INTERVIEW: हमारे समाज में कथनी और करनी बहुत फर्क  है – गुरमीत चौधरी

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टीवी के ‘ग्रीक गॉड’ कहलाए जाने वाले गुरमीत चौधरी ने बॉलीवुड में भट्ट कैंप की फिल्म ‘खामोशियां’ से कदम रखा था। इन दिनों वह टी-सीरीज निर्मित और विशाल पंड्या निर्देशित ईरोटिक फिल्म ‘वजह तुम हो’ को लेकर चर्चा में हैं।

‘खामोशियाँ’ करने के फायदे व नुकसान क्या रहे?

मैं गैर फिल्मी परिवार, छोटे शहर व मध्यमवर्गीय परिवार से आया हूं। आर्मी बैकग्राउंड्स से हूं। आप भी जानते हैं कि आर्मी में मेरे पिता को कितने पैसे मिलते होंगे। हमारा कोई गॉड फादर नहीं है। इसलिए मैंने कुछ अलग करने की कोशिश की। मैं फिल्म उद्योग की कार्यशैली से भी परिचित नहीं था। मुंबई पहुँचने पर मुझे टीवी पर धार्मिक पात्र राम का किरदार निभाने का मौका मिला। उसके बाद मैंने कुछ रियलिटी शो में गुरमीत चौधरी के रूप पें आकर अपनी राम की ईमेज से लोगों का ध्यान हटाया। फिर ‘गीत’ व ‘पुनर्विवाह’ जैसे कुछ सीरियलो में अभिनय कर शोहरत बटोरी। उसके बाद मुझे भट्ट कैंप की फिल्म ‘खामोशियां’ करने का अवसर मिला। इस फिल्म से पहले कोई भी फिल्मकार मुझे फिल्म नहीं देना चाहता था। ‘खामोशियां’ की शूटिंग खत्म होते होते मुझे टी-सीरीज की विशाल  पंड्या लिखित व निर्देशित फिल्म ‘वजह तुम हो’ मिल गयी। इस फिल्म के रिलीज से पहले ही मुझे दो अन्य फिल्में मिल चुकी हैं।Actor Gurmeet Choudhary

पर ‘वजह तुम हो’ तो ईरोटिक फिल्म है?

मुझे इस फिल्म को करने में कोई बुराई नजर नहीं आयी। इरोटिक का नाम आते ही लोग मान लेते हैं कि सेक्स फिल्म है। जबकि इस फिल्म की कहानी सेक्स को लेकर नहीं है। मैं निर्माता,निर्देषक, पटकथा व अपने किरदार पर गौर करता हूँ। इस फिल्म को चुनते समय भी मैंने इसी पर गौर किया और मुझे सब कुछ सही लगा। दो सफलतम फिल्मों के निर्देशक विशाल पंड्या ने जब मुझे इस फिल्म का कॉसेप्ट सुनाया, तो मुझे काफी रोचक लगा। अधिकांष फिल्में इंटरवल तक ही ठीक रहती हैं, उसके बाद वह फिसल जाती हैं। जबकि ‘वजह तुम हो’ अंत तक दर्शकों को बांधकर रखेगी। इसमें एक सेटेलाइट चैनल को हैक कर उस पर लाइव मर्डर होते हुए प्रसारित किया जाता है। इस फिल्म का कंटेंट बहुत सशक्त है। गाने बहुत अच्छे हैं। फिल्म लोगों को जरूर पसंद आएगी। जो रोमांच है, उससे प्रभावित हुए बिना कोई नहीं रहेगा। सोशल मीडिया पर हमारी फिल्म के ट्रेलर को जबरदस्त हिट्स मिल रहे हैं।

पर हॉलीवुड फिल्मों में यह काँसेप्ट काफी दोहराया जा चुका है?

ऐसा अभी आपको लग रहा है। क्योंकि मैं इसकी पूरी कहानी अभी बयां नहीं कर सकता।

फिल्म के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

यह मेरी दूसरी फिल्म है, जिसमें मैंने वकील का किरदार निभाया है। यह मेरे लिए चुनौती थी। मुझसे पहले अमिताभ बच्चन,सनी देओल ने भी वकील के किरदार निभाए हैं। पर उन्होंने अपने करियर में ऊंचाईयां पाने के बाद वकील के किरदार निभाए। मैंने इस किरदार को निभाने के लिए बहुत तैयारी की। इस फिल्म में मेरे किरदार का नाम रणवीर बजाज है।wajah tum ho

किस तरह की तैयारी की?

मैं खुद मुंबई के अंधेरी कोर्ट में गया। वहां जाकर मैंने देखा कि अदालत की काररवाही कैसे होती है। मैंने वहां का माहौल देखा। वकील के पहनावे,उनकी चाल ढाल पर गौर किया। फिर मैंने कई अंग्रेजी व हिंदी फिल्में देखी। कॉस्ट्यूम और बॉडी लैंग्वेज को पकड़ने की कोषिष की। मैंने अपने सभी कॉस्ट्यूम घर पर मंगा लिए थे। घर पर मैं कॉस्ट्यूम पहनकर घूमता था, जिससे अभिनय के दौरान वह कॉस्ट्यूम मेरे अभिनय और शरीर का हिस्सा नजर आए। मेरी तैयारी करने का अंदाज पागलपन जैसा रहा। प्रोडक्शन हाउस में लोग गुरमीत चौधरी को पागल ही कहते हैं। मैं बताना चाहूंगा कि ज्यादातर कलाकार आर्ट फिल्म में ही इस ढंग की मेहनत करते हैं। पर मैंने एक व्यावसायिक फिल्म के लिए मेहनत की है। एक सप्ताह तक मैं होटल में सबसे हटकर रिहर्सल करता रहा।

पर आपको नहीं लगता कि आप एक खास ईमेज में बंधते जा रहे हैं?

बिल्कुल नहीं..दोनों फिल्मों के किरदार काफी अलग हैं। इसके बाद मैं दो फिल्में कर रहा हूं, उनमें भी मेरे किरदार काफी अलग हैं। यह फिल्में अलग जॉनर की हैं। मैं बहुत योजना बद्ध तरीके से काम कर रहा हूं। मैं डर कर काम नहीं करता। यदि ईमेज में बंधने का डर मुझे सताता, तो मैं धार्मिक सीरियल ‘रामायण’ में राम का धार्मिक पात्र निभाने से दूर रहता। मुझसे पहले और बाद में कई लोग धार्मिक सीरियलों से जुड़ने के बाद उससे बाहर नहीं निकल पाए। यदि आप मेरे करियर पर नजर दौड़ाएंगे, तो पाएंगे कि मैंने ‘राम’ के किरदार को निभाने से लेकर ‘वजह तुम हो’ में वकील रणवीर बजाज का किरदार निभाने तक अपने आपको कई बार अलग अलग किरदारों में पेश किया है। मैंने रियालिटी शो भी किए हैं।wajah-tum-ho-s

दर्शक इरोटिक फिल्म के नाम पर थिएटर के अंदर जाएगा?

हमारे देश के लोगों का मापदंड डबल स्टैंडर्ड का है। हम यह कैसे भूल जाते हैं कि फिल्म में एक कहानी होती है। यदि मेरी कहानी दिखायी जाएगी, तो उसमें मेरी प्रेमिका भी होगी। हमारे बीच झगडे़, प्यार मोहब्बत भी होगा। हम बिस्तर भी हांगे।तो फिर इसे परदे पर देखने से लोग नाकभौं क्यों सिकोड़ते हैं? इस इरोटिक फिल्म में भी प्यार दिखाया गया है। इस फिल्म में मेरे और सना के बीच प्यार के दृश्य हैं, जिसे लोग इरोटिक कहेंगे पर यह सब निजी जिंदगी में होता है। हमारे देष में तो सेंसर बहुत सी चीजें कट कर देता है। पर हॉलीवुड फिल्में देखिए।सारे कलाकार इस ढंग की फिल्म करते हैं। हॉलीवुड फिल्म के अंदर बडे़ बड़े कलाकार नंगे घूमते नजर आते हैं। क्या उन फिल्मों को बच्चे नहीं देखते। पर हमारे देश की जनता इस तरह की चीजों का विरोध करती है। जबकि देखने सबसे पहले जाती है। हमारे समाज में दिखाते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। यह एक कटु सत्य है, जिसे लोग स्वीकार नहीं करते।

फिल्म ‘वजह तुम हो’ की हीरोइन सना खान ने कहा है कि उसको आपके साथ इंटीमसी और किसिंग सीन देने में तकलीफ होती थी?

आपने जहां यह पढ़ा है, उसमें अंदर लिखा हुआ था कि सना खान जब तैयार हो जाती थी, तो अच्छे कपड़े पहनती थी मेकअप करती थी। जबकि उनके साथ मेरे नंगे बदन सीन थे। तो मैं अपने शरीर पर तेल व रंग लगाकर रखता था। यानी कि ब्राउड मेकअप करता था। तो उसे डर सताता था कि कहीं मेरा यह मेकअप उसके कपड़ों में ना चिपक जाए।wajah-tum-ho

किन निर्माता निर्देशकों के साथ आपको काम करना है?

रोहित शेट्टी, राज कुमार हिरानी, संजय लीला भंसाली। लंबी चौड़ी सूची है।

अगले पांच वर्ष में क्या करने की योजना है?

अगले पांच वर्ष में कम से कम 15 फिल्म करनी हैं। बांद्रा में बंगला खरीदना है। परिवार को आगे बढ़ाना है। एक फिल्म को निर्देशित करना चाहूंगा। फिलहाल एक कहानी लिख रहा हूं। मेरा मानना है कि जब आप कलाकार के तौर पर हिट हों, तभी फिल्म निर्देशित करना चाहिए।


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Mayapuri

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