INTERVIEW: इम्तियाज और अंजु – प्रेस वालों से सावधान

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मायापुरी अंक, 58, 1975

नटराज स्टूडियो में फिल्म ‘शिकार शिकारी’ के सेट पर अंजु महेन्द्रू से भेंट हो गई। हमने उससे कहा।

क्या गेट-कीपर को आपने मना किया है कि किसी प्रेस वाले को अंदर न आने दिया जाए?

आखिर प्रेसवालों से इस नाराज़गी का क्या कारण ?

प्रेसवालों को मैंने आने के लिए मैंने मना किया है आप खुश किस्मत हैं जो इस सेट पर नज़र आ रहे हैं। दरअसल मैं प्रेस के मामले में बहुत सावधान हो गई हूं। (शायद दूध का जला छाछ फूंक-फूंक कर पीना इसी को कहते है) मैं नही चाहता कि लोग मेरे बारे में अच्छा या बुरा लिखें। मैं यहां बिना भीड़-भाड़ के काम करना चाहता हूं। इम्तियाज ने कहा।

मैंने अंजु को पुन: संबोधित करके पूछा। क्या यह सही है कि आपकी शर्मिला टैगोर से लड़ाई चल रही है ?

नही, ऐसी कोई बात नहीं है लोगों ने बिना वजह कहानियां गढ़ ली है। बात इतनी

थी मुझे राखी और जया भादुड़ी (दोनों से आजकल अंजू की गहरी दोस्ती है) के कारण मुझे मौसम में हीरोइन का रोल मिल गया था। लेकिन फिल्म के वितरकों की आपत्ति के कारण मुझे फिल्म से वंचित होना पड़ा। वह लोग फिल्म में बड़ा नाम चाहते थे इसीलिए वह रोल शर्मिला टैगोर को दे दिया गया। क्योंकि जहां तक नाम का संबंध है शर्मिला टैगोर वाकई बड़े नाम वाली हीरोइन है संजीव कुमार के साथ में काम करना चाहती थी, लेकिन हर एक की मजबूरी होती है और इसी वजह से मैं बहुत बढ़िया रोल अभिनीत करने से रह गई जिसका मुझे अफसोस है। लेकिन ‘गंगा की सौगंध’ और ‘शिकार शिकारी का’ के बाद ऐसी सूरत पेश नही आयेगी अंजू ने बताया।


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Mayapuri

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