INTERVIEW: ‘‘वह फिल्में जिन्होंने मुझे एक अलग पहचान दी’’ – अभिषेक बच्चन

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लगातार कॉमेडी करते हुये अभिषेक भी अब सोच रहे हैं कि फिल्म ‘हाउसफुल 3’ के बाद क्या करें। दरअसल अभिषेक को लगातार एक ही तरह की फिल्में करना पसंद नहीं। खैर फिलहाल तो उनसे इस फिल्म को लेकर हुई बातचीत के मुख्य अंश इस प्रकार रहे।

फिल्म तक आपकी पहुंच कैसे बन पाई ?

लेखक फरहाद और साजिद के साथ इससे पहले मैंने फिल्म ‘बोल बच्चन’ की थी। वहीं से उनसे मेरी अच्छी जान पहचान हो गई थी। एक दिन उन्होंने कहा कि वे मुझे कोई कहानी सुनाना चाहते हैं। इस पर मैंने उन्हें कहा कोई बात नहीं आप कभी भी आ जाओ। मैंने कहानी सुनी जो मुझे अच्छी लगी। इसके बाद उनका कहना था कि इस फिल्म को हम डायरेक्ट करने जा रहे हैं। आपको कोई एतराज तो नहीं। मैने कहा कि यार भला मुझे क्या एतराज हो सकता है। मैं तुम्हारे साथ खुशी से काम करने के लिये तैयार हूं।

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फिल्म में किरदार क्या है ?

मेरे किरदार के मुताबिक बंटी यानि मैं एक रैपर बनना चाहता हूं इसलिये लगातार पूरी फिल्म में ऑडिशन देता रहता हूं। बाद में ऐसा कुछ होता है कि सिंगर होने के बावजूद मुझे गूंगा बन कर रहना पड़ता है इसी तरह अक्षय एक फुटबॉलर है लेकिन उन्हें भी बिना टांगों के दिखाई देना पड़ता है। इसके अलावा फिल्म में आपको और भी बहुत कुछ ऐसा देखने के लिये मिलेगा जिसे देखते हुये आप लगातार हंसते रहेंगे।

रैपर बनने के लिये क्या कुछ करना पड़ा ?

सिंगर से रैपर की कुछ बातें अलग होती हैं जैसे उसकी एक बीट और एक मीटर होता है। इसलिये बोलने से पहले उसे ढेर सारी बातें याद रखनी पड़ती हैं। दूसरे साजिद फरहाद रिहर्सल पर काफी जोर देते हैं।

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आजकल आप लगातार कॉमेडी कर रहे हैं ?

मैने कभी भी लगातार एक जैसी फिल्में नहीं करनी चाहीं क्योंकि बतौर कलाकार मुझे भी बदलाव चाहिये, बदलाव होता है तो फ्रेशनेस आती है और उत्साह भी बना रहता है। कॉमेडी से पहले उन दिनों मैंने ‘गेम’, ‘दम मारो दम’ तथा ‘खेले हम जी जान से’ जैसी इंटेंस फिल्में की। इसके बाद मुझे लगा कि एक तरह की फिल्में कई हो गई, अब  कुछ नया करते हैं तो मैंने कॉमेडी फिल्में करने का मन बनाया। इसके बाद ही मैंने ‘बोल बच्चन’ जैसी कॉमेडी फिल्म साइन की। वह मेरी पहली ऐसी फिल्म थी जिसमें मैने आउट एन आउट कॉमेडी की थी। वो फिल्म करते हुये कॉमेडी में आंनद आया तो शाहरूख भाई की फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ भी कर ली। फिर ये फिल्म की। तो एक बार फिर लगा कॉमेडी भी हो गई। अब कुछ और क्या करना चाहिये। इसलिये अब आगे उसी क्या के इंतजार में हूं।

लेकिन क्या ?

यह एक बहुत ही मुश्किल सवाल है क्योंकि जो आगे कुछ करना है वो क्या है यही दुविधा है जो फिलहाल समझ से बाहर है और ये सिर्फ मेरे साथ ही नहीं बल्कि हर स्टार इस ‘आगे क्या’ का सामना कर रहा है। अभी तक मेरे करियर में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जब मैं इस आगे ‘क्या’ का जवाब नहीं दे पा रहा हूं।

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हास्य में आप कहां से प्रेरणा लेते हैं, अमित जी से ?

अगर अमिताभ बच्चन जी की बात करें तो आप मुझे ऐसा एक एक्टर बता दीजिये जो उनसे प्रभावित नहीं है और कॉमेडी ही क्यों उनमें तो ढ़ेर सारी ऐसी खूबियां है जिनका बहुतेरे कलाकार अपने अभिनय में इस्तेमाल करते हैं। अगर मेरी बात की जाये तो लोगों को लगा था कि फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ के दौरान मैं पूरी तरह से अमित जी को फॉलो कर रहा था लेकिन बाद में फिर किसी ने मुझे ऐसा नहीं कहा क्योंकि शायद तब तक मैं उनकी छाया से निकल गया था ‘गुरू’, ‘सरकार’, ‘बंटी बबली’ और भी फिल्में हैं जिन्होंने मुझे एक अलग पहचान दी।

 

 

 


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Mayapuri

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