स्मृति ईरानी पर इतनी बहस क्यों?

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यह ट्विटर भी क्या चीज़ है जहाँ कोई भी कभी भी किसी के बारे में कुछ भी बयान कर सकता है, अब देखिये ना, जैसे ही स्मृति ईरानी को एच आर डी मिनिस्ट्री से शिफ्ट किये जाने का फैसला हुआ वैसे ही उनके क्रिटिक्स उनपर टूट पड़े और तरह तरह के कमेंट्स पास करने लगे, कहीं किसी ने लिखा #बाय बाय स्मृति, तो कहीं किसी ने लिखा आंटी नेशनल इज़ नाउ साड़ी नेशनल, वगैरा वगैरा। ना जाने क्यों स्मृति शुरू से ही कुछ लोगों की आँखों की किरकिरी बनी हुई थी और बदकिस्मती से किसी न किसी विवाद में शुरू से ही सुर्खियों में रही जो एक राजनेता के लिये अच्छी खबर नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं की

स्मृति ही एकमात्र

कॉन्ट्रोवर्शियल नेता थी, और भी बहुत सारे मिनिस्टर्स है जो विवादों में घिरे रहतें है तो फिर स्मृति पर ही गाज़ क्यों गिरी। कुछ राजनीतिज्ञ पंडितों का मानना है कि सच्चाई शायद यह है कि राजनीति दुनिया में इतनी कम उम्र, अड़तीस वर्ष में कदम रखने पर वे बहुत सारे उम्रदराज़ो की आँखों में खटकी और फिर स्मृति के शिक्षा पर उँगलियाँ उठने में देर नहीं लगी, कुछ लोगों ने तो उन्हें नाचने गाने वाली के रूप में भी संबोधित करने और यह कहने में भी शर्म महसूस नहीं की कि राजनीति के इस पायदान पर पहुँचने के लिये स्मृति ने अपनी खूबसूरत नारी होने का जादू भी चलाया होगा, अब पुरुष प्रधान राजनीति क्षेत्र में स्मृति की शालीनता से पहनी साड़ी और बड़ी सी बिंदी, चौड़ी सिंदूर रेखा भी किसी का मुँह बंद न कर सकी। खैर, स्मृति अपनी पॉलिटिकल टैलेंट, बेहतरीन ऑरेटर होने के गुण और आम जनता से आसानी से जुड़ने की प्रतिभा के चलते आज नहीं तो कल जरूर राजनीति में चोटि पर होगी, उनकी प्रतिभा से मायापुरी उस वक्त भी प्रभावित हुई थी जब मैंने मायापुरी के लिये उनसे लंबा चौड़ा इंटरव्यू फोन पर लिया था, जब वे राजनीति में आई भीं नहीं थी। बस थोड़ा इंतज़ार और , थोड़ा और।

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Mayapuri