INTERVIEW: मेरी राय में सफलता का कोई आधार नहीं होता – हुमा कुरैैशी

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फिल्म ‘गैंग ऑफ वासेपुर’ फेम अदाकारा हुमा कुरैैशी की खुशी थमते नहीं थम रही है. क्योंकि अब वह भी ग्लोबल अदाकारा बन गयी हैं. इसके अलावा महज एक माह के अंतराल में उनकी दो फिल्में ‘जॉली एलएलबी 2’ तथा ‘वायसराय हाउस’ प्रदर्शित हो रही है. इनमें से ‘वायसराय हाउस’ ने ही उन्हें ग्लोबल अदाकारा बना दिया है. क्योंकि फिल्म ‘वायसराय हाउस’ में उनके साथ कई विदेशी कलाकारों ने अभिनय किया है. जबकि फिल्म की निर्देशक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व ब्रिटेन में रह रही निर्देशक गुरिंदर चड्ढा हैं।

आपका पाँच साल का करियर हिचकोले लेकर आगे बढ़ा है. आपकी कुछ फिल्में असफल रही?

मैं फिल्म की सफलता या असफलता को लेकर कभी विचार नहीं करती. मैं हमेशा अच्छी कहानी अच्छे किरदार चुनने की कोशिश करती हूं. मैं उसमें अपनी तरफ से सौ प्रतिशत देती हूं, मतलब मेरे हाथ में जो हैं, वह सब मैं करती हूं. उसके बाद फिल्म की सफलता असफलता तय करना मेरे हाथ में नहीं होता. वह दर्षकों के हाथ में हैं. हां! मैं अपनी तरफ से कोशिश करती हूं कि मुझे भेड़चाल वाला काम नहीं करना है. फिर भले ही मुझे सफलता मिलने में 5-10 साल लग जाएं या कल का कल मिल जाए, मेरी राय में सफलता का कोई आधार नहीं होता. फिलहाल तो मैं फिल्म ‘जॉली एल एल बी 2’ को लेकर उत्साहित हूं. इस फिल्म से मेरा करियर एक नई उड़ान भर सकता है।

 फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ तो ‘जॉली एलएलबी’ का सीक्वल है. क्या आपने पहली फिल्म देखी थी?

मैंने पहली फिल्म देखी थी. मुझे वह फिल्म बहुत पसंद आयी थी. ‘जॉली एलएलबी’ के प्रदर्शन के बाद फिल्म के निर्देशक सुभाष कपूर के साथ मेरी काम करने की इच्छा हुई थी. उसी दौरान सुभाष कपूर एक फिल्म का निर्माण कर रहे थे, जिसके लिए उन्हांने मुझसे संपर्क किया. मैं उनके साथ वह फिल्म करने वाली थी, पर कुछ वजहों से वह फिल्म शुरू नहीं हुई. मुझे खुशी है कि जब वह ‘जॉली एलएल बी 2’ बना रहे थे, तब उन्होंने मुझे फिर से फोन करके कहा कि वह मुझे इसकी कहानी सुनाना चाहते हैं. मैंने कहानी सुनी और मुझे कहानी पसंद आयी।Huma qureshi

आपका अपना किरदार क्या है?

मैं इसमें जॉली की पत्नी पुष्पा पांडे का किरदार निभा रही हूं. जॉली और पुष्पा यानी कि पति पत्नी के बीच बहुत अनयूजुवल रिश्ते हैं. यह दोनों आम वैवाहिक जोड़ों से इतर आपस में व्यवहार करता है. आपने ट्रेलर में देखा होगा. जॉली अपनी पत्नी पुष्पा से कहता है, ‘पूरे लखनऊ में ऐसा कौन पति होगा, जो अपने हाथों से पैग बनाकर पत्नी को पिलाएगा. ’पुष्पा पांडे शेरनी की तरह हैं. पुष्पा साफ साफ कहती हैं कि वह अपने पति को डांट सकती हैं, मार सकती हैं, पर कोई दूसरा उसके पति के खिलाफ बोले, वह नहीं सुन सकती है. जॉली एक केस पर काम करता है. तो कोर्ट रूम के अंदर और कोर्ट रूम के बाहर वह बहुत स्थितियों से गुजरता है. उस वक्त उसकी पत्नी ढाल बनकर उसके साथ खड़ी रहती है. वह किस तरह से उसकी सुरक्षा करती है, किस तरह से उसे आगे बढ़ने के लिए धकेलती है, यह सब देखने लायक है. यह एक बहुत खूबसूरत रिश्ते के साथ एक खूबसूरत प्रेम कहानी भी है. इस तरह की प्रेम कहानी वाली फिल्म अब तक नहीं बनी।

 अक्षय कुमार के साथ काम करके क्या सीखा?

अक्षय कुमार बहुत विनम्र इंसान हैं. वह सुपर स्टार होने के बावजूद आम इंसानों की तरह व्यवहार करते हैं.वह और उनका पूरा स्टाफ अपने काम से मतलब रखता है. बहुत ही अनुशासन प्रिय और मेहनती हैं. सिनेमा और काम के प्रति फोक्सड हैं. मैंने उनसे सीखा कि कलाकार को समय का पाबंद होना चाहिए. वह शूटिंग के लिए सुबह पांच बजे पहुंच जाया करते थे. मुझे लगता है कि यदि मैंने उनकी तरह अपने जीवन में अनुषासन को अपना लिया, मैं समय की पाबंद हो गयी, तो आधी बाजी जीत जाऊंगी।hum

 सुभाष कपूर को लेकर क्या कहेंगी?

सुभाष कपूर ने इस फिल्म को खास अंदाज में बनाया है. उन्हें इन चीजों की समझ है, वह पत्रकार रह चुके हैं.वह जिस ढंग से कहानी सोचते हैं, जिस ढंग से चरित्रों को लिखते हैं, वह बहुत अनूठा है. उनके लेखन में जादूगरी है. तभी तो पटकथा पढ़ कर मैं अति उत्साहित हो गयी थी।

 इसके अलावा क्या कर रही हैं?

गुरिंदर चड्ढा के निर्देशन में एक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म ‘वायसराय हाउस’ की है।

 फिल्म ‘वाइसराय हाउस’ कैसे मिली?

गुरिंदर चड्ढा ने ‘गैंग ऑफ वासेपुर’ देखी थी. वह मेरी प्रतिभा से वाकिफ थीं. लंदन में मैं अपने भाई साकिब सलीम के साथ फिल्म ‘दुबारा’ की शूटिंग कर रही थी, वहीं पर गुरिंदर से हमारी मुलाकात हुई. हमने ऑडिशन भी दिया. उन्हें लगा कि मैं उनकी इस फिल्म के किरदार में फिट बैठूंगी, इसलिए उन्होंने मुझे चुना।humanew

 फिल्म ‘वायसराय हाउस’ क्या है. इसमें आपका अपना किरदार क्या है?

1947 में भारत आजाद हुआ और हिदुस्तान का विभाजन भी हुआ था. उस वक्त अंतिम ब्रिटिश वायसराय लार्ड माउंट बेटन थे, तो उनके कार्यकाल के अंतिम 2-3 माह की कहानी है. यह फिल्म यह कहानी वायसराय हाउस के घर के अंदर की है, जिस बडे़ घर में लार्ड माउंट बेटन व अन्य ब्रिटिश अफसरों के साथ हमारे देश के बड़े बड़े नेता बैठकर विचार विमर्श कर रहे थे. तब घर में काम कर रहे एक हिंदू नौकर और एक उर्दू अनुवादक के बीच की प्रेम कहानी है. इस फिल्म में मैंने आलिया नूर का किरदार निभाया है. यानीकि यह एक प्रेम कहानी है।

 फिल्म ‘वायसराय हाउस’ की निर्देशक गुरिंदर चड्ढा को लेकर क्या कहेंगी?

गुरिंदर चड्ढा के साथ फिल्म ‘वायसराय हाउस’ करना एक सपना पूरा होने जैसा है. मैं लंबे समय से उनके साथ काम करने का सपना देख रही थी. उन्होंने इस फिल्म के लिए जो शोधकार्य किया है, उसके लिए उनकी, जितनी भी प्रषंसा की जाए, उतना कम है।huma-qureshi

 तो अब आप दूसरी भी इंटरनेशनल फिल्में करेंगी?

जरूर!!बशर्ते उसकी कहानी व कथानक मुझे आकर्शित करें. यदि उसमें कुछ नया करने का मौका मिल रहा हो, उसमें फन हो, उसकी स्क्रिप्ट लाजवाब हो. देखिए, मेरे लिए फिल्म की भाषा मायने नहीं रखती. मेरे लिए मायने यह रखता है कि उस फिल्म को करने से मुझे क्या मिलेगा? क्या मैं उस फिल्म को करके एक अच्छी कथा सुना पाऊंगी. क्या कलाकार के तौर पर मैं एक कदम आगे बढ़ पाऊंगी.

आप क्षेत्रीय भाषा की फिल्में भी कर रही हैं?

पहली बात तो मेरी नजर सिनेमा भाषा का मोहताज नहीं होता. दूसरी बात मैं अच्छा सिनेमा करना चाहती हूं. मैं उस सिनेमा का हिस्सा बनना चाहती हूं, जिसे करते हुए मैं अपने अन्दर की प्रतिभा को निखार सकूँ.कहानी व किरदार अच्छा लगा, तो मैंने मराठी भाषा की फिल्म ‘हाइवे’ की. अब यह फिल्म रिलीज हो चुकी है.इसके अलावा मैंने मलयालम के चर्चित निर्देशक उदय अनंथन के साथ मलयालम फिल्म ‘व्हाइट’ की, जिसमें मुझे वहॉं के सुपर स्टार ममूटी के साथ काम करने का अवसर मिला. यह फिल्म भी रिलीज हो चुकी है।


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Mayapuri

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