गायिका जियोकोंडा वेसिचेली: मैंने जहां भी गाया, मुझे दर्शकों से स्टैंडिंग ओवेशन मिला क्योंकि भारतीय दर्शक खुले विचारों और नई चीजों के प्रति उत्सुक होते हैं

| 01-02-2022 5:30 AM 2

-सुलेना मजुमदसर अरोराबॉलीवुऑपेरा शैली की आविष्कारक और पायोनिअर तथा 7 अंतर्राष्ट्रीय ओपेरा पुरस्कार विजेता गायिका जियोकोंडा वेसिचेली के साथ एक स्पेशल इंटरव्यू, जो उन्होंने अमेरीका से दियाअपने विश्वव्यापी करियर की 20 वीं वर्षगांठ पर, एक अति प्रतिभाशाली बाल कलाकार के रूप में शुरू हुई, इटली की 7 अंतर्राष्ट्रीय ओपेरा पुरस्कार विजेता गायिका जियोकोंडा वेसिचेली अपने अब तक के करियर के बारे में कई जानकारियां दे रहीं हैं। जियोकोंडा ने हमेशा से ही यह कहा है कि भारत उनकी दूसरी भूमि है क्योंकि वह भारत से आध्यात्मिक रूप से जुड़ी हुई हैं और वे बॉलीवुऑपेरा शैली की आविष्कारक और पायोनिअर है। वे एक बहुमुखी कलाकार हैं, क्योंकि वे सिर्फ एक गायिका ही नहीं बल्कि एक अभिनेत्री और निर्देशिका भी है जिन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ रोम से परफॉरमिंग आर्ट्स की डिग्री भी प्राप्त हुई है।22 जनवरी 2022 को उनके करियर की वर्षगांठ के सम्मान में एक विशाल संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां वे थ्री टेनर्स के साथ प्रोटागोनिस्ट रहीं। पूरी दुनिया ने उनके बारे में बहुत कुछ देखा सुना है कि वे दुनिया की पहली ऐसी गायिका हैं जिन्होंने पश्चिमी और पूर्वी संगीत और संस्कृति के बीच एक फ्यूजन का निर्माण किया, भले ही उनकी 'बॉलीवूओपेरा', शैली दिल्ली में बनाई और पेटेंट कराई गई हो। इन फैक्ट वे ओपेरा संगीत के साथ बॉलीवुड संगीत को मिलाने वाली प्रथम भारतीय महिला पुरस्कार प्राप्त करने वाली गैर भारतीय महिला हैं और उन्होंने भारतीय संगीत के कई प्रतिष्ठित कलाकारों जैसे ग्रैमी अवार्ड विनर सुखविंदर सिंह, हरि हरन, मीका सिंह, सलीम  सुलेमान, आशा भोंसले, जाकीर हुसैन, अनूप जलोटा, लॉय मेनडोसा, सिल्वागणेशा, जीनों बैंक्स, निलादरी तथा कई अन्य चोटी के गायक संगीत विशेषज्ञों  के साथ कोलाब्रेट किया है और कई फेस्टिवल और ऑडिटोरियम में शिरकत की।जियोकॉन्डा ने कई बॉलीवुड फ़िल्मों में गीत गाएं है जैसे 'प्राग' के लिए गाया, फिल्म 'मेरी कॉम' में भी 'जिद्दी दिल', ने उन्हें बहुत लोकप्रियता दिलाई। 2017-18 में उनकी गाई गीत 'इतनी सी बात है', और 'दैट्स एमोर' को एशिया की सबसे बड़ी लेबल टी सीरीज ने रिलीज किया जो  रातोंरात वाईरल हो गई। दिसंबर 2019 में उनकी क्रांतिकारी गीत'कॉनटीगो बॉम बॉम'  ने पहली बार भारत में  रग्गायतों का परिचय दिया, और फिर उनका 'बॉम बॉम चैलेंज देखते ही देखते सोशल मीडिया में घूम मचाने लगी, उनकी एक और सॉन्ग', ' थोड़ी दारू' मीका सिंह के साथ भी खूब पॉपुलर हुई। वे इटालियन ऑपेरा सिंगर के बुक में भी अंकित है। कई प्रेस्टीजीअस अवार्ड्स से सम्मानित जियोकोंडा वेसिचेली आज लोकप्रियता के परचम लहरा रहीं हैं और ऐसे में वे  बॉलीवुड के आसमान में कुछ खास बिजली कड़काने के लिए तैयार है और मायापुरी के साथ जुड़कर वे अपनी कहानी बताने को उत्सुक है।प्रस्तुत है, 7 अंतर्राष्ट्रीय ओपेरा पुरस्कार विजेता गायिका जियोकोंडा वेसिचेली से एक अन्तरंग मुलाकात जो उन्होंने अमेरीका से दी हैआपको बॉलीवुड ओपेरा शैली के आविष्कारक और पायनियर माना जाता है, इसके बारे में आपका क्या कहना है?मैंने पहली बार भारत में बॉलीवुड संगीत के साथ ओपेरा पेश किया है..इसलिए इसका नाम 'बॉलीवूओपेरा' रखा गया जो मेरा आविष्कार है, जिसे दिल्ली में पेटेंट कराया गया है और मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि मैंने यहाँ भारतीय महिला पुरस्कार प्राप्त किया है, (भले ही मैं भारतीय नहीं हूँ , सिर्फ इसलिए कि मैंने पश्चिमी संस्कृति और भारतीय संस्कृति के बीच एक संस्कृति पुल का निर्माण किया है। मुझसे पहले यही पुरस्कार मदर टेरेसा को एक अन्य विदेशी के रूप में भी दिया गया था।आपने कई बॉलीवुड फिल्मों में गाया है और लाइव प्रदर्शन भी किया है, भारतीय श्रोताओं और दर्शकों के बारे में आपका क्या अनुभव है?एकदम कमाल का अनुभव है। मैंने जहां भी गाया, मुझे दर्शकों से स्टैंडिंग ओवेशन मिला क्योंकि भारतीय दर्शक हमेशा खुले विचारों वाले और नई तथा अभिनव चीजों के प्रति उत्सुक होते हैं ... ठीक वैसे ही जैसे मैं हूं, क्योंकि मेरे अंदर एक जिज्ञासु बच्चा है जो मुझे हमेशा अनसुलझी चीजों की ओर धकेलता है। यह जीवन में आगे बढ़ने और विकसित होने का एक तरीका है, अपनी आंखें और इंद्रियों को हमेशा खुला रखना है ... ठीक वैसे ही भारतीय लोग करते हैं .. इसलिए भारत इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है और मुझे यकीन है कि बहुत जल्दी भारत दुनिया का, नया सबसे शक्तिशाली देश बन जाएगा।आपने कई भारतीय कलाकारों और गायकों के साथ सहयोग किया यानी  कोलैबोरेट किया है और कई वैश्विक गायकों और संगीतकारों के साथ भी काम किया। भारतीय कलाकारों, संगीतकारों और अन्य गैर भारतीय कलाकारों में आपने क्या अंतर पाया?वेल,  गैर भारतीय कलाकार, महीनों पहले से सब कुछ  योजनाबद्ध तरीके से बनाते हैं, वे समय और तिथियों के संबंध में अधिक सख्ती और अनुशासित से उसका पालन करते हैं, जबकि भारतीय कलाकार अधिक सहज और कम मेकेनिकल होते हैं, यहां कई बार मुझे लगता था कि हम कोई गाना या प्रोजेक्ट डेलीवर करने में बहुत देरी कर रहे है क्योंकि आखिरी मिनट तक कुछ भी तैयार नहीं होता था..लेकिन फिर आखिरी मिनट में जादू हो जाता था और परिणाम शानदार निकल आता । जिस कमाल से, भारतीय कलाकार संगीत के सैकड़ों पन्नों को लिखे बिना ही सुर संगीत के हर एक नोट को दिल से याद कर सकते हैं, मुझे वह बेहद पसंद है, ...मुझे सच में लगता है कि भारतीय लोगों के डीएनए में कुछ ज्यादा ही कमाल है, शायद इसलिए कि वे बहुत तरह के योग करते हैं या शायद उनका भोजन कुछ खास होता है। मुझे नहीं पता..लेकिन यह बहुत ही सुंदर और आश्चर्यजनक बात है कि भारतीय बच्चे केवल 3 साल की उम्र में लिखना शुरू कर देते हैं जबकि पश्चिमी देशों में, उदाहरण के लिए बच्चे 6 साल की उम्र में लिखना शुरू करते हैं। मैं यहां कई ऐसे लोग से मिली हूँ जो मुँह ज़बानी मोबाइल नंबर्स याद रखते हैं या सबसे आश्चर्यजनक बात कि वे पूरे कॉन्सर्ट, जिसमें हजारों नोट्स होते हैं उसे बिना लिखे दिल में ही याद रखते हैं जैसे कि उनके पास इंसानी ब्रेन नहीं बल्कि कंप्युटर हो।आपकी आवाज मधुर होने के साथ साथ उमंग से भरी नटखट भी है, मैं जानना चाहती हूं कि दरअसल आपकी वास्तविक आवाज कैसी है और आपके गायन शैली की विशेषता क्या है?मेरी आवाज मेरी आत्मा का आईना है। इसमें बहुत सारी संज्ञाएं और आवाजें हैं और यह बहुमुखी है। मेरे संगीत प्रशिक्षक लुसियानो पवारोटी (दुनिया के सबसे बड़े ओपेरा सिंगर) हमेशा कहा करते थे कि बड़े में छोटे शामिल हो सकते हैं लेकिन छोटे में बड़े नहीं समा सकते। मैंने एक ओपेरा गायक के रूप में अपना करियर शुरू किया, जहां ओपेरा गायक बिना माइक्रोफोन के गाते हैं और सब कुछ लाईव होता है और एक मजबूत आवाज के साथ, माइक्रोफोन का उपयोग किए बिना लगभग 50 संगीत वाद्ययंत्रों के विशाल ऑर्केस्ट्रा को ओवर पास करते हुए गाना होता है और वो भी अपनी आवाज इन सारी ध्वनियों के बीच गुम किए बिना..और ज़रा कल्पना तो कीजिए कि ओपेरा की अवधि 3 से 5 घंटे तक हो जाती है।इसलिए जब हम एक बहुत ही कठोर जीवन जीने के आदी हो जाते हैं जहां थिएटर में लाइव सिंगिंग करने के लिए सुबह चार बजे उठना पड़ता है और एक ही समय में गायन करते हुए अभिनय शुरू भी करना पड़ता है और हजारों पेजों के ओपेरा स्कोर को याद करना, जब आप मंच पर होते हैं और 'कंडक्टर तथा ऑर्केस्ट्रा के साथ एक टेम्पो में समन्वय करना पड़ता हैं तो इन सारी क्रियाओं को एक ही समय में सिंक्रोनाइज़ करना..यह आसान बात नहीं है..लेकिन हाँ, यह आपके मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाता है..यही कारण है कि जब मैं पॉप गाती हूँ और मैं माइक का भी उपयोग करती हूं और कोई ऐक्टिंग स्क्रिप्ट फॉलो करने की जरूरत नहीं होती तथा  पचास के बदले सिर्फ पाँच ऑर्केस्ट्रा एलिमेंट होते हैं तो यह मेरे लिए काफी आरामदायक और रिलैक्ससिंग है, और इस तरह का मूड मुझे अपनी आवाज में नई नई खोज करने की संभावना देती है। क्योंकि मैं एक विलक्षण बच्ची के रूप में 4 ऑक्टेव रेंज एक्सटेंशन के साथ  हुआ करती थी और अब मुझे पता चला है कि यह बड़ी रेंज न केवल मेरी आवाज के विस्तार में है, बल्कि विभिन्न रंगों और आवाज उत्सर्जन में भी है जो मैं अपनी स्वर से कर सकती हूं। यह मुझे बहुत खुश करती है क्योंकि मैं हमेशा एक ऐसा चित्रकार बनना पसंद करती हूं जिसके पास अपनी उत्कृष्ट कृति बनाने के लिए 20 रंग हों, न कि केवल एक रंग। मैं एक रंग की चित्रकार होना नहीं चाहती।कृपया हमें 22 जनवरी को आयोजित अपने संगीत कार्यक्रम के बारे में कुछ बताएं?मेरे करियर की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह एक प्यारा आश्चर्य रहा है, जो एक बाल कलाकार के रूप में शुरू हुआ था। मैं संगीत कार्यक्रम में तीन  टेनर्स के साथ रही और बहुत सारी खूबसूरत यादें अब मेरे दिल में हैं क्योंकि मैंने संगीत कार्यक्रम की शुरुआत .. ओपेरा 'टोस्का' द एरिया 'विसी डी'आर्टे' गाकर किया जिसने मेरे करियर के शुरुआती पॉइंट को सील कर दिया, जब मैंने पहली अंतर्राष्ट्रीय ओपेरा प्रतियोगिता जीती (फिर 6 अन्य भी मिली ) लेकिन वो पहला मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि तब दिग्गज पियानोवादक, सोप्रानो मारिया कैलस ने, पियानो में मेरा साथ देने के बाद, मेरे करीब आकर मुझसे कहा 'आपकी आवाज मुझे मारिया कैलास की आवाज की बहुत याद दिलाती है, आप एक बच्ची होने के बावजूद  tosca की तरह इतना कठिन ऑपेरा गा पा रही हो तो जब तुम वयस्क बन जाओगी तो कितना बढ़िया गाओगी?' और वास्तव में जब मैं बड़ी हुई तो एक समकालीन संगीतकार, जो दर्शकों के बीच बैठा था (शो के दौरान गायकों के लिए यह कितनी बड़ी जिम्मेदारी थी!) ने 'लविनिया फुगिता ऑपेरा ' की रचना की, जो एक बहुत ही कठिन ओपेरा है, जिसे मैंने केवल 5 दिनों में सीखा (मेरे सहयोगियों को इसे सीखने में महिनों लगे) और मैंने इसे गाया। 'टीट्रो कॉमुनाले डी मोडेना' और यह इतालवी सरकार Radio2 में दुनिया भर में पहली बार प्रसारित किया गया था..- तथा मैं सोप्रानो सिंगर के रूप में मश्हूर हो गई।  इस तरह मेरा नाम आजकल ओपेरा के विश्वकोश यानी encyclopedia में है।आप दुनिया की पहली गायिका हैं जिन्होंने अपनी बॉलीवूपेरा शैली के माध्यम से पश्चिमी और पूर्वी संगीत तथा संस्कृति के बीच एक फ्यूजन का निर्माण किया है? आप इसे कैसे संभव बना पायीं?हाँ, आपने बिल्कुल सही और बेहतरीन प्रश्न किया। वाकई में यह उन हज़ारों विचारों में से एक था जो मेरे अति क्रिएटिव मस्तिष्क ने मुझे सुझाया था और यह मेरे जीवन के एक विशेष क्षण में हुआ जब मैं एक आध्यात्मिक यात्रा के लिए भारत आई थी तथा मैंने गंगा नदी में डुबकी लगाई तो उसी क्षण में मेरी गंगा माता जी ने मुझे मेरे जीवन के सभी सवालों के जवाब दे दिए और मेरे जीवन के सभी दृष्टिकोण एक अविश्वसनीय, प्यारे और स्फूर्तिदायक तरीके से बदल गई। इसलिए मैंने सोचा कि भारत ने मुझे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बहुत कुछ उपहार में दिया है तो मुझे भी कर्म की प्रक्रिया में अपनी रचनात्मकता का थोड़ा सा हिस्सा भारत को उपहार में देना ही है, जो du ut des ('डू यूट देस')आप एक जन्मजात कलाकार और गायिका हैं, क्या आपने कभी बॉलीवुड में इस टॉप की जगह में होने के बारे में सोचा था? मेरा मतलब है कि क्या आपने कभी सोचा था कि आपको बॉलीवुड संगीत ओपेरा फ्यूजन की रानी के रूप में टैग किया जाएगा?नहीं, मैंने कभी सोचा भी नहीं होगा..इसलिए भी, कि जब ऐसा हुआ तो मैं अपने जीवन के सवालों के जवाब  खोंजने के लिए भारत में थी और मैं अकेली आई थी , गुप्त रूप से, एक पाँच किलो के छोट से बैग के साथ, केवल आवश्यक चीजें ले कर, एक साहसिक मूड में, कोई मेकअप नहीं, कोई बड़ा सामान नहीं, कुछ पता नहीं था कि कहाँ ले जाना है, सभी असुरक्षा की चीजें और वह सब जरूरी चीजों में थी, न कि फालतू चीजों में और फिर वो जादू हो गया जिसका आपने जिक्र किया। और फिर मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।क्या आपने कभी हमारी पत्रिका 'मायापुरी'  देखी या पढ़ी है?हाँ, बिल्कुल बिल्कुल,  मैंने मायापुरी खूब देखी और पढ़ी है और मुझे इसे पढ़ना बहुत अच्छा लगा। इसमें बहुत सुंदर और इंटेलिजेंट सामग्री छपती है।