हर मेरा नाम देव आनंद के साथ जोड़ देता है हेमा मालिनी

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मायापुरी अंक 42,1975

हेमा मालिनी का कहना है कि आजकल वह जर्नलिस्टों से इसलिए घबराती हैं, क्योंकि इन में से कई छोटी सी बात को तोड़-मरोड़ कर कुछ का कुछ बना देते हैं। खासकर वह देवाआनंद के बारे में सीधी-सी कही ही बात को बढ़ा चढ़ा कर लिखा है देव साहब क्या सोचते होंगे मन में !

‘इश्क-इश्क-इश्क’ के बुरी तरह पिट जाने के बाद देव आनंद अपनी अगली फिल्म‘जानेमन’ के लिए हेमा मालिनी के पास पहुंचे। उन्होंने हेमा मालिनी को साफ-साफ कह दिया उन्होंने बहुत नुकसान उठाया है इसलिए वह पूरी कीमत न दे सकेंगा। हेमा मालिनी ने सारे हालात को समझते हुए हां कह दी।

अब मैं नही कह सकता कि हेमा मालिनी यह सब खुद करवाया या किसी और ने लेकिन प्रैस वालों ने यह बात खूब उठाई। हेमा मालिनी को दानी और अहसान न भूलने वाली देवी के रूप में पेश किया गया। लेकिन वह सब भूल गईं कि देव आनंद की फिल्म‘जॉनी मेरा नाम’ ही थी जिसने हेमा मालिनी को शिखर पर ला कर खड़ा कर दिया था।

मैं यह क्या सुन रहा हूं। जो कोई भी प्रोड्यूसर संजीव कुमार के पास साईन करने को जाता है तो वह कह रहे हैं कि वह हेमा मालिनी को साईन कर लें, वह अपनी कीमत भी कम कर देंगे और डेट भी देंगे। जब एक प्रोड्यूसर ने शक ज़ाहिर किया कि हेमा मालिनी नही मानेंगी तो संजीव कुमार झट से बोले।

अरे तुम मनाओ तो सही मनाने से क्या नही हो सकता है देखों तो ‘धूप-छाव’ में वह मेरे साथ काम कर ही रही हैं..

सपने देखना बुरी बात नहीं है लेकिन दिन के सपने मैं संजीव कुमार को क्या दोष दूं ? उम्मीद पर ही दुनिया कायम है और जबकि प्रसिद्ध जोड़ी हेमा धर्म की कोई भी नई फिल्म पिछले चार महीनें से शुरू नही हुई है।


Mayapuri