जब जाते है सितारे जेल हो जाती है कानूनी धाराएं फेल!

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सलमान खान को मिली जमानती रियायत ने आम आदमियों को बीच बहस में ला दिया है। सबका कहना है यह तो बड़े लोगों का हिट रन केस वाला मामला था, जिसे सही अर्थों में जेल एंड रन वाला मामला कहा जाना चाहिये। हमारा आशय कानून क धाराओँ क
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उठा पटक से नही हैं और ना ही यह कहना है कि कहीं कानून सलमान के मामले में अमर्यादित हुआ है। हम तो सिर्फ यह बताना चाहते है कि जब भी सितारे जेल जाते है या जानेवाले होते है, कानून की धाराएं पानी के बहाव की तरह इस्तेमाल होती है।
सलमान की कहानी सामने है। सारे बड़े से बड़े कानूनविद मान रहे थे कि इस राॅबिनहुड छाप एक्टर को जेल जाना ही है (कुछ अंतराल के लिए तो टल ही गया) कुछ समय ही बीते है जब संजयदत्त के फेरलो की बात समय रहते सुलझाई नही जा पायी थी दत्त यरवदा जेल के गेट पर पहुंचकर दो दिन के लिये घर लौट आये थे। तब भी सवाल उठा था कि क्या आम कैदी को यह लाभ मिल सकता है? जिस व्यक्ति पर देश द्रोह का आरोप लगाकर खारिज किया गया हो, जिसे एके 47 और मुंबई बम ब्लास्ट में शामिल किए जाने की टाडा की रस्सी में बांधा जा चुका हो, उसको साल में दो बार पैरोल मिल सकता है, और, उसकी सजा छरू साल से घटाकर पांच साल की जा सकती है.. क्योंकि वह फिल्म सितारा है इसीलिए न भाई यह हम नही लोग कहते है।
सुप्रसिद्ध सितारे स्व.राजकुमार के बड़े साहब जादे पुरू ने मुंबई के बान्द्रा एरिया में सड़क पर सो रहे आठ मजदूरों के ऊप अपनी गाड़ी चढा दिया था। उस समय तीन मर गये थे, दो घायल हुए थे बात 1993 की है तब पुरू को 30 हजार रूपए पेनाल्टी भरना पड़ा था कोई बड़ा शोर शराबा नहीं हुआ क्योंकि पुरू बड़े स्टार नहीं थे। और अब्राहम की मोटर साइकिल ने साल 2006 में दो लोगों को रौंद दिया था। कोई मरा नहीं था मगर घायलों की हालत गंम्भीर बताई गयी थी। छः साल बाद एक अदालत ने जाॅन को 15 दिन की सजा सुनाई थी- बा मशक्त! लेकिन उन्हें जमानत मिल गई। फरदीन खान का केस अलग था। वह ड्राइविंग में नहीं, ड्रग-ड्वेलिग के चक्कर में पुलिस के हाथ पड़े थे। वह आरोपों के मुताबिक कोकिन लिये हुए पाये गये थे। बड़ी मामूली मात्रा में। उनको बस नशामुक्ति सेन्टर में जाने का आदेश पारित हुआ था।
सैफ अली खान का स्टारडम और प्यार दोनों परवान पर था। वह एक पंचतारा होटल में करीना और करिश्मा के साथ खाना खाने गये थे। जब एक अनिवासिय भारतीय व्यापारी को पीट दिया था। पुलिस केस बना, हुआ क्या? फिल्म वालों को पुलिस कानून की धाराओं का लचीला सोटा पकड़ाती है। जबकि दूसरों को कड़ाई से जकड़ती है, ऐसा भी नहीं है। सेलिस्टर परेरा और संजीव नंदा जैसे व्यापारी-पुत्रों ने भी हिट एंड रन का स्वाद चखा है। जिनको पंद्रह और छः लोगों को अपनी गाड़ी से रौंदने का दंड दो साल और तीन साल का मिला है। फुटबाॅलर सिम्पसन, म्यूजिक प्रोड्यूसर फिल स्पेक्टर, जैमस ब्राॅउन (गायक) और स्नीप जैसे एक्टरों ने भी सजा झेला है। बेशक सलमान का केस (हिरण मारने वाला) इस समय सुर्खियों में नहीं है, मगर कहा तो जा सकता है कि अभी एक ‘जमानत’ से उनको और गुजारना है।
बेशक 13 सालों में सलमान के हिट एंड रन को लेकर एक चुस्त दुरूस्त स्क्रिप्ट बनी है, जिसपर हो सकता कल एक फिल्म भी बने… और तब, यही आरोप लगाने वाले फिल्म को हिट भी करायेंगे! बेशक इस समय ‘जेल एंड रन’ की चर्चा है। जहां कानूनी धाराएं पानी के बहा के साथ हैं!…मामला एक सितारे के जेल जाने का जो है!

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Mayapuri