INTERVIEW!! ‘‘आपका अपना होमवर्क बहुत अच्छा होना चाहिए.’’ जॉन अब्राहम

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‘मद्रास कैफे’ जैसी सफलतम व मकसदपूर्ण फिल्म का निर्माण करने के अलावा इस फिल्म में बेहतरीन परफार्मेंस देने के लिए प्रशंसा बटोर चुके अभिनेता जॉन अब्राहम पूरे दो साल के बाद अब अनीस बज्मी की फिल्म ‘वेलकम बैक’ में नजर आने वाले हैं। 4 सितंबर 2015 को रिलीज हो रही फिल्म ‘वेलकम बैक’ को जॉन अब्राहम घर वापसी की संज्ञा दे रहे हैं।

‘मद्रास कैफे’ जैसी एक संजीदा व गंभीर विषय वाली फिल्म करने के बाद कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम बैक’ को चुनने के पीछे क्या सोच रही ?

मैं कॉमेडी का बहुत बड़ा फैन हूं। मैने पहले भी ‘गरम मसाला’, ‘दोस्ताना’, ‘देसी ब्वॉयज सहित कई कॉमेडी फिल्में की है। यदि आपकी कॉमेडी की टाइमिंग परफैक्ट है, तो आप बार बार कॉमेडी फिल्म करना पसंद करेंगे। लेकिन कॉमेडी करना बहुत कठिन है। कॉमेडी की बनिस्बत एक्शन और रोमांस करना आसान है। मैंने कॉमेडी के अलावा एक्शन व रोमांस किया है। मेरी राय में लोगों को हंसाना बहुत मुश्किल होता है। मैंने कॉमेडी फिल्में करते हुए बहुत कुछ सीखा। मगर ‘वेलकम बैक’ में पहली बार अकेले हूँ। मेरे आस पास नाना पाटेकर, परेश रावल, नसीरूद्दीन शाह, अनिल कपूर जैसे कमाल के कलाकार हैं। इन कलाकारों के संग अभिनय करने से कलाकार के तौर पर हमारा स्तर भी बढ़ जाता है। दूसरी बात मुझे इसकी स्क्रिप्ट बहुत पसंद आयी। मैं फिल्म के निर्देशक अनीस बज्मी का बहुत बड़ा फैन हूं।

‘वेलकम बैक’ की स्क्रिप्ट में आपको क्या खास बात पसंद आयी ?

‘वेलकम’ जहां पर खत्म हुई थी, कहानी वहीं से आगे बढ़ी है। उसमें अक्षय कुमार की शादी हो गयी थी, वह थोड़ा अच्छा इंसान हो गया था। तो अब इसमें नयी कहानी, नए किरदार जोड़े गए हैं। इसमें नसीरूद्दीन शाह का ‘वांटेड भाई’ का जो किरदार, कमाल का है। वह भी डॉन ही हैं।

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आपका अपना किरदार क्या है ?

यह कहानी अज्जू भाई की है। जो कि एक गुंडा है। उसे प्यार हो जाता है और अब वह शरीफ बनना चाहता है। इसके लिए उसे उदय (अनिल कपूर) और मजनू भाई (नाना पाटेकर) को मनाना पड़ता है। मेरे अपोजिट श्रुति हासन हैं। इस फिल्म में मेरा अज्जू भाई किरदार ऐसा है, जिसके लिए मुझे बैठकर चरित्र चित्रण करने की जरूरत नहीं पड़ी। यह कोई गे्र सिनेमा भी नहीं है। हां! इस फिल्म में मेरे लिए चुनौती थी नाना पाटेकर, नसीरूद्दीन षाह व परेष रावल जैसे कलाकारों के साथ काम करने की।मैं इससे पहले ‘दोस्ताना’ जैसी फिल्मों में काॅमेडी कर चुका था। लेकिन ‘वेलकम बैक’ में मैं अकेला था। इसमें मेरे साथ अभिषेक बच्चन या अक्षय कुमार नहीं थे। ऐसे में तमाम सीनियर कलाकारों के साथ कॉमेडी करना मेरे लिए चुनौती थी।

नाना पाटेकर व नसीरूद्दीन शाह जैसे दिग्गज कलाकारों के सामने दब जाने का भय भी था?

मेरे लिए फायदे का सौदा यह रहा कि मेरे सभी के साथ संबंध बहुत अच्छे थे। यह सभी सीनियर कलाकार मेरे साथ कदम मिला रहे थे। लेकिन कॉमेडी फिल्म में सभी कलाकारों के बीच ट्यूनिंग अच्छी होनी चाहिए। आपकी अपनी कॉमिक टाइमिंग अच्छी होनी चाहिए। फिर जब आप इतने महान कलाकारों के साथ काम कर रहे हों, तो आपका अपना होमवर्क बहुत अच्छा होना चाहिए। इसलिए मैं सेट पर अपनी तरफ से पूरी तैयारी के साथ जाता था। मेरी परफॉर्मेंस, काम के प्रति मेरी लग्न देखकर सीनियर कलाकारों ने भी मेरा हौंसला बढ़ाया।

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नसीरूद्दीन शाह के साथ काम करने के क्या अनुभव रहे? उनसे क्या खास बात सीखी?

– वह अभिनय के इंस्ट्टीयूट हैं, तो वहीं बेहतरीन इंसान हैं। हमेशा मुस्कुराते रहते हैं। सेट पर कभी महसूस होने नहीं दिया कि वह बडे़ हैं। वह इस तरह से बात करते थे कि मुझे लगता था कि मैं अपने घर पहुंच गया हूं। नाना पाटेकर, अनिल कपूर व परेश रावल के साथ मेरे इक्वेशन बहुत अलग व अच्छे हैं। वैसे मैं याद दिला दूं कि हमारी फिल्म का सबसे बड़ा आश्चर्य का पैकेज तो डिंपल कपाडिया हैं।

‘वेलकम बैक’ में डिंपल कपाडि़या भी हैं। उनको लेकर क्या कहेंगे ?

सीन हैं। डिंपल जी को देखकर हमें उनकी पहली फिल्म ‘बॉबी’ की याद आ गयी। वह आज भी उतनी ही खूबसूरत हैं। उनके बाल उतने ही घने हैं। उसी तरह से मुस्कुराती हैं। उन्हें देखकर मैं खुद शॉक रह गया था। उनमें कोई बदलाव नहीं है। जब हमने उनके साथ बात करना शुरू किया, तो हमें पता चला कि वह निजी जिंदगी में बहुत फनी हैं। पर्दे पर जो उन्होंने काम किया है, वह तो फैंटास्टिक है।

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आप अक्षय कुमार की बड़ी प्रशंसा करते हैं। मगर आपने ‘हेरा फेरी 3’ में अक्षय कुमार की जगह ले ली?

अक्षय मेरे लिए बड़े भाई जैसे हैं। हम एक दूसरे की सफलता व उपलब्धियों पर बहुत खुश होते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में मेरे कुछ दोस्त हैं, जो काफी करीब हैं। उनमें से अक्षय कुमार और अभिषेक बच्चन मुख्य है। रोहित धवन मेरे काफी नजदीक हैं। अब उसका भाई वरूण भी करीबी हो गया है। जब मेरे पास ‘हेरा फेरी 3’ का आफर आया,  तो मैंने अक्षय को बताया और उसने मुझसे कहा कि मुझे यह फिल्म करनी चाहिए।

आप कॉमेडी के फैन हैं। तो क्या इसी वजह से आपने बतौर निर्माता पहली फिल्म ‘विक्की डोनर’ को कॉमेडी फिल्म के रूप में बनाया था?

मेरे द्वारा निर्मित दो फिल्में ‘विक्की डोनर’ और ‘मद्रास कैफे’ रिलीज हो चुकी हैं। दोनों ही फिल्में शोध परक और संदेश के साथ बनायी। ‘विक्की डोनर’ भले ही कॉमेडी फिल्म थी, लेकिन हमने इसमें स्पर्म डोनेशन जैसा गंभीर विषय उठाया। डॉक्टर के रूप में अन्नू कपूर का किरदार छोड़ दें, तो फिल्म का ट्रीटमेंट कहीं पर भी कॉमिक नहीं था। निर्माता के तौर पर मैं बहुत ज्यादा रचनात्मक हूँ। निर्माता के तौर पर भविष्य में भी मेरी जो फिल्में आने वाली हैं, वह भी रचनात्मकता के स्तर पर बेहतर होगी।

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निर्देशक कब बन रहे हैं ?

फिलहाल इस बारे में कुछ सोचा नहीं। निर्देशन के बारे में ज्यादा कुछ जानता भी नहीं हूं। इसलिए इस बारे में कोई भी निर्णय लेना जल्दबाजी होगी।

आने वाली फिल्में ?

जनवरी 2016 में सबसे पहले ‘रॉकी हैंडसम’ आएगी। इसके बाद जुलाई में ‘ढिषुम’ और अक्टूबर में ‘फोर्स 2 ’ आएगी। इन सभी फिल्मों में मैं निर्माता या सहनिर्माता भी हूं।


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