फिल्म ‘जानेमन’ के सेट पर हेमा मालिनी प्रेमनाथ और देवाआनंद की प्रतीक्षा करती रही

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051-10 hema

मायापुरी अंक 51,1975

दोस्तों!

खबर मिली कि मेहबूब स्टूडियो में ‘जानेमन’ की शूटिंग चल रही है तो तुरंत हम भागे-भागे महबूब स्टूडियो जा पहुंचे। जल्दबाज़ी की दो वजह थी, एक तो यह कि ‘जानेमन’ के ही सैट पर प्रेमनाथ ने हेमा मालिनी की ‘पप्पी’ (चुंबन) ले ली थी और यही प्रेमनाथ का अपमान भी हुआ था, हमने सही स्थिति का पता लगाने के लिए सेट पर जाना अधिक उचित समझा।

जैसे ही हमारा प्रवेश सेट पर हुआ, हमने पाया कि आज किसी शूटिंग में नहीं बल्कि किसी ऐसी जगह आ गये हैं, जहां अभी-अभी किसी की मौत हो गयी है। क्योंकि वातावरण खुशनुमा नहीं था, बल्कि सबके सब खिंचे खिंचे से लग रहे थे।

सबसे पहले हमने यह पता लगाया कि हेमा-प्रेमनाथ कांड की सच्चाई क्या है? हम एक स्पॉट बॉय से दोस्ती करने में तुरंत सफल हो गये। हमने उसे यह नहीं बताया कि हम पत्रकार हैं। हमने कहा हम एक फिल्म निर्माता के खास आदमी हैं, उन्हें एक असिस्टेंट डायरेक्टर की जरूरत है वह अपना लोभ सवरण न कर पाया और हमारी ओर मुखातिब हुआ। बातचीत इधर-उधर की होती रही। फिर उससे हमने इस कांड की सच्चाई जाननी चाही तो उसने संक्षेप में बताया,

सारी गलती प्रेमनाथ की है। वे नशे में धुत थे। जब सेट पर आये तो उन्हें हेमा मालिनी का ख्याल आया तो उनकी ओर लपके। मौका पाकर उन्हें दबोच लिया और उनका चुंबन ले डाला। हेमा चीखी। तो यूनिट के सभी आदमियों ने प्रेमनाथ को घेर लिया। चेतन आनंद ने प्रेमनाथ को बहुत बुरा भला कहा। देव साहब ने भी उन्हें बहुत डांटा और आदेश दिया कि वे सेट से बाहर चले जाये। प्रेमनाथ गाली-गलौज करते हुए बाहर चले गये।

अगले दिन असिस्टेंट डायरेक्टर ने प्रेमनाथ को फोन किया कि वे हेमा से माफी मांग लें और काम पर आ जायें। तो प्रेमनाथ बोले कि देव से कहो मैं उनकी फिल्म में काम नहीं करना चाहता। जब देव साहब को असिस्टेंट ने प्रेमनाथ का मैसेज दिया तो देव साहब ने फोन पर प्रेमनाथ से कहा, अब आप सिर्फ मेरी ही नहीं, इंडस्ट्री की किसी और फिल्म में भी काम नहीं कर रहे हैं। यह मत समझ ना कि मैं ‘जानेमन’ की वजह से तुम्हारी हर बदतमीजी प्रदर्शित कर लूंगा। याद रहे, देवानंद अगर ‘इश्क इश्क इश्क’ में पचास लाख का नुकसान सहन कर सकता है तो ‘जानेमन’ को भी यही डिब्बे में बंद कर पचास लाख का और भी नुकसान बर्दाश्त कर सकता है, लेकिन याद रखना जो देव आपको ‘जॉनी मेरी नाम’ से इंडस्ट्री में पुन: स्थापित कर सकता है वही आपको गायब भी कर सकता है।

और इसके तुरंत बाद प्रेमनाथ सेट पर पहुंचे और हेमा, देव और चेतन आनंद से माफी मांग ली।

स्पॉट बॉय से हकीकत जानने के बाद हम सेट की ओर बढ़े। वही चेतन साहब मिल गये। चेतन साहब ने चंद दिनों पहले ‘साहिब बहादुर’ की दो रीलें दिखायी थी। अत: हमने उनसे पूछा,

अब आप बाकी को फिल्म कब दिखा रहे हैं?

जब चाहे, फिलहाल आप आज की शूटिंग तो देखिये। आज हेमा मालिनी का स्नान दृश्य फिल्माया जाना है। और भी कई दृश्य फिल्माने है।

ठीक है आज के लिए यही काफी है। कहकर हम सेट का अवलोकन करने लगे। ‘जानेमन’ का यह भव्य सेट दो भागों में विभक्त था। एक सेट को देखकर ऐसा प्रतीत होता था, जैसे हम किसी भयंकर गुफा में फंस गये हो।

अगला सेट एक बाथरूम का था। वाह! क्या बाथरूम है, देखकर ही स्नान करने का जी चाहता है। यों तो यह बाथरूम फिल्म में पहले माले पर दिखाया जायेगा मगर अभी तो यह जमीन पर ही था। बाद में पर्दे पर आप इसे पहले माले पर देखेंगे।

हेमा मालिनी मेकअप करके आयी तो चेतन आनंद ने सेट से फालतू लोगों को बाहर जाने का आदेश दिया। क्योंकि ‘हेमा का स्नान’ का आदेश दिया। क्योंकि हेमा का स्नान कुछ तो मायने रखता है, या फिर कोई और प्रेमनाथ न पैदा हो जाये।

हेमा को रिहर्सल करवायी गयी। खूबसूरत मांसल भरापूरा शरीर। हमें ख्याल आया, भला, ऐसी खूबसूरत हेमा को देखकर दिल काबू में रह सकता है।

हेमा स्नान करने लगी। तीन-चार रिहर्सल के बाद ‘क्लेप’ ’लाइट’ मैन बंद आदि की आवाज़ के साथ एक्शन की आवाज़ गूंजी। हेमा के एक्शन आरंभ हो गये।

पल भर में शॉट ओ.के. हो गया।

अब अगले शॉट की तैयारी होने लगी। अगला शॉट गुफा का था। एक रहस्य दृश्य फिल्माया जाने वाला था। यानी हेमा का अपहरण होना था और उसे यहां कैद करना था। लेकिन न तो सेट पर देव साहब मौजूद थे और न प्रेमनाथ। मालूम हुआ कि देवसाहब तो ‘वारंट’ की शूटिंग में फिल्मालय स्टूडियो में बिजी हैं। और प्रेमनाथ का फोन मिला है कि वे घर से निकल पड़े है।

काफी प्रतीक्षा हो गयी। हेमा हार कर मेकअप रूम की ओर बढ़ गयी। उनकी मम्मी साथ में नहीं थी। कहते हैं कि हेमा-प्रेमनाथ कांड के बाद धर्मेन्द्र प्रेमनाथ की तलाश कर रहे हैं। और उनकी मम्मी, उनका धीरज उन्हें हेमा से दूर रख रहा है। चेतन आनंद भी कुछ परेशान से लगे, क्योंकि उनके अभिन्न मित्र मदनमोहन की मौत ने उन्हें अपाहिज बना दिया था

और अब प्रतीक्षा अपनी सीमा पर गयी तो हम भी लौट चले।


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Mayapuri

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