‘स्टारडम में आपको बहुत-सी चीजों को खोना पड़ता है…’- रितिक रोशन

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 वॉर अभी सबसे अपेक्षित फिल्म है, जिसमें आप और टाइगर पहली बार दिखने जा रहे हैं, इसे लेकर आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

– मैं काफी उत्साहित हूं। मैं अभी भी फिल्म को फाइनल टच देने में लगा हूं और अभी कई काम करने बाकी हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि काम पूरा होने के बाद मैं काफी खुश और संतुष्ट रहूंगा।

आपके और टाइगर के अलावा पिछले कुछ वर्षों में कुछ अन्य एक्टर्स ने बॉलीवुड में एक्शन ओरिएंटेड फिल्में की हैं। क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड में अब कुछ ही एक्शन स्टार हैं?

– ओह हां, मुझे लगता है कि इंडस्ट्री में करीब-करीब ढेरों एक्टर्स एक्शन कर सकते हैं। टाइगर, रणवीर, वरूण और विक्की कौशल के अलावा ऐसे बहुत सारे कलाकार हैं जो एक्शन कर सकते हैं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि यहां एक्शन अभिनेताओं की कमी है। लेकिन मैं हमेशा से एक्शन एंटरटेनर का एक बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं और जब से मैंने धूम 2 और बैंग-बैंग किया है तब से इस तरह की फिल्मों में एक्टिंग करने का प्रयास कर रहा हूं और इसका परिणाम है कि अब मेरे पास वॉर है। ये वो रूप हैं जो सबसे आकर्षक हैं और मैं हमेशा ऐसी फिल्में करने की सोचता रहा हूं, लेकिन वो मुझे मिलती नहीं, पता नहीं, लेकिन जब वॉर मिली तो मैं काफी एक्साइटेड था।

ओके सर, 80 और 90 के दशक में हिंदी सिनेमा का काफी दबदबा रहा था, लेकिन अब साइको, रोमांटिक और कॉमेडी फिल्में आ रही हैं। सिद्धार्थ औऱ कुछ अन्य निर्देशकों की बात छोड़ दें तो आपके अनुसार, आखिर क्यों फिल्म निर्माता इस जॉनर की फिल्मों से परहेज कर रहे हैं और लंबे समय तक इस तरह की एक्शन फिल्मों का निर्माण नहीं किया है?

– मुझे लगता है कि, सही और बेहतरीन मनोरंजक एक्शन फिल्म बनाना काफी कठिन है। यह आसान नहीं है, क्योंकि लोगों को लगता है कि एक्शन का मतलब केवल कारों को उड़ाना है, लेकिन ऐसा नहीं है। एक्शन के लिए वास्तव में एक बेहतरीन पटकथा की जरूरत होती है। क्योंकि योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्यों और परफेक्शन में ही एक्शन है। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि हीरो किस तरह एक्शन की भूमिका में पूरी तरह खुद को शामिल कर लेता है। इसके साथ ही अन्य किरदारों का रवैया कैसा है, इसे भी ध्यान रखने की जरूरत है। मिशन इंपॉसिबल आज भी बेंचमार्क है, क्योंकि इसकी पटकथा बेहतर तरीके से तैयार की गई है और इसके किरदार भी काफी बेहतरीन और सक्षम हैं। वहां स्पून फीडिंग नहीं किया जाता। हमारे सिनेमा में, चूंकि हम स्पून फीडिंग के काफी आदि होते हैं, और यही कारण है कि एक समय के बाद हमारे दर्शकों को एक्शन फिल्मों को देखना काफी उबाऊ होता जा रहा है, क्योंकि यहां केवल स्पून फीडिंग ही होता है। यह काफी आसान होता है, लोग सोचते हैं, ये क्या हो रहा है यार, क्योंकि एक्शन बिल्कुल नकली की तरह होता है। इसलिए, मुझे लगता है कि अब मैं बदल रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि वॉर के साथ लोग इस बात को समझना शुरू कर देंगे कि एक्शन को दिमाग के अनुसार विभाजित करने की जरूरत है, कि वो किरदार जो है वो गन उठाएगा या उसके आगे भी सोचेगा कि यार मैं अगर गन नहीं उठाउंगा और यहां से भागकर नहीं जाउंगा तो क्या होगा…इसकी योजना बनानी होगी, एक्शन में थ्योरी होनी चाहिए और मुझे लगता है कि वॉर इस उम्मीद पर खरी उतरेगी। और हां, इसके लिए आपको बजट के साथ ही वैसे समर्पित कलाकारों की जरूरत है, जो खुद को किरदारों में ढाल सकें। और यह काफी बहुत महत्वपूर्ण बात है।

लंबे समय तक इंडस्ट्री में रहने के नाते, कहो ना प्यार है से लेकर अब तक भी टाउन में कई बहुमुखी अभिनेताओं के बीच अब इंडस्ट्री में आप देश के बेहतर स्टार के तौर पर जाने जाते हैं। लेकिन क्या आपको लगता है कि इस तरह के स्टारडम के लिए प्राइस टैग की जरूरत होती है?

– कीमत का मतलब यह है कि आपको ज़िम्मेदारी उठानी होगी, आपको सामाजिक ज़िम्मेदारी उठानी होगी, आपको उस चीज़ के लिए जवाबदेह होना होगा जो आप कहते हैं। आपको अपनी गोपनीयता का थोड़ा सा त्याग करना होगा, लेकिन इसके लिए थोड़ी कीमत की जरूरत होती है। यह स्टारडम ही है, जिसका उपयोग बहुत सारी अच्छी चीज़ों के लिए किया जा सकता है और इसमें आपको बहुत सी चीज़ों को खोना होगा और कई ऐसी चीजे हैं, जिसे आप हासिल कर सकते हैं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि, इसके पीछे शिकायत करने का कोई कारण होना चाहिए।

सर, आपने हाल ही में एक साधारण भारतीय व्यक्ति का किरदार निभाया है, जो बाद में काम की बदौलत एक स्टार बन गया, जो सुपर 30 के जरिए सामने आया और अब जो बॉलीवुड सिनेमा में बदलाव ला रहा है। आप इस बदलाव को कैसा देख रहे हैं?

– अगर मैं ईमानदारी से कहूं तो, मैं केवल अच्छी पटकथा पर ही ध्यान दे रहा हूं। परिवर्तन वास्तव में इस तथ्य में है कि अब हम जिस तरह से अपने कंटेंट को निर्देशित कर रहे हैं वह बहुत तेज और वास्तविक हो रहा है और स्टार या आम लोग इससे खुद को काफी अच्छी तरह से जोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं मेलोड्रामा भी खत्म हो गया है और अभिनय में भी वास्तविकता है और यह परिवर्तन वास्तव में उस कंटेंट दृश्य को ठोस बना रहा है। ये फिल्में अब वास्तव में अच्छा कर रही हैं, इसलिए क्या होने जा रहा है, लोग इस बात की चिंता तब तक नहीं करेंगे जब तक हम जो प्रस्तुत कर रहे हैं वह वास्तविक और प्रभावपूर्ण हो। इस तरह की बहुत सारी फिल्में बनाई जाएंगी। कई ऐसी अलग तरह की फिल्में जो दस साल पहले नहीं चलीं, अब सुपरहिट बन सकती हैं। अब कई चीजें खुलकर सामने आ गई हैं, अब और कई हिट फिल्में होंगी, कई फिल्म निर्माताओं में आत्मविश्वास पैदा होगा और वे इस तरह की फिल्में बनाने को प्रेरित होंगे। मुझे लगता है कि यह सब अच्छा बदलाव है।

आपके द्वारा अब तक की गई सभी फिल्मों को दर्शकों का कैसा रिस्पांस मिला और उनकी विपरीत प्रतिक्रया को आप किस तरह लेते हैं?

-मैं वास्तव में कभी इस बारे में नहीं सोचता कि दर्शक जैसा मैं सोचता हूं उस तरीके से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे। हालांकि अगर क्रॉस कॉपी करने की बात हो, तो मैं ही प्रमुख हूं,क्योंकि मैं जानता हूं कि फिल्म कैसा प्रदर्शन करेगी। इसलिए मैं किसी से कुछ नहीं पूछता, लेकिन मेरे पास उत्साह है और थोड़ी चिंता भी, क्योंकि मन में हमेशा एक सवाल उठता है कि क्या वे धैर्य से काम लेंगे, क्योंकि मैं वास्तव में सही काम करना चाहता हूं।

सर, आप अलग अलग तरह के किरदारों में आ रहे हैं, इनमें पौराणिक ग्रंथों पर आधारित रामायण भी है, ये हमारा आखरी प्रश्न है, क्या आप इसपर कुछ कहेंगे?

– मैंने यह फिल्म साइन नहीं की है, मैं अभी इस पर विचार कर रहा हूं। अभी मुझे वॉर की रिलीज का इंतजार है और इसके बाद मैं अपनी अगली फिल्म की घोषणा करुंगा। इसलिए अभी कुछ भी ऑफिशियल नहीं है।

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