मैं तो रोना ही भूल गया था लेकिन ‘बजंरगी भाईजान’ देख मैंने सिर्फ रोया बल्कि मेरा गला भी भर आया – अली पीटर जॉन

1 min


मैं कोई पेशे से आलोचक नहीं हूं। जब मैंने अपने करियर की शुरुआत की तब मुझे इस पद का प्रस्ताव मिला पर कुछ तो ऐसा था जो मुझे आलोचक बनने से रोक रहा था। मैंने सिर्फ एक फिल्म की समीक्षा की थी और वो थी बलदेव खोसा की फिल्म। बलदेव खोसा एफ.टी.आई.के एक्टर रहे। इसके साथ ही वह कांग्रेस पार्टी के नेता भी रहे जो अपना आखिरी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हार गए थे। विशेषज्ञ के तौर पर मैंने इस फिल्म को लेकर किसी भी प्रकार की कोई भी जजमेंट नहीं दी क्योंकि मुझे पता था कि मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूं। मैं बस यही कह सकता हूं की मुझे हिन्दी फिल्मों से बहुत प्यार है साथ ही उन लोगों से जो फिल्मों में काम करते हैं। क्योंकि मैं इन लोगों के ईद गिर्द रहा हूं काफी लंबे समय से, और साथ रहना चाहता हूं। इस इंडस्ट्री को जानने के लिए कि क्या वक्त बदलेगा, क्या फिल्में बदलेंगी और क्या वो लोग बदलेंगे जो फिल्में बना रहे है। मुझे याद नहीं कि मैनें कब आखिरी बार किसी फिल्म पर उस तरीके से प्रतिक्रिया दी थी जैसे मैं अपनी जवानी के दिनों में दिया करता था। जब मैं एक हफ्ते में तीन फिल्में देखने का आदि था अब तो मुझे ये भी याद नहीं कि मैंने आखिरी फिल्म कौन सी देखी थी। जब मैं ये देखता हूं कि मैंने अपनी जिन्दगी में इतनी फिल्में देखी है और उससे भी ज्यादा तब जब मैं इस व्यवसाय का हिस्सा बन गया था। जहां इस फिल्में देखना और रोजाना बड़े सितारों से बात करना मेरा रोजाना का काम था।

खैर, जो भी है मैं और आगे नहीं बताना चाहता कि मेरा जुड़ाव किस तरह का है फिल्मों के साथ। मैंने इन सब का जिक्र अपनी किताब ‘विटनेसिंग वंडर्स’ में बहुत ही अच्छे व विस्तारपूर्वक ढंग से किया है। इस समय की सबसे बड़ी बॉक्स-ऑफिस की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ को देखने के बाद मैं यह सब लिख रहा हूं। मैंने सलमान खान को बतौर एक्टर कई फिल्मों में देखा। मुझे यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि सलमान खान उन अभिनेताओं मे से एक रहे जिनका मेरे दिल और दिमाग पर कोई असर नहीं हुआ पर उसी सलमान खान को फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ में मुख्य किरदार में देखने के बाद मेरी राय उनके प्रति बिल्कुल ही बदल गई। मैं अब भी दुविधा में हूं। मुझे नहीं पता कि इसका पूरा श्रेय सलमान खान को दूं जिन्होंने इस फिल्म में पवन कुमार उर्फ बजरंगी भाईजान का किरदार निभाया या निर्देशक कबीर खान को इसका श्रेय दूं जिन्होंने इस फिल्म के साथ-साथ अपनी बहुत सी फिल्मों में उत्कृष्ट कार्य किया पर जो उत्कृष्ट कार्य उन्होंने इस फिल्म में किया उससे मैं बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुआ। रिलीज के कई दिन बाद जब मैं ये फिल्म तीसरी बार देखने गया तो सारे शोज हाउसफुल थे।

kabir-khan-reveals-salman-khan-s-experience-in-kashmir-for-bajrangi-bhaijaan-312

यह एक पाकिस्तान की सुंदर सी लड़की की साधारण सी कहानी है (शानदार ढंग से इस किरदार को छः वर्षीय हर्षाली मल्होत्रा ने निभाया) जो भारत में खो जाती है, दुर्भाग्य से यह लड़की गूंगी होती है तभी वह एक प्यारे व सरल आदमी से मिलती है जिसका नाम पवन होता है इसके साथ ही यह बजरंगबली का बहुत बड़ा भक्त होता है। पवन दिल से इस बात को मानता है कि एक शक्ति है जो न केवल उसकी समस्याओं को सुलझाती है बल्कि पूरी दुनिाया की समस्या को भी दूर करती है। पवन को पता चलता है कि ये लड़की बिन बुलायी मुसीबत में फंसी हुई है लेकिन लड़की की मासूमियत पवन की खुद की मासूमियत से कहीं ज्यादा प्रभावशाली है। धीरे-धीरे वह उसे पसंद करने लगता है व उसे यह भी एहसास होने लगता है कि वह लड़की पाकिस्तान की रहने वाली है जहां उसकी मां उसका बेसब्री से इंतजार कर रही होती है। पवन उस लड़की (मुन्नी) की पूरी तरह से अपनी जिम्मेदारी मान लेता है व छोटी सी प्यारी मुन्नी अपने घर लौट जाती है। स्वाभाविक रूप से पवन को नर्क का सामना करना पड़ता है जब वह मुन्नी के साथ बॉर्डर पार करता हैं। कैसे न कैसे बड़े ही पेचीदा तरीके से उसकी मुलाकात संयोगवश टीवी पत्रकार चांद नवाब से होती है जिसे पवन की परेशानी से कोई खास लेना-देना नहीं होता, बाकी मीडिया कर्मियों की तरह वह भी पवन की कहानी जानने के लिए बेहद इच्छुक होता है पर चांद नवाब उसकी कहानी जानने के बाद बदल जाता है व उनकी मदद भी करता है। पवन मुन्नी को उसकी मां तक पहुंचाता है यहा तक की उसे सुरक्षागार्ड द्वारा बहुत ही बुरी तरह पीटा जाता है और आखिरी सीन में जब वह पाकिस्तान छोड़ कर जाता है तो वह बेहद भावुक होता है। जो फिल्म में साधारण दृश्य होता है पर इस दृश्य को देख कर हर किसी का दिल अंदर से पसीज जाता है।

salmankhan-526a

इसके साथ ही मैंने सभी दृश्यों को देखा व फिल्म की सभी डॉयलॉग भी सुने जो पवन, चांद, रसिका (करीना कपूर) द्वारा बोले गए। मैंने फिल्म के गाने भी सुने व कव्वाली भी सुनी जो फिल्म के क्लाइमेक्स के दौरान दिखाई गई है। मैं अपनी आँखों से बहते आँसू देख हैरान रह गया। मैंने आसूंओं को रोकने की पूरी कोशिश की, यह फिक्शन पर आधारित एक फिल्म है इस बात से भी मैंने खुद को समझाने की कोशिश की। मेरे आसुंओ ने रूकने से मना कर दिया जिस वजह से मेरा गला भर आया। इसके साथ ही मैंने यह भी देखा कि मेरे साथ-साथ मल्टीप्लैक्स में बैठे सभी लोग रो रहे थे। फिल्म खत्म हो गई थी और मैं अभी भी रो रहा था। मेरे साथ जितने भी लोग आसपास बैठे थे वो सब रोए जा रहे थे। मुझे 35 साल पहले यह अनुभव होना चाहिए था जब मैंने ऋषिकेश मुखर्जी,  गुलजार,  बासु चटर्जी, बासु भट्टाचार्य व किसी भी अन्य निर्देशक की फिल्में देखी थी पर मुझे ऐसा कोई भी अनुभव नहीं हुआ क्योंकि इन सभी डायरेक्टर्स ने इस तरह की कोई भी फिल्म नहीं बनाई थी। कबीर खान की फिल्म से वो जादू वापस चल पड़ा। यह फिल्म केवल मनोरंजक फिल्म नहीं है बल्कि एक ऐसी फिल्म है जिसका अनुभव जीवन के आखिरी पड़ाव तक याद रहेगा।

salman-nawaz_640x480_71436956462

मुझे लगता है सलमान खान एक ऐसे अभिनेता रहे हैं जिनकी किस्मत ने उनका कभी साथ नहीं दिया और वह कभी बतौर अभिनेता उतने अच्छे साबित नहीं हो पाए जितने की बजरंगी भाईजान में नजर आए। साथ ही मैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी को सलाम करता हूं जो अपने किरदार को बखूबी निभाते हैं। करीना कपूर का किरदार उतना प्रभावशाली नहीं रहा जितना बजरंगबली भक्त पवन कुमार चतुर्वेदी की प्रेमिका के रूप में होना चाहिए था। अगर आप मुझसे पूछें तो मैं पहले ही बता चुका हूं कि मैं कोई आलोचक विशेषज्ञ नहीं हूँ, मुझे लगता है यह फिल्म निश्चित रूप से ‘मुन्नी’ के अद्भुत और सरल प्रदर्शन के बिना बिल्कुल भी सफल नहीं हो पाती।

Scene-from-Bajrangi-Bhaijaan-1

मैं अभी भी ये सोच कर आश्चर्यचकित हूं कि वो क्या था जिसने मुझे न सिर्फ रोने पर मजबूर किया बल्कि मेरा गला भी भर आया। मैं सोच सकता हूं कि वो पूरी तरह से फिल्म ही होगी जिसने मुझे इस तरह का अनुभव दिया और इसका श्रेय में फिल्म के डायरेक्टर कबीर खान को देना चाहूंगा जिन्होंने ऐसी फिल्म बनाई जिसमें कई सारे अहम मुद्दों पर बात की गई है। उस शाम मुझे रोना अच्छा लगा। जिस तरह से मैं बजरंगी भाईजान देख कर रोया लेकिन कहां है सलमान जैसा एक्टर जिसने वास्तव में खुद को एक्टर के रूप में बदला है और दोनों देशों को प्रेम का संदेश दिया है जहां इसकी सबसे जरूरत थी कहां है ‘मुन्नी’ जैसी लड़की जिसनें शैतान व दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी तक को अपने दिल की तरफ खींचा। ऐसे आतंकवादी जो देश पर शासन करने की धमकी देते हैं और धर्म के नाम पर अहिंसा से मनुष्य को मक्खियों और मच्छरों की तरह मार देते हैं?

SHARE

Mayapuri