मैं एक गौरवान्वित नानी हूं- तनुजा 

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एक उत्कृष्ट और मूडी अभिनेत्री  तनुजा जिनसे हम बात करें तो वो रुकती नहीं है ,जिनका हाल ही में 23 सितंबर  को 76वाँ  जन्मदिन था. उनसे बात करके उनकी ऊर्जा  को देखकर मैं हैरान रह गया जब उन्होंने अपनी बेटी के बारे में  और अपने अभिनेत्री के तौर पर अभी तक के सफर के बारे में हमसे बातें की.

आप साठ के दशक की उन कुछ अभिनेत्रियों में से हैं जो अच्छे स्तर पर शिक्षित थी?जब आप अपने कैरियर को पीछे मुड़कर देखती है तो आपको कैसा महसूस होता है?

मैं एक पढ़े-लिखे परिवार से आती हूं. मेरे नानाजी बैंकर थे. और यह जादू ही कह सकते हैं कि जब लोग 30 साल की उम्र में थिएटर से जुड़ना सही समझते थे तब मेरी मां  शोभना समर्थ ने समाज की दकियानूसी सोच से अलग हटके कदम उठाया और तुरंत हां कर दिया जब उनको एक फिल्म में किरदार निभाने का मौका मिला.  मैं अपनी मां को धन्यवाद देना चाहूंगी जिन्होंने मुझसे हमेशा कहा की पढ़ाई सबसे पहले है. मैंने स्विटजरलैंड से अपनी हायर स्टडीज की है. मैं इंटरप्रेटर बनना चाहती थी अलग-अलग भाषा सीखना मुझे बहुत पसंद है. मैंने जर्मन और फ्रेंच तो नहीं सीखी है पर मुझे बंगाली,मराठी, हिंदी और अंग्रेजी आती है,जिसकी वजह से मेरा एक कम्युनिकेटर बनने का सपना पूरा हुआ.

आप अभिनेत्री कैसे बनी ?

मेरी बड़ी बहन नूतन अभिनेत्री थी जिन्होंने मेरी माता का अनुसरण किया था. एक एक्टर अपने आसपास के वातावरण को देखकर ही एक्टिंग करता है. अभिनय नहीं बदलता है आपकी परफॉर्मेंसेस बदलती हैं. मैं अपने जीवन में हमेशा कुछ सीखने की फिराक में रहती हूं .एक अभिनेता के तौर पर आप किरदार को देखते हैं,सुनते हैं, समझते हैं किसी फिल्म को करने से पहले.

क्या बॉलीवुड में आने से पहले आपने अभिनय सीखा था?

मुझे नहीं लगता कि किसी इंसान को कोई अभिनय करना सिखा सकता है, हाँ उस इंसान को अभिनय की बारीकियां सिखा सकते हैं, यह सिखा सकते हैं कि कैमरा के सामने कैसे परफॉर्म करना है. एक अभिनेता के तौर पर सबसे जरूरी बात जो होती है वह यह है कि आपके भीतर से भाव आने चाहिए तभी आप उसको पर्दे पर दिखा पाएंगे. मैं अपनी किसी एक फिल्म को नहीं चुन सकती हूं कि वह मेरे जीवन की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है.मैंने हर एक फिल्म से कुछ ना कुछ सीखा है, मेरा हर निर्देशक के साथ काम करने का अनुभव अच्छा रहा है और कैमरा मेरा हमेशा से दोस्त रहा है. इसलिए मुझे कैमरा के सामने काम करने में कभी दिक्कत महसूस नहीं हुई.

क्या अभिनय ही आपके पूरे जीवन की कहानी है?

देखो वेंकट, अभिनय करना सही है पर उस जीवन का क्या फायदा जिस जीवन में आप एक मनुष्य की तरह पेश ही नहीं आ पाए किसी से. हमें एक दूसरे से लड़ना,झगड़ना यह सब खत्म करना होगा एक मनुष्य होने के नाते.

आपके पसंदीदा अभिनेता कौन है?

मैं ज्यादा फिल्में नहीं देखती हूं. अगर मुझे किसी फिल्म के लिए आमंत्रित ना किया जाए तो मैं थिएटर में जाकर फिल्म  नहीं देखती हूं. मैं घर पर ही टीवी या डीवीडी पर फिल्मेॉ देख लेती हूं. मुझे ऐसा लगता है कि अब अच्छी फिल्मों की बहुत कमी हो गई है, क्योंकि लोग भूल चुके हैं कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि लोगों को सामाजिक संदेश देने का भी माध्यम हैं. मैं अपनी बहन को देखती थी जिन्होंने बंदिनी में बहुत बढ़िया काम किया है. मुझे दिलीप कुमार बहुत पसंद है.मैंने उनसे अनुशासन सीखा है.

आप अभिनेत्री के तौर पर अपनी ग्रोथ को कैसे देखती हैं?

मैंने 9 साल मेहनत करके इस इंडस्ट्री में खुद को स्थापित किया है. मुझे अभिनय करने के लिए कोई प्रेशर नहीं था क्योंकि मैं सिर्फ यही करना चाहती थी क्योंकि मैं सिर्फ इसी में अच्छी थी. और मेरा इमोशन नहीं बदला है. बस आज हमारी टेक्निक बहुत एडवांस हो गई है और यह बदलाव बहुत अच्छा है. मैंने अपने करियर में बहुत से एक्सपेरिमेंट भी की है. मैंने बहुत सी हिंदी फिल्में की जिसमें मेरा बहुत ही अलग किरदार रहा है. फिर मैंने मलयालम और बंगाली फिल्में भी की हैं.

आप अब फिल्मों में काम क्यों नहीं कर रही हैं?

नितेश भारद्वाज द्वारा निर्देशित मराठी फिल्म  पिठ्ठूरन मेरी अभिनेत्री के तौर पर अंतिम फिल्म थी. मैं किसी भी भाषा में फिल्म करने के लिए तैयार हूं .सिनेमा में भाषा रूकाव नहीं होता. मेरा कोई ऐसा ड्रीम रोल नहीं है. मैं बस स्क्रिप्ट में अपना किरदार देखती हूँ. मैं हमेशा से डायरेक्टर पर निर्भर  रहती हूं वो जो मुझे करने को कहते हैं मैं बस वैसा ही करती हूं.

आपकी बेटी काजोल आपकी परछाई लगती है और वो अपने प्रतिभा के दम पर आज एक बहुत बड़ी अभिनेत्री है.

मेरे पास सही शब्द नहीं है कि मैं  काजोल की प्रतिभा को बयां कर सकूं. अभी तक काजोल ने जितने भी फिल्मों में काम किया है उसमें उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. मैंने डीडीएलजे को आठ बार सिर्फ अपनी बेटी को देखने के लिए देखा था देखा था. वो एक अच्छी अभिनेत्री के साथ-साथ एक अच्छी मां भी हैं. उनके दो बच्चे हैं-न्यासा और युग. मैं उन दोनों की नानी बनकर बहुत गर्व महसूस करती हूं.

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