हैप्पी बर्थडे: मैंने यह बात सपने में भी नहीं सोची थी – रवीना टंडन

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रवीना टंडन

. कु.

प्रसिद्धि पाने और प्रतिमा को स्वीकृति दिलाने की जद्दोजहद में इन्साफ कहाँ होता है? कई बार कोई अभिनेता अभिनेत्रीफ्लूक से अपनी पहली फिल्म में वह अर्जित कर लेता है जो योग्य प्रतिभा सालो साल भी नहीं कर पाते। रवीना टण्डन केकेस में कुछ ऐसा ही अन्याय हुआ है लगता है। उन्होंने अपनी पहली ही फिल्मपत्थर के फूल में इतना बढ़िया काम कर दिखाया कि सलमान खान फीके दिखायी दिये थे। मगर क्या फायदा हुआपत्थर के फूल हिट साबित नहीं हुई और रवीना टण्डन को अपनी अगली फिल्म रिलीज होने तक हिट हीरोइन का खिताब पानें के लिए इन्तजार करना पड़ रहा है। आने वाली फिल्मों में उनके पास कोई काम चलाऊ फिल्म नहीं।पत्थर के फूल के बाद उन्हें अपनी योग्यता का अहसास हो गया था तभी तो उन्होंने आगामी फिल्में लेने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखायी। इसके अलावा क्योंकि वे मशहूर निर्देशक रवि टण्डन की बिटिया हैं तो कुशल नेतृत्व और सलाह मशवरा भी पिता का उनके काम आया है। रवीना अपने कैरियर और अपनी आने वाली फिल्मों के बारे में क्या सोचती हैं? हमने उनके घर जाकर उनके माता पिता के सम्मुख जो बातें की जरा आप भी उनका जायजा तो लीजिए और बताईये कि इस अभिनेत्री की उड़ाने इसे कहाँ तक ले जायेगी।

हमने उनसे पूछाः क्या अपनी पहली फिल्पत्थर के फूल को ज्यादा सफलता मिलने प्रर आपको निराशा हाथ लगी थी? हमारे इस सवाल पर वे मुस्करायी निराशा नहीं। एक आशा की किरण दिखायी दी थी मुझे! क्योंकि मेरे काम को फिल्म सर्कलश् और दर्शकों दोनों की ओर से.सराहा गया था। फिल्म चलने चलने का जिसकी वजह से मुझे कम ही फर्क पड़ने वाला था अगले ही दिन से मुझे अच्छे अच्छे ऑफर आने लगे थे तोनिराश होने की बात ही नहीं थी। मुझे अपने हिसाब से फिल्म च्वाॅइस करने का मौका मिल रहा थावैसे मैं बता दूँपत्थर के फूलफ्लॉप नहीं थी कुल मिलाकर एकअवेरेज कहीं जा सकती थी…” रवीना ने कहा। सुना है तभी से आप काफीरूडली निर्माता निर्देशकों से पेश भी आने लगी थीमैं औररूडली भगवान का नाम लीजिए।

रवीना टंडन

मेरे निर्माता निर्देशकों से जिनके साथ मैं काम कर रही हूँ उनसे जाकर तो पूछिये कि मैं उनके साथ किस तरह से पेश आती हूँ। यह एक गलत अफवाह है जाने कहाँ से कैसे उड़ी मुझे पता नहीं मैंहार्ड वर्कर औरथोरोप्रोफेशनल हूँ जो गुण मैंने अपने पिता से लिये हैं रवीना ने कहा।

अगर मैं वाकई नखरीली, तंग करने वाली अभिनेत्री होतीं तो क्या आज मेरे पास जे. पी. दत्ता और राजकुमार संतोषी की एक नहीं दो दो चार चार फिल्में होती। क्या ये लोग एक फिल्म के बाद मुझे अगली फिल्मों में दोहराते..? आप ही बताईएसुना है ज्यादातर इन निर्देशकों के साथ जो फिल्में आपको प्राप्त हुई हैं वे तो आपके प्रसिद्ध निर्देशक पिताश्री रवि टण्डन का मुख देखकर। आज जितने भी छोटे बड़े निर्देशक हैं वे उस समय जब आपके पिताटॉप में थे कुछ भी नहीं हुआ करते थे ?

ऑफ कोर्स नाॅट! भला यहाँ फिल्मी दुनिया में कोई किसी की मुहब्बत या मुँह देखकर अपनी फिल्मों में मौका देता है? कोई नहीं। यहाँ लाखों की लागत से फिल्म बनती है कौन किसी पर बिनाकनवीन्स हुयेस्टेक लगाता है? मैंने अपने पिता का नाम यदि कहीं इस्तेमाल किया है तो बस उन चन्द गलत लोगों से अपने बचाव के लिए जो नई हीरोइनों को।एक्सप्लाइट करने का मौका देख्ते हैं। वर्ना तो आज मैं जो कुछ भी हूँ अपनी कड़ी मेहनत और व्यवसायिक नजरिये की खातिर हूँ आप चाहे मेरे पिता से ही पूछ लीजिए…” रवीना टण्डन ने कहा और सामने बैठे रवि टण्डन जी ने इस बात की पृष्टि करते हुये कहा थावाकई मैं अपनी बच्ची केगटस और हिम्मत की दांद दिये बगैर नहीं रह सकता। उसने शुरू के दिन से ही मेरी अपनी परछाई से अलग होकर अपने कैरियर के लिए जो भी मुनासिब हो सकता ,था किया। अगर मैं आज उसकेटैलेन्ट की बातें करूँ तो। अपने मुँह बड़ी बात होगी। खासतौर से जबकि हम एक ही प्रोफेशन में हैं…!

फिर हम रवीना पर गए थे। आप फिल्मों में आयी। सुना जाता है आपके फिल्मों में आने का फैसला बड़ा अचानक था। जिसके लिए कम से कम आपके पिता एकदम तैयार नहीं थे। इस विषय में कुछ कहेंगी आप ?

क्यों नही! सही बात है मैंने शुरू से ही फिल्मों में आने की कभी अपनी कोई इच्छा जाहिर नहीं की थी। यह तो वाकई एकदम अचानक हो गया था। दरअसल मैं एकएड एजेन्सी के लिए कैमरे के पीछे एक सहायक का काम करती थीं एक रोज बैठे बैठे ख्याल आया कि कैमरे के आगे भला क्यों आया जाये। लेकिन मैं थी मोटी ताजी। पहले अपने शरीर को संभालना बड़ा जरूरी था। मैंने इस ओर ध्यान दिया और पिता जी से अपनी इच्छा व्यक्त की तो वे मुझे नीचे से ऊपर तक देखते ही रह गये थे…” रवीना ने कहा। क्यों इसमें अचरज की क्या बात उन्हें लगी होंगी। आज तो हर फिल्मी हस्ती की संतान अभिनय के माध्यम में उतर रही है मैं उनमें से नहीं थी, मैंने कभी हीरोइन बनने की बात सपने में भी नहीं सोची थीअपने डील डौल के कारण शायदरवीना ने कहा।लेकिन आज तो आप नई हीरोइनों में काफी आकर्षक, सुन्दर हीरोइन मानी जाती है?

वह भी एक अचरज की ही बात है मेरे लिए। अगर मैं हॉलीवुड में होती तो ऐसा कभी नहीं होता। वह तो हमारे हिन्दी फिल्मों के दर्शक है जो जरा भरे भरे चेहरे और बदन को पसंद करने के आदि हो गये है। हमारी पुरानी हीरोइनों को जब मैं पर्दे पर देखती हूँ तो बड़ा संतोष होता है मन को। उन दिनों कोईडाइटिंग वाइटिंग में विश्वास नहीं करती थी। शायद खूब अपने ऊपर लागू किया हुआ है खाओ.

रवीना टंडन

जमकर खाती पीती थी तभी तो चेहरे पर पिओ और ऐश करो  ?

और वही पुरानाफार्मुला आपने भी अपने ऊपर लागू किया हुआ है। खाओ पिओ और ऐश करो?

तो मुझे बड़े संयम से रहना पड़ता है। पर कभी कभी लगता है कोई फायदा मुझे इसडाइटिंग वाईटिंग से नहीं होने वाला। मैं कितनी भीडाइटिंग क्यों कर लूँ बस ऐसी ही रहूँगी। इसकी एक वजह मेरी मस्त हँसते खेलते जिन्दगी को बड़े आराम से लेने की आदत भी हो सकती है…” रवीना ने कहा।

कुछ भी हो आपको तो इसी साल फिल्म फेयर की ओर से बेहतरीन नई हीरोइन का अवार्ड भी मिला था  ?

थैंक गॉड! ‘पत्थर के फूल में कड़ी मेहनत का यह एक मात्रअवार्ड मुझे मिला था वर्ना फिल्म को कहाँ इतना पसंद किया थाऑडियंन्स ने शायद इसी वजह से मुझे यश चोपड़ा जी कीपरम्परा महेश भट्ट कीकलयुग जे.पी.दत्ता की क्षत्रिय औरचूड़ियाँ भी मिली। राज कुमार संतोषी की तो चारो फिल्मों में मैं हूँ…” रवीना टण्डन ने कहा।

यानि कि मीनाक्षी शेषाद्री के लिए एक चुनौती। राज कुमार संतोषी की हरेक फिल्म में होना। हमने रवीना से मजाके किया था और पूछा कि राज कुमार संतोषी ने आपके अन्दर ऐसा क्या पाया कि वे आपसे प्रभावित हो गये?

आई डोन्ट नो  ! शायद पलक झपकते ही आँसू बहा लेने की मेरी कला से वे प्रभावित हुये हो। वैसे मैं किसी भी मूड कोपलक झपकते ही बदल लेती हूँरवीना ने कहा।

पिछले दिनों आपके अपने कॉलेज के दिनों के साथी अजय देवगण से भी आपकी मिलनसारी के काफी चर्चे थे?

क्यों। नहीं मेरी अगली फिल्मदिव्यशक्ति उनके साथ रिलीज पर है न। हमने लगातार इस फिल्म के लिए शूटिंग की थी काफी साथ साथ रहना, उठना, बैठना हुआ धा… ‘रवीनाने बिना किसी लग लगाव के कहा था।

आप कैसी भूमिकाएँ करना ज्यादा पसंद करती हैं या करेंगी?

जरा सीक्लासी टाइप भूमिका फिर चाहे वह भले ही कम कॉमर्शियल क्यों होरवीना ने कहा।


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Mayapuri

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