मैंने हमेशा स्माल बजट फिल्मों में काम किया है -सीमा पाहवा

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Seema Pahwa

सीमा पाहवा, हम लोग टेलीविजन सीरियल से अपना एक हाउसहोल्ड नाम तो बना ही चुकी थी। किंतु फिल्मी सफर उनका, ‘बरेली की बर्फी’ से वापस शुरू हुआ।

बस अब जब दोबारा बड़े पर्दे पर दर्शकों को अपने किरदारों से इस कदर खुश किया कि अब उनके बिना मानो कोई भी फिल्म अधूरी सी लगती है।

लिपिका वर्मा

बतौर निर्देशिका डेब्यू फिल्म, ‘राम प्रसाद की तेरहवीं’ से अपना एक नया सफर शुरू कर रही है

Seema Pahwa

आज जिंदगी में उम्र के इस पड़ाव पर वह बतौर निर्देशिका डेब्यू फिल्म, ‘राम प्रसाद की तेरहवीं’ से अपना एक नया सफर शुरू कर रही है।

बहुत ही सरल सीधे विचार की सीमा ने अपने हिसाब से इस फैमिली ड्रामा को रिश्तों की अहमियत को दर्शाते हुये तेहरवी की लिए जुटे रिश्तेदारों की मनोस्थिति दर्शाती है।

ऐसे समय अक्सर साधारण परिवारों में क्या कुछ होता है यही कुछ सीमा ने लोगों को कॉमिक एंगल से भी दिखाया है।

आपकी पहली फिल्म में बहुत ही सशक्त अभिनेता है सो फिल्म को पर्दे पर आप ने और सभी अभिनेताओं ने अच्छी तरह टयूनिंग रही होगी। क्या कहना चाहेंगी आप?

का और साथ-साथ एक औरत का अनुभव भी जुड़ता है। पूरी जिंदगी जी है बच्चों को पाला है और अपने सारे रिश्तों को हमेशा से सभांलती आई हूँ।

सो उस सभी को देखते हुये देखा जाये तो एक अनुभव जो औरत का और अभिनेत्री का होता है वही सब मिलाकर यह सारी तैयारी की है। मेरी यह कोशिश रही है, उन सारे रिश्तों को आपके सामने पेश करू।

राम प्रसाद की तेरहवी जो टाइटल है, उससे लग रहा है कॉमेडी होगी फिल्म में?

जी कॉमेडी तो हम सभी की जिंदगी से हमेशा से जुड़ी रहती है। यह सभी मजेदार लोग है पर हम उस नजर से देख नहीं पाते है।

देखा जाये तो हमारे सारे रिश्तेदार हास्यप्रद होते है और सभी को हँसाते ही है। कुछ खास रिश्ते भी। मुझे ऐसे लगा इन सारे रिश्तों को जोड़ कर मैंने जो बनाया है वैसे वह कॉमेडी नहीं कहूँगी।

पर हाँ यदि आपके अंदर कुछ गुदगुदी पैदा हो गयी तो और आप हंस पड़े तो यह अच्छी बात है।

मैंने कॉमेडी फिल्म बनाने के मकसद से यह फिल्म नहीं बनाई है पर हाँ बहुत प्यार से सभी रिश्तों को जोड़ कर यह फिल्म बनाई है।

टाइटल कैसे आप के जेहन में आया। कहानी कैसे शुरू हुई?

देखा जाये तो यह ऐसी वास्तिवकता है जो हर एक के घर में दस्तक देती है। कोई न कोई रिश्तेदार हमें छोड़ कर चला ही जाता है।

तेरहवी इतनी कॉमन चीज है और इतनी सच्चाई है कि हम कैसे वो 13 दिन अपने रिश्तेदारों के साथ बिताते है।

कभी एक रिचुअल रह जाता है और इन 13 दिनों हम क्यों अपने रिश्तेदारों के साथ रहना कहते है उनके दुख को क्यों बाँटना चाहते है।

ऐसा कुछ नहीं कि ऐसा अलग एक्सपेरिमेंट है सभी इस कहानी से रिलेट कर पाएंगे।

ऐसी फिल्में पहले भी आई है क्या?

जी बहुत फिल्में आयी होंगी अभी किसी से बात कर रही थी तो उनकी खजूर पर अटके फिल्म भी इसी मुद्दे पर ही थी, आपने भी उस में काम किया था।

यह कहानी वैसे ही है जैसे एक फिल्म में हम शादी दिखा रहे है , दूसरी में भी और तीसरी में भी शादी दिखा रहे है। उस आदमी की यात्रा तक हम कैसे पहुँच पा रहे है।

आप तक क्या मैसेज दे रहे है, वो मकसद तो हमारा अलग है न? इस लिए मुझे लगता है जैसे आप कहेगे मैंने माँ के रोल ढेरों किये है।

फिल्म, ‘दम लगा के हाइशा में’,बरेली की बर्फी और शुभ मंगल सावधान में भी वही थी। वो अपनी लड़की की शादी के लिए परेशान रहती है।

मगर मैंने कुछ अलग करने की कोशिश की है तो वैसे ही यदि सब्जेक्ट इन फिल्मों का एक सा है।

लेकिन हमने उसे कैसे अलग कुछ करने की कोशिश की है यह देखना होगा। कैसे प्रजेन्ट किया है सबजेक्ट को यह देखने वाली बात है।

Seema Pahwa

इन दिग्गज कलाकारों को कैसे हैंडल किया आपने? खासकर नसीर साहब को?

नसीर साहब तो, मतलब मुझे लगता सबसे आसान था उनके साथ काम करना, क्योंकि मैंने उनके साथ थिएटर उनके ग्रुप किया है।

और वो मेरे थिएटर ग्रुप में भी में काम करते रहे थे। नसीर सर ने मेरे निर्देशित नाटक में काम किया है।

वो मेरे गुरु है। वो कभी भी इंटरफेयर नहीं करते है सेट पर पूर्णतः चढ़ा देते है मुझे। वो कभी आदेश नहीं देते की तुम ऐसा या वैसा कर लो।

बड़े आदर के साथ मेरे निर्देशन को फॉलो करते है। मुझे लगता है सबके साथ काम करके मै बहुत कम्फर्टेबले थी।

उन्होने तो मेरे साथ काम फ्री में बिना किसी उलझनों के काम किया है। उनको जेन्युइन काम से,अच्छे काम से प्यार रहता है। और अपना आशीर्वाद सबको देते है।

फोटो पर माला टिका दी तो उन्हें ऐतराज नहीं हुआ?

बिल्कुल भी ऐतराज नहीं हुआ उन्हें। जब उन्होंने कहानी पढ़ी और सुनी तो उन्हें बेहद पसंद आयी। मैंने पूछा भी नहीं -सर मैं आपकी फोटो पर माला चढाने वाली हूँ।

वो इतने महान कलाकार है और जानते है कि हम क्यों ऐसा कर रहे है? उल्टा बड़े प्यार से तारीफ भी कर डाली। जितना भी काम मैंने उनसे लिया है बहुत ही खूबसूरत काम है उनका इस फिल्म में।

कितने सीन्स है नसीर साहब के?

जब आप जानते है तेहरवी जब उनकी है तो कितना काम और कितने सीन्स होंगे उनके? जब जब वो स्क्रीन पर आएँगे तब तब आप लोगों को बहुत अच्छा लगेगा।

वैसे तो मैं नहीं बताऊंगी की मैं फ्लैश बैक में जाउंगी या नहीं। नसीर साहब के साथ काम करने का बहुत ही अद्भुत अनुभव रहा मेरा।

जब वह पहले दिन आये थे तो पूरी कास्ट प्रेजेंट थी। जब उन्होंने एंट्री ली है तो सभी खुश हो गए। उनसे तो हम सभी कुछ न कुछ सींखतेे ही रहेंगे।

भगवान उनकी उम्र लम्बी करे और वो हमें और बहुत कुछ सिखाये। इस फिल्म में आप को अलग अलग फ्लेवर दिखेगा।

थिएटर में अपनी डेब्यू फिल्म ले कर आ रही है यह तो बहुत बड़ा चैलेंज है?

यह तो बहुत बड़ा चैलेंज है। लोग कितने आ पाएंगे सिनेमा हॉल्स में यह देखना होगा।

फिर भी मुझे उम्मीद है लोग इतनी वायलेंट, सेक्स ओरिएंटेड और गाली गलौज वाली फिल्में देख चुके है तो मुझे उम्मीद है घरेलू फिल्म तो देखना पसंद करेंगे लोग इतने समय बाद।

उम्मीद करती हूँ , अपनी ऑडियंस अपना प्यार मुझे देंगे। अपनी सिक्योरिटी और सेफ्टी रखते हुए फिल्म देखने जरूर आये। इस तरह के सिनेमा को जनता सफल बनाना चाहे तो जरूर बना सकती है।

Seema Pahwa

इसके बाद और क्या बतौर निर्देशिका करना चाहेगी आप?

बिल्कुल अब निर्देशन करने का खून लग चुका है। मेरी सभी फिल्में घरेलू होंगी। रिश्तों से बड़ी नियामत तो नहीं मिली है हमें।

गुदगुर्दी सी और अच्छी सी खनीय लॉक डाउन के समय मैंने लिख दी है और वो सभी कहानियाँ बड़ी अपने रिश्तो से जुडी कहानियाँ है। इंतजार है निर्माताओं का की वो आएं और मैं फिर से कुछ बनाना शुरू करूँ।

क्या अब आप का भी एक कैंप बन गया है? आगे भी इन्हीं के साथ काम कीजियेगा या बड़े स्टार्स के साथ फिल्म करेंगी जो बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को अपने कंधे पर आगे ले जाते है?

मेरे तो बहुत सारे दोस्त है। जिन्हें काम नहीं दिया वो नाराज हो गए है। मैंने नेक्स्ट फिल्म के लिए प्रॉमिस किया है।

देखिये मेरा बड़े स्टार्स के साथ कोई कनेक्शन नहीं रहा है। बड़े नाम ले जैसे पुराने कलाकार है उनके साथ में कभी काम नहीं किया है।

मैंने हमेशा स्माल बजट फिल्मों में काम किया है। मै आयुष्मान खुराना, को भूमि पेडनेकर, राजकुमार राव, को अपनेे साथ काम करने हेतु कह सकती हूँ।

इनके साथ में जुडी हुई हूँ और इनके साथ काम भी किया है। पर वो बड़े कलाकार कमर्शियल फिल्मों के कलाकर है उनके साथ न मैंने काम किया है और न ही मैं उनके बारे में कुछ जानती हूँ।

आप अक्षय कुमार, सलमान खान इत्यादि को एप्रोच तो कर सकती है?

अप्रोच तो कर सकती हूँ। पर जरुरी नहीं है वो, मेरी साधारण सी कहानियो में काम करना पसंद करें। उनको अपनी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर हिट करने के लिए काफी कुछ चाहिए होता है।

मेरी फिल्मों में बॉक्स ऑफिस मसाला तो कुछ नहीं है। सिंपल सी घरेलू सी कहानियाँ है। तो मुझे नहीं लगता मैं एप्रोच भी करना चाहूंगी तो वो मेरे साथ काम भी करना चाहेंगे।

आजकल ऐसी कहनियाँ चल रही है?

देखते है इस फिल्म के बाद यदि किसी को मेरे साथ काम करने का रूझान होगा और इंटरेस्ट दिखायेगा तो जरूर करूंगी।

मैं अपने आप कभी दीवार तोड़ नहीं पाऊँगी। क्योंकि मैं भी कोजी माहौल, में काम करना चाहती हूँ। जहाँ मैं अपनी मर्जी से अपनी फिल्म को अपना रूप दे सकूँ।

ना कि मैं यह कहुँ कि मैं उस बड़े एक्टर को फेवर करने जा रही हूँ। तो मेरी कहानी भी उसको फेवर करे।मुझे नहीं लगता में ऐसे काम करना चाहूंगी।

आप यह मानती है, कहानी को बड़े एक्टर के हिसाब से मोल्ड करना पड़ता है?

मेरा ऐसा अनुभव तो नहीं है। ऐसी कहानिया सुनी जरूर है कि जब बड़े एक्टर काम करते है तो अपनी कहानियों को अपनी तरह से मोड़ लेते है।

मेरा वैसे कोई व्यक्तिगत अनुभव तो नहीं है। पर यह सच है या झूठ है यह मै नहीं जानती। पर डेफिनिटेली मैंने ऐसी अफवाहें सुनी है-जब बड़े एक्टर के साथ काम करो तो वो कहानी अपने हिसाब से बना लेते है।

उन्ही अफवाहों से डरी हुई हूँ मैं। हो सकता है कोई एक्टर ऐसा आये जो इन अफवाहों को ब्रेक कर दे। और मुझे लगे कि- यह अफवा थी।

यह लोग तो बड़े अच्छे है और अच्छी तरह से काम करते है। मै कह नहीं सकती।


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Mayapuri

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