वहीदा जी को उनके जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

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आज फिल्म इंडस्ट्री की एक महान अदाकारा “वहीदा रहमान” जी का जन्मदिन है। वो बात अलग है कि कुछ लोग तो उनका जन्मदिन 14 मई को मना चुके जो कि सच में आश्चर्य की बात है। असल में 3 फरवरी को उनका जन्मदिन होता है जिसकी पुष्टि उन्होंने खुद की। उन्होंने बताया कि विकिपीडिया पर भी इस बारे में गलत जानकारी थी व उनके कई बार कहने पर उन्होंने ये गलती सुधारी। उन्हें ये जानकर बहुत दुःख होता है कि उनके जन्मदिन (3 फरवरी ) से ज्यादा बधाईयाँ उनको 14 मई को आती हैं जिससे उन्हें बहुत दुःख होता है। बहरहाल आज उनके असली जन्मदिन पर हम आपको उनके बारे कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं  वहीदा रहमान अपने करिश्माई अभिनय से लगभग पांच दशक से सिनेप्रेमियों के दिलों पर राज कर रही हैं। 1938 में तमिलनाडु की चेंगलपट्टु में पैदा हुईं वहीदा रहमान ने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया जैसे ‘कागज के फूल’, ‘गाइड’, ‘प्यासा’, ‘तीसरी कसम’, ‘खामोशी’, ‘नीलकमल’ और कई पर उनकी जिंदगी में “गाइड” मूवी एक मील के पत्थर के समान थीं वे पद्मश्री और पद्मभूषण से नवाजी जा चुकीं हैं और नेशनल अवॉर्ड भी ले चुकी हैं।

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पर क्या आप जानते हैं वहीदा जी कभी एक एक्टर बनना नहीं बल्कि डॉक्टर बनना चाहती थीं। परन्तु कहा जाता है व्यक्ति का उसके भाग्य पर जोर नहीं होता भाग्य जहाँ ले जाए व्यक्ति को वहीं जाना होता है और वहीदा जी की किस्मत उन्हें सिनेमा में लाना चाहती थी जहाँ वो आ गई। वहीदा जी को नृत्य का बहुत शौंक था। इसलिए उन्होंने अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में भरतनाट्यम नृत्य में निपुणता हासिल की, इसके बाद वह मंचों पर प्रस्तुतियां देने लगीं, फिर उन्हें नृत्य के कई प्रस्ताव मिले, लेकिन वहीदा उस समय बहुत छोटी थी इसलिए कम उम्र के चलते उनके अभिभावकों ने उन प्रस्तावों को ठुकरा दिया।

वहीदा रहमान मशहूर एक्टर गुरु दत्त जी को आज भी अपना गुरु मानती हैं और उन्हीं के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। फिल्म सी.आई.डी. (1956) में खलनायिका का रोल दे कर गुरु दत्त वहीदा को मुंबई (वर्तमान मुंबई) ले आये। सी.आई.डी. की सफलता के बाद फ़िल्म ‘प्यासा’ (1957) में वहीदा रहमान को हीरोइन का रोल मिला। वहीदा ने अपने करियर की शुरुआत में गुरुदत्त के साथ तीन साल का कॉन्ट्रेक्ट किया था, जिसमें उन्होंने शर्त रखी थी कि वह कपड़े अपनी मर्जी के पहनेंगी और उन्हें कोई ड्रेस पसंद नहीं आई तो उन्हें वो ड्रेस पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। इसके अलावा उनके फ़िल्मी करियर को सुनहरे पंख तब मिले जब वहीदा जी ने देव आनंद जी के साथ काम करना शुरू किया। गुरुदत्त के बाद वहीदा और देव आनंद की जोड़ी को भी दर्शकों ने खूब सराहा। दोनों ने ‘सीआईडी’, ‘काला बाजार’, ‘गाइड’ और ‘प्रेम पुजारी’ जैसी सफल फिल्मों में काम किया। परन्तु कोई ‘गाइड’ की वहीदा को कैसे भूल सकता है जो सफ़ेद साड़ी में अपने पैरों में पायल बांध कर “आज फिर जीने की तमन्ना है आज फिर मरने का इरादा है” गाने में थिरकती दिखी थी और देव साहब उनके जूते संभाले उनके पीछे-पीछे भाग रहे थे। वहीदा रहमान और देव आनंद की फिल्म ‘गाइड’, आर के नारायण के नॉवल पर आधारित थी, जिसने वहीदा जी को अन्य अभिनेत्रियों से एक कदम और आगे कर दिया।

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उसके बाद वहीदा जी के जीवन में भी वो पल आया जो हर लड़की के जीवन में आता है उन्होंने शादी की, अभिनेता कंवलजीत ने खूबसूरत वहीदा को शादी का प्रस्ताव दिया, जिसे वहीदा रहमान ने खुशी से स्वीकार कर लिया और शादी के बंधन में बंध गईं। वर्ष 2002 में उनके पति का आकस्मिक निधन हो गया और वो वह एक बार फिर अकेली हो गईं, लेकिन टूटी नहीं, उन्होंने हार नहीं मानी और काम करती रहीं। वहीदा जी ने कभी किसी रोल को अपने इगो पर नहीं लिया व अपने हर रोल के साथ ईमानदारी बरती व अपनी उम्र के हर दौर में अपनी अदाकारी का जौहर दिखाती रहीं। जैसे उन्होंने फिल्‍म ‘रेशमा और शेरा’ में अमिताभ बच्चन की भाभी का रोल किया तो अगले ही पल फिल्‍म ‘त्रिशूल’ और ‘नमक हलाल’ में उन्होंने उनकी मां का किरदार निभाया। उसके बाद भी उन्होंने काम करना नहीं छोड़ा। फिल्‍म ‘दिल्ली 6’ और ‘रंग दे बसंती’ में भी वहीदा मां के किरदार में नजर आईं, जहाँ उनके काम को काफी सराहा गया।

 

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Mayapuri