गुलज़ार की लेखनी से धन्य संसार

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अपनी लेखनी से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर चुके नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म मेकर तथा राइटर गुलजार की कृतियों की हमेशा चर्चा होती रही है। जब उन्होंने हाल में रबिंद्रनाथ टैगोर की रचनाओं को हिंदी में ट्रांसलेट किया तो वह लोग धन्य हो गए जो बंगाली भाषा में लिखे रविंद्रनाथ की रचनाओं को बंगला भाषा ना आने की वजह से पढ़ नहीं पा रहे थे। जब इस लेखन गुरु के साथ इस विषय में बातें की गई थी की रविंद्र नाथ टैगोर ने उन्हें किस तरह, उनके साहित्य शैली को प्रभावित किया तो इस पर उन्होंने बताया कि  प्रभाव शब्द सटीक नहीं है। रविंद्र नाथ टैगोर उन गुरुओं में से एक हैं जिनकी लेखनी उन्हें बहुत अच्छी लगती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने बंगला भाषा इसीलिए सीखी क्योंकि वे रविंद्रनाथ टैगोर की रचनाओं को ओरिजिनल भाषा बांग्ला में पढ़ना चाहते थे। उन्होंने कहा कि आप अलग-अलग गुरु से अलग-अलग बातें सीखते है। वे बोले, “मैंने बचपन से ही टैगोर को पढ़ा है लेकिन उर्दू के अनुवाद में। इसलिए मैं उन्हें बंगाली में पढ़ना चाहता था।” बातचीत जब बंगाली भाषा पर जा ठहरी तो वे बोले, “मुझे इस भाषा के बोलने का ढंग बहुत खूबसूरत लगता है। वाकई चुंबकीय आकर्षण है इस भाषा में। इसका एहसास आपको तब होगा जब आप बंगाल में रहकर देखेंगे तो वैसा ही बोलने लगेंगे।” उन्होंने बताया कि फिल्मों में उनके गुरु विमल राय रहे हैं और उनके ज्यादातर मित्र बंगाली है। ( नो वन्डर, गुलज़ार साहब ने बंगाली एक्ट्रेस राखी मजुमदार से विवाह किया था)।

गुलजार साहब, टैगोर की दो वॉल्यूम हिंदी में अनुवाद कर चुके हैं और उन्होंने  जब शांतनु मोइत्रा को  टैगोर की चंद कविताएं पढ़कर सुनाई थी तो उन्होंने राय दी थी कि इनको गीतों के रूप में कंपोज की जानी चाहिए। गुलज़ार साहब के अनुसार टैगोर ने बच्चों के लिए भी कई किताबें लिखी हैं और गुलज़ार साहब की इच्छा है कि टैगोर को स्कूल में भी पढ़ाई जाये। गुलज़ार साहब ने बच्चों के एल्बम पर भी काम किया है और हाँ, मायापुरी के सिस्टर कंसर्न  बाल पत्रिका लोटपोट के प्रसिद्ध टून्स मोटू-पतलू पर बनी बच्चों की फिल्म, ‘किंग ऑफ किंग्स—‘ के गीतों को भी गुलज़ार साहब की लेखनी का सौभाग्य प्राप्त हुआ।


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Mayapuri

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