19वें ‘इफ्फला (आई एफ एफ एल ए – IFFLA)’ 2021 में अजीतपाल सिंह की फिल्म ‘फायर इन द माउंटेंस ’ का लहराया परचम

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19वें ‘इफ्फला (आई एफ एफ एल ए – IFFLA)’ 2021 में अजीतपाल सिंह की फिल्म ‘फायर इन द माउंटेंस ’ का लहराया परचम
अजीतपाल सिंह की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित पहली हिंदी फीचर फिल्म “फायर इन द माउंटेंस” ने “इफ्फला” के 19 वें फिल्मोत्सव में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के ऑडियंस अवॉर्ड को जीत कर रचा एक नया इतिहास – शान्तिस्वरुप त्रिपाठी
20 से 27 मई के बीच अमरीका के कैलीफोर्निया में आयोजित हुए 19वें ‘इफ्फला’ फिल्मोत्सव में फिल्मकार अजीतपाल सिंह की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित पहली हिंदी फीचर ‘‘फायर इन द माउंटेंस’’, जो लॉस एंजिल्स के 19 वें वार्षिक भारतीय फिल्म समारोह की उद्घाटन फिल्म के रूप में प्रदर्शन हुआ और इसे  दर्शकों के सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के अवॉर्ड से नवाजा गया। उद्घाटन फिल्म के रूप में फिल्म ‘‘फायर इन द माउंटेंस’’ का प्रदर्शन होने के बाद ‘ऑस्कर अवॉर्ड विजेता फिल्मकार आसिफ कपाड़िया के साथ अजीतपाल का एक व्यावहारिक प्रश्नोत्तर भी हुआ। मजेदार बात यह है कि ‘मुंबई मंत्रा-सनडांस इंस्टीट्यूट स्क्रीन राइटर्स लैब 2012’ में आंसु कपाड़िया, अजीतपाल सिंह के मेंटर थे। इस लैब में चुनी गयी अजीतपाल सिंह की पहली पटकथा ने सनडांस ग्रांट जीता था।

सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए ऑडियंस अवॉर्ड जीतने से उत्साहित लेखक, निर्माता व निर्देशक अजीतपाल सिंह कहते हैं-“हम जब भी फिल्में बनाते हैं, उस वक्त हमारे दिमाग में हमेशा एक दर्शक होता है। मुझे यह जानकर गर्व का अहसास हुआ कि हमारी फिल्म ‘फायर इन द माउंटेनस’ को कैलिफोर्निया में दर्शकों ने पसंद किया और हमें ‘इफ्फला’ में ऑडियंस च्वाईस अवॉर्ड से पुरस्कृत किया। ”

इससे पहले अजीतपाल सिंह द्वारा लिखित-निर्देशित और जार पिक्चर्स द्वारा निर्मित फिल्म ‘‘फायर इन द माउंटेंस’’ का प्रतिष्ठित सनडांस फिल्म फेस्टिवल 2021 में विश्व प्रीमियर हो चुका है, जहां यह फिल्म  विश्व सिनेमा नाटकीय प्रतियोगिता में दक्षिण एशिया से चुनी गई एकमात्र फिल्म थी।

इतना ही नही हाल ही में इस फिल्म ने  हाल ही में प्रतिष्ठित 20वें लास पालमास डी ग्रैन कैनरिया अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, स्पेन में सिल्वर लेडी हरिमगुडा और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (चंदन बिष्ट) ने दो पुरस्कार हासिल किए। एलपीए फिल्म फेस्टिवल ज्यूरी ने कहा कि, ‘‘वह समकालीन भारत में विरोधाभासों को चित्रित करने की फिल्म की क्षमता और परंपरा और आधुनिकता के बीच की दुविधा को अपने पात्रों की जटिलता को व्यक्त करते हुए स्पष्ट सादगी के साथ प्रभावित करते हैं।‘‘ पहले हिंदी फीचर ‘‘फायर इन द माउंटेंस’’ का नाम ‘स्वाइजरलैंड’ था, जिसने 2019 फिल्म बाजार की वर्क-इन-प्रोग्रेस लैब में सर्वश्रेष्ठ डब्ल्यूआईपी परियोजना के लिए दो पुरस्कार, ‘प्रसाद लैब डीआई‘ और ‘मूवीबफ एप्रिसिएशन‘ जीते। यह एनएफडीसी स्क्रीनराइटर्स लैब 2018-19 और मार्चे डू फिल्म 2020, गोज टू कान्स सेक्शन का भी हिस्सा थी।

82 मिनट की अवधि वाली पारिवारिक फिल्म ‘‘फायर इन द माउंटेंस’’ की कहानी उस माँ चंद्रा (विनम्रता रॉय) की है, जो व्हीलचेयर से बंधे अपने बेटे को फिजियोथेरेपी के लिए एक दूरदराज के हिमालयी गाँव में ले जाने के लिए सड़क बनाने के मकसद से मेहनत करते हुए पैसे बचाती रहती है, लेकिन उसके पति धर्म (चंदन बिष्ट) का मानना है कि इसका उपाय एक शर्मनाक अनुष्ठान (जागर) है, इसलिए वह सारी बचत चुरा लेता है। इस फिल्म में उत्तराखंड के युवा कलाकारों हर्षिता तिवारी और मयंक सिंह जायरा के साथ विनम्रता राय, चंदन बिष्ट और सोनल झा की अहम भूमिकाएं हैं।

अजीतपाल सिंह फिल्म की कहानी के प्रेरणा स्रोत की चर्चा करते हुए कहते हैं-‘‘मुझे इस कहानी की प्रेरणा अपने परिवार के ही अंदर घटित एक घटनाक्रम से मिली। मेरी चचेरी बहन अमरजीत कौर की मृत्यू महज इसलिए हो गयी, क्योंकि उनके पति उन्हें लेकर अस्पताल नहीं गए।उनके पति यही कहते रहे कि उन पर किसी भूत का साया है। इस घटनाक्रम के बाद मेरे मन में सवाल उठने लगे कि हमारे भारत देश में विज्ञान पर यकीन क्यों नही किया जाता? भारतीय समाज में औरत का क्या स्थान है? मुझे पता है कि मेरी बहन अस्पताल जाना चाहती थी, मगर उनके पति उसे अस्पताल नहीं ले गए। इस घटनाक्रम व मेेरे अंदर उद्वेलित हो रहे विचारों ने मुझे पहाड़ों पर रहने वाली एक आधुनिक औरत और एक दकियानूसी / ट्रेडीशनल सोच वाले पुरूष के विवाह पर फिल्म लिखने व बनाने के लिए उकसाया। इसमें चंद्रा का किरदार मेरी बहन, मेरी माँ और मेरी पत्नी के चरित्रों का मिश्रण है।’’

अजीत पाल सिंह आगे कहते हैं -‘‘मेरी फिल्म में परंपरागत और आधुनिक सोच के बीच के टकराव के साथ दिल से मजबूत एक औरत की कहानी है। मेरी फिल्म लोगों को अंधविश्वास पर सवाल करने को प्रेरित करेगी।

फिल्म ‘फायर इन द माउंटेंस’ का निर्माण ‘जार पिक्चर्स प्रोडक्शन’ के तहत अजय राय और एलन मैकएलेक्स तथा सह निर्माण  मौली सिंह और अमित मेहता ने किया है।

पहली फीचर फिल्म ‘‘फायर इन द माउंटेंस’’ से पहले अजीतपाल सिंह की पुरस्कार विजेता लघु फिल्म ‘‘रम्मत -गम्मत’ भी ‘इफ्फला मंें ‘‘चाइल्डहुड ऑन एज‘‘ का हिस्सा रही है। इस फिल्म को ओबरहाउजेन अंतर्राष्ट्रीय लघु फिल्म महोत्सव 2018 में पुरस्कृत किया गया था। यह लघु फिल्म हाल ही में मुबी इंडिया पर रिलीज हुई है।

बाक्स आइटम: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाने वाले अजितपाल सिंह:

  बतौर स्वतंत्र लख्ेाक व निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘‘फायर इन द माउंटेस’’ से भले ही अजीतपाल सिंह सूर्खियों मे आ गए हों, मगर फिल्म माध्यम से वह लंबे समय से जुड़े हुए हैं। बठिंडा, पंजाब में जन्मे अजीतपाल सिंह जब 8 वर्ष की उम्र के थे, तब उनके पिता, एक किसान और पूर्व सैनिक बठिंडा में एक सिनेमा हॉल चलाया करते थे, जिसे पंजाब में विद्रोह के दौरान काफी नुकसान के चलते बंद करना पड़ा था। उसके बाद उनका परिवार अहमदाबाद, गुजरात चला आया था,जहां अजीतपाल सिंह के पिता ने सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर पूरे परिवार का भरण पोषण किया। अजीतपाल सिंह गरीबी और हिंसा के बीच एक यहूदी बस्ती में पले-बढ़े और एक सिख बच्चा होने के नाते, उस समय सिख विरोधी भावनाओं के कारण उन्हें बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ा।

फिलहाल मुंबई निवासी अजीतपाल सिंह ने रसायन शास्त्र का अध्ययन करने, रंगमंच और फोटोग्राफी सीखने के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण को अपना कार्यक्षेत्र चुना। अजीतपाल की पहली पटकथा सनडांस स्क्रीनराइटर्स लैब 2012 का हिस्सा थी, जहां इसने सनडांस ग्रांट जीता था। उनके गुरु ऑस्कर विजेता फिल्म निर्माता आसिफ कपाड़िया और ऑस्कर नामांकित पटकथा लेखक गिलर्मो अरियागा (अमोरेस पेरोस, बैबेल और 21 ग्राम), माइकल गोल्डनबग (हैरी पॉटर एंड द ऑर्डर ऑफ द फीनिक्स), जोस रिवेरा (द मोटरसाइकिल डायरीज), हॉवर्ड ए थे। रोडमैन (सैवेज ग्रेस) और मार्कोस बर्नस्टीन (ऑस्कर नामांकित ब्राजीलियाई फिल्म सेंट्रल स्टेशन)।

उनकी दूसरी फिल्म ‘फायर इन द माउंटेंस’ को एनएफडीसी की स्क्रीनराइटर्स लैब के लिए चुना गया था। वह बर्लिनले टैलेंट कैंपस का भी हिस्सा थे और गोएथे इंस्टीट्यूट द्वारा चुने गए म्यूनिख फिल्म फेस्टिवल 2009 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सबसे कम उम्र के सदस्य थे।

उनकी लघु फिल्म ‘रम्मत -गम्मत’ ने ओबरहाउजेन 2018 के प्रतिष्ठित लघु फिल्म समारोह में ‘स्पेशल मेंशन‘ का पुरस्कार जीता और पाम स्प्रिंग शॉर्ट्स फेस्ट, सिनेकिड, एमएएमआई सहित 50 से अधिक प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय फिल्म समारोहों का दौरा करने के बाद छः पुरस्कार जीते। फिल्म का प्रीमियर मुबी इंडिया पर हुआ। उनकी एक अन्य लघु फिल्म ‘‘हमिंगबर्ड’ ने भी कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों की यात्रा की। इस फिल्म को फ्रांस में सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म के लिए जूरी पुरस्कार से नवाजा गया। फायर इन द माउंटेंस (पहले स्विजरलैंड शीर्षक से) एक लेखक और निर्देशक के रूप में उनकी पहली विशेषता है।

स्वतंत्र रूप से फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने से पहले अजीतपाल ने नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘‘वंस अगेन’’ के संवाद लिखे। फिल्म ‘गुड़गांव’ के वह एसोसिएट निर्देशक थे। जबकि 2011 में फिल्म ‘‘पतंग’’ का  सह निर्देशन किया था।


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Mayapuri

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