क्या आपने ताहिरा कश्यप की “साइकिलिंग क्रोनिकल्स” के बारे में सुना है

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tahira kashyap
लेखक-निर्देशक ताहिरा कश्यप हमारे दिलों को छूने में कभी नाकाम नहीं रहीं। कैंसर के माध्यम से उनकी यात्रा हो या कठिन समय में सकारात्मक रहने का उनका संदेश, ताहिरा ने हमेशा सबको प्रेरित किया है। वैसे तो ताहिरा जीवन की सादगी का आनंद लेने में विश्वास रखती हैं, लेकिन उन्होंने अब सोशल मीडिया पर कहानी लिखना शुरू किया है। लॉकडाउन के दौरान, हमने ताहिरा को उनकी इंस्टा सीरीज़ पर कुछ कहानिया लिखते देखा है, जिसे लॉकडाउन टेल्स विद ताहिरा कहा गया और कई लोगों ने इसकी प्रशंसा भी की है l
और अगर आपने अब तक ताहिरा के इंस्टाग्राम पर उनकी नयी पोस्ट नहीं देखी, तो आपको तुरंत उन्हें देखना चाहिए जहां उन्होंने रोजमर्रा की ज़िंदगी को तस्वीरों में कैद कर अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है, जिनमे से कुछ ख़ास तस्वीर मुंबई की सड़कों की है। प्रकृति की खूबसूरती से क्लिक तस्वीरें एक ऐसी श्रृंखला से संबंधित हैं जिसे ताहिरा “साइकलिंग क्रोनिकल्स’ (#cyclingchronicles) कहती हैं। भगवान शिव की प्रतिमा हो , या सड़क किनारे बैठे नाई के स्टॉल की तस्वीरें, ताहिरा ने ना केवल इन्हे खूबसूरती से अपने कमरे में कैद किया है, बल्कि उन चित्रों पर उनकी टिप्पणी भी काफी उपयुक्त है। ताहिरा द्वारा साझा की गई हर तस्वीरों पर उनके सुंदर शब्द आपके होश उड़ा देंगे। उन्ही में से एक तस्वीर पर ताहिरा ने लिखा है, “इस निर्मम लॉकडाउन में बहुत सी चीजों के बीच अगर कुछ खाली नहीं हुआ है तो वो है, सड़क के किनारे के नाई और उनके बेशकीमती सामान … उनकी बंद कुर्सी थी।
ताहिरा फिलहाल अपनी किताब और अपनी अगली फीचर फिल्म पर काम कर रही हैं।
ताहिरा कहती हैं,
“मैं साइकिलिंग को एक स्पोर्ट के रूप में लेती हूं और साथ ही खुद को तनावमुक्त रखने के लिए भी इसका सहारा लेती हूं. मैंने महसूस किया कि मैं उन्हीं सड़कों, पेड़ों और घरों को एक अलग नजरिए से देख रही हूं. मुझे प्रकृति की वह खूबसूरती नजर आ रही है, जिसे मैंने पहले कभी नहीं सराहा है. यह किसी थेरेपी से कम नहीं है.
पहले इसका तात्पर्य सिर्फ शारीरिक तौर पर व्यायाम करने से ही था, लेकिन अब यह मानसिक स्वास्थ्य और खुशी के लिए एक थेरेपी की तरह बन गया है. मैंने इंस्टाग्राम पर अपनी खींची हुई कुछ तस्वीरें साझा की हैं. ये बहुत बेहतर तो नहीं होंगी, लेकिन इन्हें मैंने दिल से खींचा है क्योंकि मैंने जिस भी चीज को देखा है, दिल से उसे सराहा है l
शान्तिस्वरुप त्रिपाठी
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