INTERVIEW!! ‘‘भाग जॉनी’’ उलझी हुई नहीं बल्कि बहुत ही सरल फिल्म है’’ – ज़ोया मोरानी

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सिनेयुग जैसे बिग बैनर के मालिक करीम मोरानी की बेटी जोया मोरानी ने बतौर अभिनेत्री अपनी शुरूआत की थी फिल्म ‘ऑल वेज कभी कभी’ से। उस फिल्म में उसे इतनी बढि़या भूमिका मिली थी कि उसके बाद उसने अच्छे रोल के लालच में ढेरों फिल्में छोड़ी और जब उसे अपने मन मुताबिक रोल नहीं मिला तो उसने थियेटर करना शुरू कर दिया। एक अरसे बाद जब उसे फिल्म ‘भाग जॉनी’ में मन पसंद रोल मिला तो उसने इस फिल्म का हिस्सा बनने में जरा भी देर नहीं लगाई। फिल्म को लेकर उससे एक बातचीत ।

दोनों फिल्मों के बीच एक अच्छा खासा गैप है ?

वो इसलिये क्योंकि पहली ही फिल्म में इतना बढि़या किरदार था, इसलिये सोचा कि आगे ऐसा ही काम करना है। वैसे भी मुझे कोई पैसा कमाने के लिये तो फिल्म करनी नहीं थी इसलिये काफी वेट करने के बाद जब कोई ऐसी फिल्म नहीं मिली तो मैने थियेटर की तरफ ध्यान लगा लिया ।

थियेटर करने के पीछे क्या मकसद था ?

दरअसल थियेटर के बहुत सम्मानीय शख्स हैं सलीम आरिफ। मुझे उनसे मिलने का मौका मिला तो उन्होंने थियेटर करने का सुझाव दिया। हालांकि मैं उन दिनों थियेटर से बहुत डरती थी क्योंकि वहां सब लाइव होता है। उन दिनों मैंने अली फजल के खूब नाटक देखे। अली मेरी डेब्यू फिल्म में मेरे हीरो थे। सलीम सर ने भी मुझे कहा तो मैने पहले उनके साथ एक वर्क शॉप किया। फिर उन्होंने मुझे अपने एक प्ले में छोटा सा रोल दिया। एक बार मैं स्टेज पर चढ़ी तो सारा डर जाता रहा। उसके बाद तो वहां इतना मजा आया कि मैं फिल्म विल्म सब भूल कर थियेटर में ही रम गई। इन दिनों मैं ब्रिजेष हीरजी के साथ ‘ताज महल का उद्घाटन’ नामक कॉमेडी प्ले कर रही हूं। ये काफी हिट प्ले हो चुका है। उसके मुबंई और गोवा में मिलाकर आठ दस शो हो चुके हैं। आगे हम जल्दी ही उस नाटक के साथ दुबई जाने वाले हैं। वाकई यह बहुत ही शानदार कॉमेडी प्ले है ।

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भाग जॉनी कैसे मिली ?

बस मैं तो नाटक ही कर रही थी इसी दौरान इस फिल्म का ऑफर मिला तो मुझे कहानी बहुत ही अलग और यूनिक लगी इसलिये मैं ये फिल्म करने के लिये तैयार हो गई। इसमें मेरे किरदार का नाम तानिया है ।

आपने एक अरसे बाद कोई फिल्म की हैं क्या ये आपके लिये रिस्क नहीं था ?

बेशक रिस्क था क्योंकि आज हर सप्ताह दो नये चेहरे फिल्मों में आ रहे हैं। ऐसे में मुझ जैसी महज एक फिल्म पुरानी आर्टिस्ट को कौन याद करने वाला था लेकिन मुझे ये भी बताया गया कि रिस्क है लेकिन पैशन भी कोई चीज है। मैंने दूसरी बात पर अमल करने का फैसला किया। जंहा तक डर की बात की जाये तो एक फिल्म करने से पहले डर था लेकिन बाद में मैंने कभी कोई डर महसूस नहीं किया।

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तीन साल बाद वापसी करने पर क्या बदलाव महसूस किया ?
ये बदलाव मेरे जैसी आर्टिस्ट के लिये बहुत ही फायदेमंद रहा क्योंकि आज ढ़ेर सारी छोटे बजट की प्रयोगवादी फिल्में बन रही हैं जंहा स्टार नहीं परफार्मर्स चाहिये। शायद इसीलिये आज नवाजुद्दीन और राजकुमार राव या इरफान खान जैसे परफार्मर्स स्टार बन चुके हैं। जंहा तक मेरी बात की जाये तो ये मेरी पंसद की फिल्म है। आगे भी मुझे अपनी पंसद की फिल्में मिलती रहेंगी तो मैं फिल्मों में भी बनी रहूंगी। वरना थियेटर जिन्दाबाद ।

यंहा कुणाल खेमू नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों रोल निभा रहे हैं। आप कौन से कुणाल के साथ हैं ?

मैं पॉजिटिव कुणाल के साथ हूं क्योंकि नेगेटिव कुणाल शुरू में ही तानिया को मार देता है और पॉजिटिव तानिया को बचाता है। परन्तु दोनों हैं एक ही।

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आपको नहीं लगता कि ये एक बेहद उलझी हुई कहानी है ?

शुरू में मुझे भी ऐसा लगा था लेकिन जब मुझे फिल्म के डायरेक्टर शिवम ने स्टोरी नरेट की तो मैं फौरन ये फिल्म करने के लिये उतावली हो उठी। फिल्म के ट्रेलर में भी इसे काफी उलझी हुई फिल्म बताने की कोशिश की गई है लेकिन जब आप फिल्म देखेंगे तो वहां आपको यह बहुत ही सरलता से समझ में आने वाली फिल्म लगेगी ।

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Mayapuri