बिना मेकअप के पहचनना मुश्किल है शर्मिला टैगोर को

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यह जरूरी नही है कि हमारे आर्टिस्ट जितने पर्दे पर सुन्दर दिखाई देते हैं, उतने ही सुन्दर असल जिंदगी में हो। हीरोइनों में बहुत कम ऐसी हैं या थी जो असल जिंदगी में वैसे ही पायी गईं। जैसा कि पर्दे पर, जिनमें नरगिस, मधुबाला, सुरैया, मीना कुमारी और नई हीरोइनों में से राखी, मुमताज, डिम्पल कपाड़िया और जीनत अमान का नाम लिया जा सकता है।

दूसरी ओर कुछ ऐसे भी कलाकार हैं जो पर्दे से बिल्कुल भिन्न दिखाई देते हैं जैसे बिन्दु को ही लीजिए, पर्दे पर जितनी सैक्सी दिखाई देती हैं घरेलू जिंदगी में उतनी ही सादी दिखाई देती हैं। आपके पास से सादा साड़ी में सीधी-सी चोटी किये निकल जायेंगी और आप पहचान नही पायेंगे। ऐसी ही कुछ हमारी टाईग्रैस शर्मिला के साथ है। अगर वह मेकअप में बाहर न निकले तो थोड़ी देर के लिया पहचानना मुश्किल हो जाता है। उस दिन फिल्मिस्तान स्टूडियो में निर्देशक ब्रिज की शूटिंग पर पहुंचे तो इतने में एक फियट कार आकर रूकी। एक साधारण युवती को बैठा देख कर सोचा, “शूटिंग देखने आई होगी” जब वह बाहर निकली तो पता चला कि वह शर्मिला टैगोर हैं, तो मुझें एक पुरानी घटना याद आ गई।

कुछ साल पहले एक फिल्म मेरे हमदम मेरे दोस्त की शूटिंग के लिए दिल्ली गए। इस फिल्म में शर्मिला टैगोर धर्मेन्द्र के साथ काम कर रहीं थी। शर्मिला अशोका होटल में ठहरीं और निर्माता ने उनके लिए एक गाड़ी ड्राइवर समेत नियुक्त कर दी।

शूटिंग अभी चार-पांच दिन ही हुई थी कि बारिश शुरू हो गई। इसलिए सब लोग अपने अपने कमरों में समय बिताने लगे। एक दिन शर्मिला ने बोर होकर घूमने की ठानी और बिना मेकअप किये नीचे आ कर गाड़ी में बैठ गईं।

चलो ड्राइवर कनॉट प्लेस ले चलो।

“यह गाड़ी सिर्फ मैडम के लिए है। उनका हुक्म है उनके बगैर कोई भी गाड़ी न लेकर जाये”

ड्राइवर ने शर्मिला को पहचाना नही था। उन्हें हेयर ड्रैसर या आया समझा।

“अरे भाई, मैं ही मैडम हूं”

शर्मिला को कहना पड़ा ड्राइवर ने अचम्बे से पीछे देखा और घबराहट से पसीने से लथपथ हो गया और जल्दी से गाड़ी कनॉट प्लेस की ओर दौड़ा दी।


Mayapuri