प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की रोनी स्क्रूवाला के लेखन की बड़ाई

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माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की रोनी स्क्रूवाला के लेखन की बड़ाई, उनकी पहली पुस्तक ‘ड्रीम विद याॅर आइज ओपन’ के लिए दी बधाई देश में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना पुस्तक का लक्ष्य, 2 अप्रैल को विमोचन
श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश की असीमित ऊर्जा का लाभ उठाकर भारत को एक उद्यमशील देश बनाने के उच्च लक्ष्य के साथ आशा की अभूतपूर्व लहर देखी जा रही है। वर्तमान परिदृश्य पेश करते हुए भारत की प्रथम पीढ़ी के सर्वाधिक सम्मानित उद्यमी रोनी स्क्रूवाला ने अपनी पुस्तक – ‘ड्रीम विद याॅर आइज ओपन’ के लोकार्पण की घोषण की है। इस पुस्तक में उनके 25 वर्षों की उद्यमशील यात्रा का सारगर्भित विवरण है। इस पुस्तक में रोनी ने अपनी असफलताओं एवं सफलताओं का उल्लेख करते हुए यह विश्वास भरने का प्रयास किया है कि सब कुछ संभव है और इसे इसी पीढ़ी में किया जा सकता है।0x600 माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रोनी को अपनी बधाई और शुभकामना संदेश भेजकर इस पुस्तक के माध्यम से देश में उद्यमशीलता के प्रचार के लिए उनके प्रयासों की प्रशंसा की है। माननीय प्रधानमंत्री ने कहा है, ‘‘मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि श्री रोनी स्क्रूवाला ने उद्यमशीलता पर ‘ड्रीम विद याॅर आइज ओपन’ नामक एक पुस्तक लिखी है। मुझे उम्मीद है कि इस पुस्तक से भारत के युवाओं को अपने सपने पूरे करने और ऐसा करते हुए लाखों भारतीयों के जीवन को बेहतर बनाने के नवोन्मेषी रास्ते ढूँढ़ने के लिए अपनी ऊर्जा लगाने की प्रेरणा मिलेगी। इस अवसर पर मैं श्री रोनी स्क्रूवाला को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे आशा है कि उनके इस प्रयास से अनेक लोगों को प्रेरणा मिलेगी।‘‘

Ronnie Book Cover without red - Finalरोनी स्क्रूवाला ने कहा, ‘‘इतने दूरदर्शी एवं मिलनसार नेता और हमारे देश के प्रधानमंत्री से इस प्रकार के उत्साहवर्द्धक संदेश पाना मेरे लिए सम्मान की बात है। मुझे इस बात की खुशी है कि श्री नरेन्द्र मोदी उद्यमशीलता की शक्ति पर बल देते हैं। मैं स्वयं भी महसूस करता हूँ कि देश को और अधिक उद्यमियों की आवश्यकता है और आज भी 99 प्रतिशत लोगों में अपने बलबूते कोई व्यवसाय आरंभ करने का पर्याप्त आत्मविश्वास नहीं है। ड्रीम विद याॅर आइज ओपन पुस्तक में मेरी यात्रा की असफलताओं एवं सफलताओं, विचारों एवं कथाओं की चर्चा है। इसमें दो दसकों से अधिक समय में कुछ कामयाब (और कुछ कम कामयाब) व्यवसायों को खड़ा करने के दौरान मेरे विशाल अनुभवों और अनगिनत सीखों का विवरण है। इस पुस्तक का विचार मेरे सीखों को साझा करने की इच्छा और युवा एवं सुस्थापित उद्यमियों को उनकी यात्रा के हर चरण में प्रेरित करने के भरोसे से उत्पन्न हुआ था।‘‘
रतन टाटा, मुकेश अम्बानी, आनन्द महिन्द्रा, नन्दन निलेकणी सहित प्रमुख काॅर्पोरेट रहनुमाओं के साथ-साथ अनेक अन्य लोगों ने भी रोनी स्क्रूवाला की पुस्तक की समीक्षा की है।
रोनी ने अपनी बात के अंत में कहा, ‘‘हमारे देश की उद्यमशील संभावनाओं को सामने लाने की दिशा में यह पुस्तक मेरा एक छोटा योगदान है। मेरे लिए यह उत्साहवर्द्धक बात है कि मेरे मित्रों और सहकर्मियों ने आगे बढ़कर इस पुस्तक के प्रति और इसमें उठाए गए मुद्दों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। मुझे आशा है कि इस पुस्तक से लोगों को सपने देखने और बड़े सपने देखने की प्रेरणा मिलेगी।‘‘


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Mayapuri

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