भारतीय फिल्में ऑस्कर तक आकर दूर चली जाती है?

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इस साल एक बार फिर भारतीय फिल्म ने ऑस्कर में एंट्री ली है। इससे पहले भी ‘लगान’, ‘सलाम बॉम्बे’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्मों ने पांच बेहतरीन फिल्मों में अपनी जगह बनाई। लेकिन सबसे ज्यादा दुख उस समय ‘मदर इंडिया’ जैसी बेहतरीन फिल्म का ऑस्कर से बाहर होने का था। फिल्म की कहानी ठेठ भारतीय विधवा राधा (नरगिस दत्त) की थी जिसका पूरा जीवन संघर्ष व त्याग में गुज़र जाता है नरगिस दत्त अपने डकैत बेटे को जान से मार देती है। फिल्म खुद में एक महाकाव्य नाटक था,उस समय फिल्म की लागत 40 लाख की थी। फिल्म की लागत ने निर्माता महबूब खान को हिला कर रख दिया था। एक समय यह तक आ गया था कि फिल्म को रोकने तक की बात आ गयी थी क्योंकि फिल्म के लिए धन की कमी होने लगी थी। अभिनेत्री निम्मी ने फिल्म के निर्माता महबूब खान को बताए बिना पैसें दे कर फिल्म आगे बढ़ाने में मदद की व फिल्म 1957 में रिलीज़ हुई  फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई। ‘मदर इंडिया’ फिल्म को बेस्ट फॉरेन फिल्म के लिए पांच प्रत्याशियों में से एक के रूप में शार्ट लिस्ट किया गया था। फिल्म के लिए सबसे दुख भरी बात यह रही कि यह फिल्म फेलिनी नाइट्स से सिर्फ एक वोट से बाहर हो गई।

 


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Mayapuri

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