गोपी कृष्ण – आग्रहन टाल सके

1 min


052-28 gopi kishan

मायापुरी अंक 52,1975

‘साकी’ फिल्म (निर्देशक एच.एस. खैल) के नृत्य निर्देशक कृष्ण कुमार का निर्माण काल में ही देहांत हो गया था। कृष्ण कुमार की जगह गोपी कृष्ण का चयन हुआ था। गोपी उस समय एकदम जवान था। उसे देखकर लोगों को आश्चर्य होता था। लोग कहते, यह तो बहुत छोटा है। इस गोपी कृष्ण का उत्तर होता था मैं कहां छोटा हूं वह तनकर खड़ा होकर कहता मैं छोटा लगता हूं?

पहले दिन जब गोपी कृष्ण सैट पर पहुंचा तो मधुबाला को डांस करना था। रिहर्सल के बाद लंच हो गया। मधुबाला गोपी कृष्ण का हाथ पकड़कर अपने साथ ले गई और बोली आप मेरे साथ खायेंगे?

जी, मुझे भूख नहीं है। गोपी कृष्ण ने कॉम्पलेक्स में जान छुड़ाने के लिए कहा। मैं हैवो ब्रेकफास्ट करके आया हूं।

मधुबाला के सामने गोपी कृष्ण की एक न चली और उन्होंने अपना टिफिन खोलकर खाना सजा दिया मटन, चिकन न जाने क्या-क्या डिश थी। और गोपी कृष्ण जैसे कट्टर जैन व धारी ब्रह्माण भूल गया कि वह शाकाहारी है। वह तो मधुबाला की कुरबत पाकर ही मंत्र मुग्ध होकर रह गया था। मधुबाला की हसीन शख्सियत उस पर हावी हो गई थी। वह मंत्र मुग्ध सी जो सामने आता गया, खाता गया। सेट पर जब लोगों को मालूम हुआ तो उन्होंने पूछा। मधु जी, आपने गोपी को क्या खिलाया?

वही जो मैंने खाया। मधु बोली।

अरे यह तो बड़ा बगला भगत निकला। हमारे सामने मांस को हाथ नहीं लगाता जरूर छिप कर खाता होगा।

यह सुनकर मधुबाला की आंखो में आंसू आ गये। I am very sorry आपने मेरी जिद पर जबरदस्ती खा लिया मुझे माफ कर दीजिएगा मास्टर जी और मधुबाला की यह महानता थी कि वह अपने किये पर (जो अनजाने पन में ही हुआ था) सारा दिन शर्मिंदा रही।

 


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये