. सुनील दत्त ने इस बीमारी से लड़ने का संकल्प लिया था। वह कई कैंसर अस्पतालों में सहयोगी थे। उन्होंने एक फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ भी बनाई थी- जो बेहद मार्मन्तक थी पर फिर किसी सितारे ने इस ओर सोचने की कोशिश नहीं की बॉलीवुड में हजारों कार्यकर्ता हैं, इनके एसोसिएशनों में करोड़ों का फंड जमा है पर क्या इस बिमारी से लड़ने के लिए सोचने की जरूरत नहीं हैं? विनोद खन्ना-जो सौ साल जीने की तमन्ना रखते थे… समय से पहले ही अलविदा कह गये! उनकी अलविदाई पर ‘R.I.P’ लिखना ही सब कुछ नहीं है, जरूरत है पूरी इंडस्ट्री जुड़कर इस बिमारी से लड़ने के लिए कुछ सोचे।


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Mayapuri

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