‘नो फादर इन कश्मीर’ से आज हैबिटेट फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत

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इंडिया हैबिटेट सेंटर के 14वें हैबिटैट फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत आज से हो रही है। फिस्टिवल की पहली फिल्म के तौर पर अश्विन कुमार की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘नो फादर इन कश्मीर’ आज शाम 6 बजे से दिखाई जाएगी। 10 दिन के इस फेस्टिवल में फर्स्ट कट्स, इंडियन फेस्टिवल प्रीमियर और वर्ल्ड प्रीमियर, डेब्यू और मास्टर क्लासेज जैसे कई प्रोग्राम सिने प्रेमियों के लिए यादगार बनने वाले हैं।

42 फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी

19 से ज्यादा भाषाओं की 42 फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी, जिनमें मराठी, बांग्ला, मलयालम, हिंदी, कश्मीरी, अंग्रेजी, तेलुबू, हरियाणवी, पंजाबी, असमी, कन्नड़, खासी, गद्दी, रावुला, गारो, शेरडुकपेन, लद्दाखी, कुमाऊंनी और संथाली शामिल हैं।

45 अतिरिक्त फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी

डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट और स्टूडेंट फिल्म श्रेणी के तहत समीक्षकों की सराही गई 45 अतिरिक्त फिल्मों की स्क्रीनिंग भी की जाएगी। प्रदर्शित होने वाली फिल्मों में वाडा चेन्नई, कुंबलंगी नाइट्स, नगरकीर्तन, द मॉस्किटो फिलॉस्फी, मेहसमपुर, नोबेलमैन, तारीख, द गोल्ड लेडन शिप एंड द सेक्रेड माउंटेन, जॉनकी, लोनी: द फ्लेनुर, बारम, अभ्यक्तो, डेथ ऑफ एन इन्सेन और अन्य फिल्में शामिल हैं।

निर्देशकों से होगी चर्चा

फिल्म स्क्रीनिंग के बाद उनके निर्देशकों से चर्चा की जा सकेगी। ‘अहा रे’ फिल्म की जानी-मानी अदाकारा ऋतुपर्णा सेन गुप्ता और फिल्म ‘आभासम’ की एक्ट्रेस रीमा कल्लिंगल भी इस फिल्म फेस्टिवल में शामिल होंगी। फेस्टिवल में डॉक्यूमेंट्री के साथ-साथ शॉर्ट फिल्म और छात्रों द्वारा बनाई गई फिल्मों की साझेदारी भी बढ़ने लगी है।

मुख्य आकर्षण होगी प्रतीक बासु की फिल्म ‘रंग महल’

दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित डायरेक्टर सविता ओबेरॉय की बनाई गई डॉक्यूमेंट्री को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। डॉक्यूमेंट्री श्रेणी का मुख्य आकर्षण होगी प्रतीक बासु की फिल्म ‘रंग महल’, जिसे 69वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के तहत चुना गया था।

14 साल से देश की बेहतरीन फिल्में प्रस्तुत कर रहा है

इंडिया हैबिटेट सेंटर के प्रोग्राम निदेशक विद्युन सिंह का कहना है कि, ‘हैबिटेट फेस्टिवल फिल्मों के विविधापूर्ण चुनाव के लिए जाना जाता है। पिछले 14 साल से यह देश की बेहतरीन फिल्में प्रस्तुत कर रहा है, ऐसी फिल्में जो सामाजिक और स्थानीय संदर्भों से गहराई से जुड़ी रहती हैं, जिनमें गहन समझ और संवेदनशीलता होती है। यह चयन हमारे चरित्र की विविधता तो मजबूत करता है।‘

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Sangya Singh

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