INTERVIEW: ‘‘दोस्ती करनी है, तो निभाना सीखें’’ हर्ष नागर

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स्टारडम हासिल करने के लिए दिल्ली से मुंबई की दूरी भले ही लंबी हो, पर जुनूनी लोगों के लिए दूरियां कोई मायने नहीं रखती। कुछ हासिल करने की ललक या ख्वाहिश के आगे तमाम बाधाएं भी पृष्ठभूमि में चली जाती हैं। 2009 में दिल्ली से आए हर्ष नागर ने भी कई तरह की समस्याओं को झेला। कंटीले रास्तों पर चले, पर सफर हमेशा एक-सा नहीं रहता। दिन और रास्ते बदलते हैं और हर्ष के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। सात साल पहले फिल्म ‘आलवेज़ कभी कभी’से शुरू हुआ यह सफर ‘लव डे’ तक आ पहुंचा है और इस बीच विज्ञापन जगत में भी हर्ष अपना जलवा दिखा चुके हैं। अब रूपहले परदे पर कुछ कर दिखाने की बारी है। कितना रोमांचक रहने वाला यह सफर! पूछते हैं हर्ष नागर से।

आपने करीब सात साल स्ट्रगल किया। संघर्ष की इस अवधि के दौरान क्या सीखा?

हमारे लिए हर दिन एक संघर्ष है। सफलता हासिल होने के बाद उसे कायम रखने का संघर्ष शुरू हो जाता है। ऑडीशन्स के दौरान कई चीज़ों को फेस करना पड़ता है। क्रिएटिव लोगों से वास्ता पड़ता है, जिनमें कुछ अच्छे हैं और कुछ बुरे भी। कुछ लोग अभिनय की अनदेखी कर देते हैं, लेकिन उनमें कुछ ऐसे भी हैं, जो भले ही उस समय काम न दें, पर प्रतिभाशाली लोगों को वो याद रखते हैं और वक्त पड़ने पर उन्हें काम के लिए बुलाते हैं।harsh-nagar-2

 क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ?

जी हां, ‘आलवेज़ कभी कभी’मेरी डेब्यू फिल्म थी। उसके बाद एक लंबा गैप आया। फिर विज्ञापन फिल्मों में काम मिलने लगा। इस फील्ड में मुझे कामयाबी मिलती चली गई, पर मैंने फिल्मों के लिए संघर्ष नहीं छोड़ा। कई बार आपका लुक कैरेक्टर के हिसाब से मैच नहीं करता, इसलिए मुझे इंतज़ार करना पड़ा। फिल्म ‘लव डे’का ऑफर आया क्योंकि ये तीन दोस्तों की कहानी है, जिनमें एक कैरेक्टर मुझे सूट करता था इसलिए मैं फाइनल कर लिया गया।

लव डेमें आपका क्या कैरेक्टर है?

मेरे कैरेक्टर का नाम हैरी है। उसमें सूझबूझ और समझ है, पर नॉर्मल लाइफ जीता है। बाकी दो दोस्त उसकी नेचर के विपरीत हैं। मोंटी का किरदार थोड़ा नेगेटिव है, पर यारों का यार है। सैंडी कन्फ्यूज़्ड रहता है। अगर उनमें एक्शन है, तो मैं रिएक्शन देता हूं।harsh-nagar-3

आलवेज़ कभी कभीके बाद फिल्मों से इतनी दूरी क्यों बना ली?

दरअसल, उस समय मैं टीनेजर लाइफ जी रहा था। उम्र का वो पड़ाव ऐसा था जब टीनेजर्स फिल्मों का दौर चल रहा था। जब ऐसी फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगीं, तो मेरे लिए भी काम मिलना मुश्किल हो गया क्योंकि मेकर्स ऐसी फिल्में बनाने से बचने लगे थे। फिर मैं एड वर्ल्ड में बिज़ी हो गया जहां मेरा लुक फिट था। अब फ्रेंडशिप पर फिल्में बनने लगी हैं, तो मेकर्स को मेरा लुक कैरेक्टर के हिसाब से सूट करता नज़र आ रहा है इसलिए अब मुझे बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं।

विज्ञापन फिल्मों में आपकी उपलब्धि क्या है?

अब तक मैं 50 से ज्यादा एड फिल्में कर चुका हूं। रणबीर कपूर, पुलकित सम्राट, रोहित शेट्टी, सोनम कपूर आदि बड़े स्टार्स के साथ काम किया है। क्या यह उपलब्धि नहीं!

आप किस खास फिल्ममेकर से प्रेरित हैं?  

मैं राजकुमार हिरानी की मिसाल देता हूं जिन्हें अपनी फिल्मों के जरिए रोते-रोते हंसाना और हंसाते-हंसाते रूलाना आता है। मैं भी कुछ ऐसा ही करना चाहता हूं।harsh-nagar-4

फिल्म लव डेके बारे में कुछ बताएं?

‘लव डे’की कहानी 13 साल से 30 साल तक जाती है। स्कूल वाला पार्ट चाइल्ड आर्टिस्ट्स ने किया है। कॉलेज में हम तीन दोस्तों की एंट्री होती है। नौकरी आदि हर पहलू पर हमारी बहस होती है। दोस्तों की आपस में मस्ती चलती रहती है और इसी मस्ती के बीच कुछ दिलचस्प घटनाएं भी घटती हैं। सोसायटी हमारी दोस्ती पर सवालिया निशान लगाती है क्योंकि उन्हें हमारी हरकतें पसंद नहीं हैं इसलिए बुरी संगत से बचने की सलाह देती हैं। हम तीनों में कौन गलत है और कौन सही, इसका फैसला तो दर्शक करेंगे, पर प्यार हम तीनों के बीच है, जो हमें आपस में जोड़े रखता है।

दोस्ती पर कई फिल्में आ चुकी हैं। लव डेउनसे अलग क्यों है?

हर फिल्म का फ्लेवर और मैसेज अलग होता है, पर हमारी फिल्म लोगों को यह मैसेज देना चाहती है कि अगर आपने दोस्ती करनी है, तो उसे निभाना भी सीखें। झूठ पर आधारित दोस्ती लंबे समय तक नहीं चलती।


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Mayapuri

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