भारत के अंतर्राष्ट्रीय-फिल्म-मेले का स्वर्ण जयंती महोत्सव

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बेहद कौतुहल और उत्सुकता से लबरेज भारत के अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा मेले का आयोजन गोवा में किया गया। यह फिल्म फेस्टिवल का 50वां आयोजन था- जिसमें उत्तर और दक्षिण भारत के तमाम विशिष्ट सिनेमाकर्मी आकर्षण की वजह थे। विदेशी फिल्मकारों का उनकी फिल्मों के साथ, रोमांचक जमावाड़ा अखाड़े के आकर्षण जैसा था। अमिताभ बच्चन, रजनीकांत और सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की उपस्थिति ने इस फिल्म मेले को ‘महा सम्मेलन’ के रूप में तब्दील कर दिया था! सचमुच I&B मंत्रालय, फिल्म फेस्टिवल के डायरेक्टर और गोवा सरकार की इंटरटेनमेंट सोसायटी ने सिनेमा के 50वें एडिशन को इतना शानदार पेश किया है कि हम फख्र से कह सकते हैं कि हमारे देश का फिल्म फेस्टिवल कान्स, बर्लिन, वेनिस, कार्लोवेरी तथा मास्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म आयोजनों को टक्कर देने में कम नहीं है।

‘‘#IFFIGoa50’’ की शुरूआत डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इनडोर स्टेडियम में प्रायोजित की गई थी। कार्यक्रम के एंकर थे- करण जौहर। शंकर महादेवन और लुइस बैंक ने समां बांध दिया। सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, फेस्टिवल निर्देशक चैतन्य प्रसाद, सेक्रेटरी I&B अमित खरे की उपस्थिति में पहली बार जिस सितारे को Icon of स्वर्ण जयंती महोत्सव से सम्मानित किया गया, वे थे- सुपर स्टार रजनीकांत। अमिताभ बच्चन ने रजनीकांत को यह सम्मान दिया। रजनीकांत ने भी अमिताभ बच्चन को स्पेशल अवॉर्ड से सम्मानित किया। इस मौके पर फ्रांस की मशहूर अदाकारा और फिल्मकार इसाबेले हुप्पर्ट को लाईफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। समारोह की ओपनिंग फिल्म रही – DESPITE THE FOG जिसे देखने के लिए मेहमानों तथा दुनिया भर से आए सैकड़ों डेलिगेट्स में होड़ लगाकर देखने जैसी बात थी। पूरे एक सप्ताह के इस फिल्मी मेले में उत्सुकता चरम पर थी। आज इंटरनेट के जमाने में जब सिनेमा हर प्लेटफॉर्म पर हैं, यह कौतुहल की ही बात है कि लोग ‘स्वर्ण मयूर’ और ‘रजत मयूर’ की चर्चा करने की उत्सुकता से बच नहीं पाते।

IFFI 2019 की खास बात यह रही कि सरकार ने ‘वन विन्डो’ सुविधाएं देने की घोषणा की है इससे सिनेमा मेकरों को अनुमति पाने के लिए जगह-जगह नहीं दौड़ना पड़ेगा। सूचना प्रसारण मंत्री ने इस मौके पर IFFI 2019 के स्वर्ण जयंती स्मरणार्थ डाक टिकट जारी किया है और फिल्म मेकरों से अनुरोध किया है कि वे दिव्यांगजनों को ध्यान में रखकर भी फिल्मों का निर्माण करें! सन् 1952 से आरंभ किए गये भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का कारवां स्वर्ण जयंती तक पहुंचा है। हम उम्मीद करते हैं यह सफर बदस्तूर जारी रहेगा…!

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