हेमा मालिनी की सफलता का राज क्या

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015-30 film charas hema malini and dharmendar

 

मायापुरी अंक 15.1974

यदि मैं आपसे पूछूं, इस समय फिल्मों की नम्बर एक हीरोइन कौन है? आपका उत्तर होगा, हेमा मालिनी क्यों, है न? वास्तव में हेमा ने अपने साथ की हीरोइनो(जया, राख रेखा, शर्मिला,लीना, आदि को इतना पीछे छोड़ दिया है कि अब नम्बर एक हीरोइन के विषय में दो राय नही हो सकती है। हालांकि नम्बर एक हीरो चुनते समय दर्शकों की राय भिन्न हो सकती है। किसी को राजेश खन्ना लोकप्रियता के शिखर पर बैठा नजर आता है तो कोई धर्मेन्द्र पर फिदा है। दस-पांच दर्शक ऐसे भी मिल जायेंगे जो देवानंद को सुपर-स्टार मानते है। मगर हेमा को लेकर कोई वाद-विवाद खड़ी नही होता।

मजेदार बात यह है कि हेमा को सफलता के शिखर तक पहुंचने के लिए कोई विशेष परिश्रम नही करना पड़ा सब कुछ यूं बंटा मानो भाग्य लक्ष्मी ने उसे स्वयं नीचे से उठा कर ऊपर रख दिया हो। सच तो यह है कि हेमा को अपने करियर से कभी विशेष लाभ नही रहा। इसका कारण यही था कि उसकी कमाई का कोई भी हिस्सा उसका अपना नही था। पहले वह अंनतस्वामी के साथ ‘कांट्रैक्ट’ में जकड़ी थी। वैसे हेमा की इमेज बनाने का श्रेय बहुत कुछ अनंतस्वामी को जाता है। हेमा की पहली फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ रिलीज होने से पहले ही अनंतस्वामी ने ‘स्वप्न सुंदरी’ के रूप में उसका खूब प्रचार किया था। इस प्रचार का ही परिणाम था कि ‘सपनों का सौदागर’ तो बुरी तरह पिटी मगर हेमा की मार्केट ठंडी नही हुई। उसकी पहली फिल्म ने वेचारे वितरक पूरी तरह कल्याण कर दिया।

इसी बीच इंडस्ट्री में ऐसी स्थिति पहुंच गई कि हीरोइनों का अकाल-सा नजर आने लगा (यूं अब यह अकाल) बम्बई का परमानेंट फीचर बन गया है) निर्माताओं ने इसका हल यह निकाला कि फिल्म में हीरोइन का रोल बहुत कम कर दिया। उन्हें फिल्म में ऐसी हीरोइन चाहिये थी जो अभिनय के नाम पर भले ही जीरो हो मगर उसका चेहरा ऐसा हो कि जब भी हीरोइन स्क्रीन पर आये, दर्शकों के मन मे उतर जाए। हेमा ऐसे रोल के लिए एकदम उपयुक्त थी। और देखते ही देखते हेमा सफलता के शिखर छूने लगी।

आजकल हेमा और धर्मेन्द्र की जोड़ी ऐसी लोकप्रियता अर्जित कर चुकी है कि दोनों को साइन करते ही फिल्म के वितरण-अधिकार धड़ाधड़ बिक जाते है। इस समय दोनों एक साथ इतनी फिल्मों में काम कर रहे है कि वे सारी फिल्में आगामी कई वर्षों में भी पूरी नही हो सकती। इनमें रामानंद सागर की ‘चरस’ रमेश सिप्पी की ‘शोले’ विक्रमजीत की ‘प्रतिज्ञा’और प्रमोद चक्रवर्ती की ‘आजाद’ प्रमुख है। इन फिल्मों का निर्माण किस भव्य स्तर पर हो रहा है। उसका अनुमान इसी से लगा लिजिए कि अकेली ‘शोले’ का का बजट एक करोड़ रुपये से ऊपर जाएगा। आज हेमा को छींक भी आती है तो निर्माताओं में घबराहट फैल जाती है।

हेमा के करियर का सबसे सुन्दर पक्ष यह है कि उसने अपने आपको अंग-प्रदर्शन से दूर रखा। उसने अपनी इमेज इस प्रकार बनाई कि किसी निर्देशक का इतना साहस नही होता कि वह कैमरे के सामने हेमा से अपने शरीर की वक्र-रेखायें दिखाने के लिए कह सके।

आजकल हेमा का नाम धर्मेन्द्र के साथ जुड़ा है। दोनों की महीने मे बीस दिन इकट्ठी शूटिंग होती है। इतना ही नही, पर्टियों में दोनों एक साथ रहते है और अक्सर अन्धेरे कोने तलाशते है। वास्तव में हेमा-धर्मेन्द्र का इस समय वही हाल है जो कभी राजकपूर और नरगिस का था। राजकपूर की तरह धर्मेन्द्र भी विवाहित है और कई प्यारे बच्चों का पिता है। देखें कौन ‘सुनील दत्त’ इस जोड़ी में ‘विलेन’ बनता है। फिलहाल तो हेमा और धर्मेन्द्र एक दूसरे को भरपूर सहयोग देते है और इसी कारण निर्माता उनसे खुश रहते है।

हेमा ने अपनी फिल्मों की सिल्वर जुबली मनाई (आप गलत समझ रहे है, हेमा को फिल्मों में काम करते पच्चीस वर्ष नही हुये बल्कि हेमा अपनी पच्चीस फिल्में पूरी कर चुकी है) इस अवसर पर धर्मेन्द्र ने कहा मैं भी अपनी फिल्मों की सिल्वर जुबली मनाऊंगा मगर तब जब हेमा जी के साथ मेरी पच्चीस फिल्में पूरी हो जायेंगी। जिस गति से धर्मेन्द्र और हेमा की फिल्मों का निर्माण चल रहा है, उससे जाहिर है कि हेमा-धर्मेन्द्र की फिल्मों की सिल्वर जुबली होने में अधिक देर नही है।


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Mayapuri

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