INTERVIEW: काम और श्रद्धा से क्या नही मिल सकता – पेंटल

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मायापुरी अंक, 57, 1975

मेहबूब स्टूडियो में साहेब बहादुर के सेट पर कॉमेडियन पेंटल से भेंट हो गई। मैंने पेंटल से पूछा। पेंटल जी, आप और असरानी साथ-साथ ही इंडस्ट्री में आए किंतु आपके मुकाबले में असरानी बहुत आगे निकल गए हैं क्या असरानी आपसे अच्छे एक्टर हैं या कोई और वजह है?

यह बात नही है हर कलाकार अपनी जगह अच्छा होता है। कुछ लोग मुझे ज्यादा पसंद करते हैं और कुछ असरानी को आज आप देखते है देवआनंद की जितनी फॉलोइंग है उतनी ही दिलीप कुमार की है। क्योंकि दोनों ही अपने रंग के अकेले अभिनेता है। पेंटल ने उत्तर देते हुए कहा आप जानते हैं कि मैं और असरानी एक साथ कई फिल्मों में काम कर रहे हैं। हम आपस में बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारा आपस में कभी झगड़ा नही हुआ बल्कि सेट पर हम एक दूसरे को सहयोग देते हैं और सलाह मशवरे से काम करते हैं। पेंटल ने कहा मैं समझता हूं कि मैंने जितनी मेहनत और संघर्ष किया है, वह व्यर्थ नही जाएगा वेदों में लिखा है कि एक आदमी ने श्रद्धा से पत्थर की पूजा की ओर उसे उसी में भगवान मिल गया। तो हम मेहनत करके सफल एक्टर क्यों नही बन सकते है। पेन्टल ने कहा।

कहते है बड़े अभिनेता नये लोगों को उभरने नही देते क्या यह सही है? मैंने पूछा।

ऐसा मैंने तो महसूस नही किया मैं समझता हूं कि दिलीप साहब से बड़ा एक्टर इस समय नही है। मैंने उनके साथ बैराग में काम किया है। आप को शायद यह जानकर आश्चर्य होगा कि उस फिल्म में मैंने दिलीप साहब को डायरेक्ट किया है और एक छोटा सा अभिनेता होने के बावजूद दिलीप साहब ने केवल मुझे इज्जत दी और कहा पेन्टल तुम मुझे डायरेक्ट करो। हम लोगों को उनसे शिक्षा लेनी चाहिए पेंटल ने कहा।

आपने अब तक जिन निर्देशकों के साथ काम किया है, उनमें आपको किसने प्रभावित किया है?  मैंने पूछा।

किसी एक का नाम लेना तो उचित नही है। क्योंकि सभी निर्देशक अच्छे हैं लेकिन निर्देशक के साथ काम करने में जब ही मजा आता है जब रोल भी अच्छा हो पेन्टल ने कहा।

आपको अब तक अपनी किन फिल्मों के रोल पसंद आए है? मैंने पूछा।

मुझे अभी तक मेरी पसंद के केवल दो तीन ही रोल मिले है जिन में मुझे कुछ कर दिखाने का अवसर मिला है। वह फिल्में है लाल पत्थर बावर्ची और रफू चक्कर पेंटल ने कहा

 


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Mayapuri

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