INTERVIEW: “मेरा खजाना मेरे पिताजी एवं दादाजी की चिट्ठियाँ हैं”- अभिषेक बच्चन

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लिपिका वर्मा-

अभिषेक बच्चन की हाउसफुल – 3 रिलीज़ पर है लिपिका वर्मा के साथ एक अनूठी भेंटवार्ता में उन्होंने पिता अमिताभ बच्चन ने तीन बारी नेशनल अवॉर्ड जीता है उस बारे में, बेटी आराध्या,  माँ-जया, पत्नी ऐश्वर्या और फिल्मों के बारे में दिल खोल कर बातचीत की –

हाउसफुल-3, एक फ्रैंचाइज़ी है और आप पहली बारी इस फिल्म का हिस्सा बने हैं क्या कहना चाहेंगे ?

हाउसफुल एक बहुत ही मजेदार सीरिज है और इसका हिस्सा बन कर बहुत ही मजा आया। हाउसफुल 1 और 2 जिन्होंने भी देखी होगी वह हाउसफुल 3 भी जरूर देखेंगे यह निश्चित है। मैंने जैसे ही स्क्रिप्ट सुनी केवल एक मिनट में ही मैंने हामी भर दी।

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श्री अमिताभ बच्चन जी की किसी भी फिल्म का सीक्वल बनाया जाए तो क्या आप उसमें काम करना चाहेंगे क्या ?

जी हाँ! मेरे हिसाब से उनकी सीक्वल फिल्म में मेरे अलावा कोई भी सही नहीं बैठेगा। पर मैं उनकी किसी भी सीक्वल फिल्म में काम नहीं करूँगा सीधी सी बात है यदि मैं उनके सीक्वल में काम करता हूँ तो आप लोग मेरा पोस्टमार्टम कर देंगे। आप ही मीडिया वाले यही कहेंगे कि अभिषेक – अमिताभ की तरह काम नहीं कर पाए। दरअसल में उनकी सारी फ़िल्में दी बेस्ट हैं हमें उन्हें छूना भी नहीं चाहिए। उनकी फिल्मों को छू कर हम न्याय नहीं कर पाएंगे।

पिता अमितजी के साथ जूनियर बच्चन के रिश्ते कैसे हैं ?

बचपन से लेकर आज तक उन्होंने मुझे अपने दोस्त की तरह ही ट्रीट किया है मुझे और आज भी हम वही दोस्ती का रिश्ता रखते हैं। मेरी माँ कुछ स्ट्रिक्ट रही वह हमारी लगाम कसती रहती। किन्तु अब कुछ समय बाद हम उनकी पहुँच के बाहर हो गए पर पिताजी हमेशा – जो हम करना चाहते वह हमे करने दिया करते।

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अमिताभ बच्चन तीसरी बारी नेशनल अवॉर्ड पा चुके हैं क्या कहना चाहेंगे ?

हम सबको इस बात पर गर्व है। जाहिर सी बात है हम सब को अच्छा लगता है कि हमारे पिताजी को तीसरी बारी नेशनल अवॉर्ड मिला है और इन सब मौकों पर हम सब एक साथ होते हैं इस से अच्छी बात क्या होगी। केवल आराध्या को हम अंदर नहीं ले जा पाए क्यूंकि बच्चों को अंदर ले जाने की परमिशन नहीं थी। यही फैमिली टाइम होता है हमारे लिए।

कुछ सोच कर अपनी पत्नी की फिल्म ‘सरबजीत’ के बारे में बोले, “एक ही समय पर ‘सरबजीत’ की और मेरी फिल्म – हाउसफुल की डबिंग थिएटर में चल रही थी सो मैंने ऐश के साथ कुछ अंश सरबजीत के भी देखे थे फिल्म रिलीज़ होने से पहले। फैमिली बॉन्डिंग हम भारतीय परिवारों को एक साथ बांधे रखती है यही हमारे लिए बहुमूल्य है।

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अभिषेक का खजाना क्या है ?

मेरे पिताजी ने बचपन से लेकर आज तक जो मुझे चिट्ठियां लिखी हैं और मेरे अपने दादाजी माँ – पिताजी के साथ और अन्य परिवार के साथ जो फोटोज हैं वह मेरे खजाने में रखी हुई हैं। आराध्या के साथ शुरू से लेकर अब तक जितनी फोटोग्राफ्स हैं और ऐश के साथ शादी से लेकर सारी यादें मैंने अपने खजाने में रख छोड़ी हैं। जितने भी पत्र मेरे पितजी ने मुझे स्कूल के समय लिखे थे उन्हें पढ़ता हूँ आज भी तो ढ़ेर सारा ज्ञान मिलता है मुझे। जो लेख में बचपन में अपने रजिस्टर में लिखा करता ताकि मेरी लेखनी सुधर जाये वह सब भी मैंने खजाने में रख छोड़े हैं और क्या पैसों से ज्यादा यही सब हम इन्सानों के लिए बहुमूल्य होते हैं।

क्या आप आराध्या को लेटर्स लिखते हैं ?

जी हाँ लिखता हूँ। अभी वह बहुत छोटी है समय आने पर जरूर पढ़ेगी। आजकल तो वह यह समझने लगी है कि मम्मी-पापा, दादा-दादी सब पोस्टर्स और बड़े एवं छोटे परदे पर आते हैं। पहले काफी अचम्बा हुआ करता उसे कि हम लोग सामने बैठे हुआ करते हैं फिर टेलीविज़न के अंदर कैसे आ जाया करते हैं।

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Mayapuri