INTERVIEW: ‘‘मुझे अच्छा लगता है जब कोई फिल्म मुझे चुनौती देती है‘‘ – विद्या बालन

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अपने बोल्ड और शक्तिशाली अभिनय से रूढ़िवादी तरीके तोड़ के विद्या बालन ने मुख्यधारा बॉलीवुड अभिनेत्रीयों के लिए नया रस्ता बनाया है। स्क्रीन पर उनके गहन चरित्र दर्शकों को बेहद प्रसन्न करते है। ‘कहानी 2 : दुर्गा रानी सिंह’ के रविवार 14 मई को दोपहर 12 बजे ज़ी सिनेमा पर होने वाले चैनल प्रीमियर से पहले विद्या बालन ने फिल्म के निर्देशक सुजोय घोष और थ्रिलर फिल्मों के लिए उनके आकर्षण के बारे में बात की।

‘कहानी‘ और ‘कहानी 2‘, दोनों ही फिल्मों का निर्देशन सुजॉय घोष ने किया है। वे इस फिल्म को महिला प्रधान विषय बताते हैं। जब आप ‘कहानी 2‘ में एक और चुनौती भरा रोल स्वीकार कर रही थीं, तब आपके मन में क्या चल रहा था?

मुझे याद ही नहीं मैंने ‘कहानी‘ या ‘कहानी 2‘ के लिए क्यों हां की थी, लेकिन मुझे लगता है कि इन फिल्मों में औरतों के किरदार रहस्यमयी हैं जो दिलचस्पी जगाते हैं। मुझे वह बात उत्साहित करती है जब आप यह नहीं जानते कि फलां व्यक्ति वाकई क्या कर सकता है। सुजॉय ने जब कहा कि ये फिल्में महिलाओं के मजबूत किरदार हैं, तो वे सही थे। मेरे ख्याल से जो औरत यह मानती है कि उसके लिए सबकुछ संभव है, वह मुझे उत्साहित और प्रेरित करती है। वह हर मुश्किल का सामना करने या हर चुनौती स्वीकार करने को तैयार है और यही बात विद्या बागची और विद्या सिन्हा या दुर्गा रानी सिंह में एक जैसी है।

ज़ी सिनेमा मदर्स डे पर ‘कहानी 2‘ का प्रीमियर कर रहा है। इस मौके पर आप दर्शकों को क्या संदेश देना चाहती हैं?

‘‘यह बहुत बढ़िया है कि इस फिल्म को मदर्स डे पर दिखाया जा रहा है, क्योंकि ‘कहानी 2’ एक ऐसी मां के बारे में है जिसने उस बच्ची को जन्म तो नहीं दिया लेकिन वह उसे लेकर बेहद रक्षात्मक रहती है। एक मां स्वाभाविक रूप से अर्पण करने वाली होती है और वह अपने बच्चे को बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है, इसलिए यह फिल्म हर उस मां को सलाम करती है जो अपने बच्चे की खातिर अपनी जिंदगी दांव पर लगा देती है। मुझे लगता है कि एक मां के छोटे-छोटे कामों में वह भावना अलग-अलग रूप में नजर आती है।’’

पिछली फिल्म की तरह ‘कहानी 2‘ भी एक थ्रिलर मिस्ट्री है। इस जॉनर में आपको कौन-सी बात आकर्षित करती है?

थ्रिलर जॉनर में मुझे फिल्म की रफ्तार बहुत पसंद आती है। आप जानते हैं मैं बहुत अधीर हूं और मुझे अच्छा लगता है जब कोई फिल्म मुझे चुनौती देती है। शायद इसीलिए मैं ‘कहानी‘ और ‘कहानी 2‘ की स्क्रिप्ट के प्रति आकर्षित हुई।

जब पहली फिल्म हिट होती है तो इसका सीक्वल, कास्टिंग और दायरे के लिहाज से बड़ी होती है। क्या आपको लगता है इससे कहानी आगे बढ़ाने में मदद मिलती है?

मुझे लगता है पहली फिल्म के अच्छे नतीजे के बाद ही आप इसका सीक्वल या फ्रेंचाइजी बड़े स्तर पर बनाते हैं। मुझे नहीं लगता कि यह जरूरी है लेकिन हां मैं यह जरूर सोचती हूं कि इससे आप वो लक्जरी ले सकते हैं और क्यों न लें!

‘कहानी 2‘ और ‘बेगम जान‘ में एक के बाद गंभीर भूमिकाएं निभाने के बाद क्या आप अब एक हल्की-फुल्की फिल्म करना चाहती हैं?

हां, मैं एक फिल्म कर रही हूं जिसका नाम है ‘तुम्हारी सुलू‘। यह फिल्म जिंदगी की झलक दिखाने वाली हल्की-फुल्की फिल्म है। यह फिल्म एक हाउसवाइफ के बारे में हैं जो अचानक देर रात में काम करने वाली रेडियो जॉकी बन जाती है। इससे बहुत-सी मजेदार घटनाएं होती हैं।

कैमरे से अलग विद्या बालन की भी अपनी एक प्रेरणादायक कहानी है। क्या हम उसे देख पाएंगे?

मुझे लगता है कि मेरी ओर से ऐसे किसी संस्मरण के लिए यह बहुत जल्दी होगी। मुझे अभी जिंदगी में और भी अनुभव लेना है, क्योंकि इसके लिए बहुत से अनुशासन की जरूरत होती है और मुझे नहीं लगता कि मुझमें यह है। मैं सिर्फ सेट पर अनुशासित रहती हूं।

जब आप छोटी थीं तो आपकी मां से जुड़ी सबसे अच्छी याद कौन सी है?

ओ माय गॉड! आप अपनी मां से जुड़ी बचपन की एक याद कैसे चुन सकते हैं! हालांकि लेकिन मुझे याद जब तपती धूप में मेरी मां और मैं स्कूल से लौटते थे। हम एक खुले मैदान से गुजरते थे जहां एक पागल औरत रहा करती थी। हर दोपहर वहां से गुजरते हुए मुझे यह डर सताता था कि वह मुझे देख लेगी और मेरे पीछे दौड़ पड़ेगी। और मैं अपनी मां का हाथ थामकर खुद को हमेशा सुरक्षित महसूस करती थी।


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Mayapuri

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