काश ये दिन देखने के लिए वो जिंदा होते – संजय दत्त

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पुणे की यरवदा जेल से हाल ही में रिहा हुए बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त मीडिया से मुखातिब होते समय थोड़े भावुक नजर आए। संजय दत्त ने बांद्रा स्थित अपने घर पर लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, मैं आतंकवादी नहीं हूं। उच्चतम न्यायालय ने भी मुझे आईपीसी की धारा 120-बी और टाडा के तहत आरोपों से बरी कर दिया था। मुझे अवैध हथियार रखने के तहत सजा दी गई थी जो मैंने पूरी कर ली है।
संजय दत्त ने मीडिया से अपील करते हुए ये भी कहा कि वह जब भी उनके बारे में कुछ लिखे तो 1993 के विस्फोटों का जिक्र न करें। 56 वर्षीय संजय कहते हैं कि वो 23 सालों से इस आजादी का इंतजार कर रहे थे और अब जाकर उन्हें ये आजादी मिली है। वहीं अपने पिता को याद करते हुए नम आंखो से संजू बोले कि काश ये दिन देखने के लिए उनके पिता जिंदा होते तो उन्हें बहुत खुशी होती।


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Mayapuri

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