अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में फिर मिलेंगे अगले साल

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ग्यारह दिन कैसे बीत गया, कुछ पता ही नहीं चला. गोवा की धरती पर कदम रखते ही सर्वत्र इफ्फी-२०१४ की झलक मिलने लगी थी. गोवा एक प्रदेश है और पंजिम शहर. पंजिम से पंद्रह – बीस किलोमीटर की दूरी से ही महोत्सव की सजावट दिख रही थी. गोवा एक पर्यटन स्थल भी है किन्तु फिल्म महोत्सव का अपना एक अलग ही साइन है. इफ्फी का सिम्बल मयूर से बना है और हर जगह साज-सज्जा में युगल मयूर या मयूर के पंख चित्र प्रमुखता से इतेमाल किया गया है. गोवा में आगमन के साथ इफ्फी के मयूर वाले सिम्बल से परिचय होना शुरू होता है. हरेक रास्ते पर दोनों ओर तथा कुछ प्रमुख चौराहो पर महोत्सव में आने वालों के स्वागत में सजावट पोस्टर्स, बैनर्स, स्टंडीेज और कट-आउट के माध्यम से की गयी है. पहली बार भी महोत्सव में आनेवाले बिना किसी परेशानी के एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ़ गोवा के कंपाउंड (इ. एस. जी. बिडिंग) तक आसानी से पहुंचे हैं. जहाँ पर डेलीगेट्स और मीडिया का पंजीकरण हुआ. पास में ही ईनॉक्स सिनेमा हॉल भी है, जिसके चार स्क्रीनों में महोत्सव की फिल्मे दिखाई गयीं. इ. एस. जी. बिडिंग के दो प्रेक्षा-गृह में भी फिल्मो का प्रदर्शन हुआ. कला अकादमी के प्रेक्षा-गृह में भी फिल्मों की स्क्रीनिंग की गयी और ओपन एयर थिएटर फुटबॉल कंपाउंड कम्बल में भी रात के समय स्क्रीनिंग की जाती रही.इस महोत्सव में ७९ देशी की कुल १७८ फिल्मे दिखाई गयीं. कुछ फिल्मो की स्पेशल स्क्रीनिंग भी की गयी.
फिल्म महोत्सव के निर्देशक शंकर मोहन के मुताबिक इस बार महोत्सव में लगभग तीन सौ फिल्मो की स्क्रीनिंग हई और अस्सी देशों की फिल्मे शामिल हैं. इस महोत्सव में एक और विशेष बात यह रही की इस बार तरह हजार लोगो का पंजीकरण किया गया. फिल्म का उद्घाटन और समापन समारोह डॉ. श्यामा प्रसाद ऑडिटोरियम में हुआ. हर जगह विशेष सजावट देखने को मिली. मीडिया और डेलीगेट्स के लिए महोत्सव के आयोजकों में ऑटो, बस और कार की सुविधा भी दी. कोई भी इ.एस.जी. इनॉक्स से कला अकादमी, एनऍफ़डीसी के फिल्म बाजार तक आसानी से आवा-गमन कर सकता था और सबने इसका भरपूर लाभ उठाया. महोत्सव के उद्घाटन और समापन के अवसर पर वहां तक भी आने – जाने की सुविधा मुहैया करायी गयी.बस, ऑटो और कार में इफ्फी-२०१४ के सिम्बल वाला पोस्टर लगा होता था और अपने परिचय-पत्र के पहचान के साथ डेलीगेट्स वाहन का लाभ लेते थे.
३० नवंबर की शाम डॉ. श्यामा प्रसाद स्पोर्ट ऑडिटोरियम में इफ्फी-२०१४ का समपन्न समारोह आयोजित किया गया. हज़ारो जन समूह के मध्य पुरस्कारों की घोषणा अंतर्राष्ट्रीय जूरी के प्रधान स्लावोमिर एड्ज़ियक ने पुरस्कार के चयनित नामों की घोषणा की. रूसी फिल्म ‘लेविथान’ को ४५ वे अंतर्राष्ट्री फिल्म महोत्सव में बेस्ट फिल्म (सर्वश्रेष्ठ फिल्म) का स्वर्ण मयूर (गोल्डन पीकॉक) प्रदान किया गया. जबकि भारतीय मराठी फिल्म ‘एक हज़ारची नोट’ को विशेष जूरी अवार्ड दिया गया. दो महिला कलाकारों को बेस्ट एक्टर अवार्ड दिया गया. सर्वश्रेष्ठ महिला कलाकार अलीना रोड्रिगेज (फिल्म-बेहविओउर) और सरित लैरी (फिल्म-द किंडरगार्डन टीचर) को यह पुरस्कार मिला है। बेस्ट एक्टर (मेल) अवार्ड भी दो कलाकारों में शेयर हुआ. सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष) का पुरुस्कार एलेक्सी सेरेब्रयाकोव (फिल्म-लेविथान) और दुलाल सरकार (बंगाली फिल्म- छोटोबेर छोबी) को दिया गया. बेस्ट डायरेक्टर (सर्वश्रेष्ठ निर्देशक) का पुरस्कार इजरायल की फिल्म द किंडरगार्डन टीचर के निर्देशक नादव लापीड ने प्राप्त किया. लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित चीनी फिल्म निर्माता वोंग कार-वाई को 56 की उम्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया.
इस अवसर पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर, गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर, गोवा की राज्यपाल सुश्री मृदुला सिन्हा, वयोवृद्ध फिल्म अभिनेत्री वहीदा रहमान, बहुमुखी फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर, अभिनेता जैकी श्रॉफ, भोजपुरी अभिनेता रवि किशन और मलयालम अभिनेता जयराम, अभिनेत्री दिव्या दत्त, आरती छाबरिया, तनुश्री दत्त, रमेश सिप्पी, ओम प्रकाश मेहरा समेत राजनीति और फिल्म इंडस्ट्री के तमाम गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे.
सम्मान समारोह के उपरांत उत्तर-पूर्व के क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा विभिन्न नृत्य तथा ज़ुबिन गर्ग के गायन का कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम का संचालन अभिनेता राजकुमार राव और अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने किया. अंत में इफ्फी के निर्देशक शंकर मोहन ने धन्यवाद ज्ञापित किया. ज्ञातव है कि, फिल्म महोतसव का उद्घाटन मेगा स्टार अमिताभ बच्चन ने किया था और साउथ के सुपर स्टार रजनीकांत को शताब्दी पुरस्कार से नवाजा गया था. उद्घाटन के दिन अनुपम खेर और रवीना टंडन ने कार्यक्रम का संचालन किया था. पूरे फिल्म समारोह में देश – विदेश के हज़ारों डेलीगेट्स फ़िल्मकार, निर्माता, निर्देशक, कलाकार बहुत से गणमान्य जनों ने शिरकत की.सर्वप्रकारेण ग्यारहवें वर्ष भी गोवा में आयोजित यह महोत्सव सफल रहा. कदाचित इसीलिए सरकार ने गोवा को अब अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव हेतु स्थाई स्थल घोषित कर दिया है.
अब समापन समारोह संपन्न हो गया है. क्लोजिंग फिल्म (चीन की द ग्रैंड मास्टर) रात को दिखाई जा चुकी है. लोग-बाग़ अपने घरों को लौटने लगे हैं. कुछ ही घंटों के अंतराल में सजावट का समेटने लगे हैं वही लोग जिन्होंने दिन रात मेहनत करके सब जगह तैयार किया था. महोत्सव के सजावट की जिम्मेदारी आर्ट डायरेक्टर सुशांत तारी की थी और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन किया है. साज – सज्जा में ७० के दशक की फिल्म युग की झलक बखूबी पेश की गयी है. इस साज – सज्जा में पर्यावरण के अनुकूल सामग्री उपयोग में लायी गयी है. फाइबरग्लासेज, कपडे जैसी सामग्री प्रमुख हैं. रेड कॉरपेट का संयोजन भी कुछ अलग हटकर इफ्फी में देखने को मिला. कुल मिलकर इस वर्ष इफ्फी महोत्सव की भारी सफलता के पीछे सुशांत तारी की अथक परिश्रम को नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता. अलविदा तो कह चुके हैं हम सभी किन्तु आशा और विश्वास है कि, फिर मिलेंगे अगले साल एक नए जोश के साथ इफ्फी-२०१५ में.


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Mayapuri

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