INTERVIEW!! ‘‘फिल्म ‘तमाशा’ में एक सामाजिक संदेश है’’ – दीपिका पादुकोण

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आठ साल के अपने करियर में दीपिका पादुकोण ने काफी उतार चढ़ाव देखे हैं पर फिल्म ‘कॉकटेल’ के बाद वह लगातार सफलता की सीढि़यां चढ़ती जा रही हैं। उनकी कई फिल्में सौ करोड़ क्लब का हिस्सा बन चुकी हैं। इन दिनों वह इम्तियाज अली निर्देशित फिल्म ‘तमाशा’ को लेकर चर्चा में है, जिसमें उनके हीरो रणबीर कपूर हैं। 27 नवंबर को फिल्म ‘तमाशा’ रिलीज होगी, जबकि 18 दिसंबर को ‘बाजीराव मस्तानी’ रिलीज होगी, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ हैं।

एक माह के अंतराल में आपकी एक साथ दो फिल्में रिलीज हो रही हैं?

इस बात से एक तरफ मुझे खुशी है, तो दूसरी तरफ नर्वस भी हूं। एक्साइटेड भी हूं। क्योंकि ‘तमाशा’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ यह दोनों ही बहुत बड़ी फिल्में हैं। ‘तमाशा’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ दोनों फिल्में मेरे लिए खास हैं। मैं काफी समय से चाहती थी कि रणबीर कपूर और इम्तियाज अली के साथ कोई फिल्म करुं। ‘तमाशा’ में मुझे यह मौका मिला।

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आप रणबीर कपूर और इम्तियाज अली के साथ दुबारा काम करने के लिए सोच रही थी। इसीलिए ‘तमाशा’ कर ली?

रणबीर कपूर और इम्तियाज अली के साथ काम करने की चाहत तो थी, पर ‘तमाशा’ की जो कहानी है, इस फिल्म में जो सामाजिक संदेश है, उसकी वजह से भी मैंने यह फिल्म की। मेरे माता पिता ने मुझे सिखाया है कि हमेशा दिल की सुनो, वह मैंने सुनी। इसके अलावा फिल्म की कहानी और फिल्म के अंदर जो संदेश है, उससे मैंने खुद को रिलेट किया। फिल्म में तारा या देव की जो कहानी है, उससे मैं रिलेट करती हूं। फिल्म के अंदर मेरे किरदार तारा की जो यात्रा है, वह मेरी निजी जिंदगी की यात्रा से बहुत अलग है। पर पूरी फिल्म का जो एक संदेश है, उससे मैं जरूर रिलेट करती हूं।

‘तमाशा’ से पहले आप इम्तियाज अली और रणबीर कपूर दोनों के साथ काम कर चुकी हैं। तो अब ‘तमाशा’ करते समय इन दोनों में क्या फर्क महसूस किया ?

-मैं सोचती हूं कि इम्तियाज अली में कोई बदलाव नहीं आया है। उनके अंदर आज भी उत्साह है। उन्होंने मुझे जिस तरह से पहली फिल्मों में सीन को समझाया था, उसी तरह ‘तमाशा’ के दौरान भी समझाया। सेट पर उनकी एनर्जी वही थी। जहां तक रणबीर कपूर का सवाल है, तो मुझे लगता है कि वह थोड़ा सा इवॉल्व हुए हैं। कलाकार के तौर पर अब उनके अंदर ज्यादा आत्म विश्वास आ गया है। पहले जब हमने एक साथ ‘बचना ऐ हसीनों’ और ‘यह जवानी है दीवानी’ की थी, तब से अब ‘तमाशा’ के समय मैंने उनके अंदर ज्यादा अनुभव महसूस किया। वह शुरू से ही एक अच्छे कलाकार थे। पर कुछ अच्छी फिल्में करने के बाद उनके अंदर का कलाकार और अधिक विकसित हो चुका है, जिसकी वजह से अब वह खुद अपने विश्वास से लबालब हैं।

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मगर पिछले कुछ सालों के दौरान रणबीर कपूर की लगातार तीन चार फिल्में असफल हुई हैं। तो इसका कुछ असर आपको नजर आ रहा है?

-मुझे तो कोई असर नजर नहीं आ रहा है। मेरा मानना है कि हर इंसान के जीवन व करियर की यात्रा में सफलता असफलता का दौर चलता रहता है। कोई भी क्षेत्र हो और कोई भी इंसान हो, करियर में उतार चढ़ाव तो आते ही हैं। पर जरूरी होता है कि आप अपने अनुभवों से क्या सीखते हैं? और अपने आपको किस तरह आगे ले जाते हैं। रणबीर कपूर इतने बेहतरीन कलाकार हैं, उनके ऊपर दर्शकों का जो विश्वास है, उससे मुझे नहीं लगता कि कुछ असफलताओं का असर हो सकता है। यह बात हर कलाकार के साथ लागू होती है। हर कलाकार की फिल्म सफल या असफल होती रहती हैं।

फिल्म ‘तमाशा’ के किरदार को कैसे परिभाषित करेंगी?

इस फिल्म में मैंने तारा का किरदार निभाया है। जबकि रणबीर कपूर ने वेद का किरदार निभाया है। तारा, वेद की जिंदगी में कैटलिस्ट की तरह है। तारा, वेद को इंस्पायर करती है। वेद की जिंदगी का जो रूटीन हैं, जो बोरिंग चीजें हैं, उन्हें हटाकर वह वेद की जिंदगी में एक नया जोश, नया उत्साह भरती है। फिल्म के अंदर तारा, वेद की जिंदगी में कैटलिस्ट का काम कर उसे आगे बढ़ाती है।

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फिल्म की कहानी को भारत से बाहर क्रोशिका ले जाने की क्या वजह थी?

-यह कहानी का एक हिस्सा है। तारा आर्ची कॉमिक्स की फैन है। वह क्रोशिका देखना चाहती है। वह वहां पर एक कांफ्रेंस के लिए जाती है। पर अचानक वह एक नए माहौल में खुद को जीना चाहती है। पर उसकी वजह आपको फिल्म देखने पर ही पता चलेगी। हम भारत में भी कहीं जा सकते थे, पर क्रोशिका जाना कहानी का एक हिस्सा है।

फिल्म ‘तमाशा’ में सामाजिक संदेश क्या है ?

इस फिल्म का जो संदेश है, वह हर वर्ग, हर आयु के इंसान के लिए है। यदि मैंने ज्यादा बताया, तो फिल्म देखने का मजा किरकिरा हो जाएगा। पर इसमें इस बात को रेखांकित किया गया है कि हर इंसान को अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। अपने दिल की सुननी चाहिए। हम सभी अपनी जिंदगी में मैकेनिकल बन जाते हैं। हम लोग एक रोबोट की तरह सिर्फ समाज के लिए जीने लगते हैं। फिर हम अपनी जिंदगी की पहचान भूल जाते हैं। यह फिल्म हर इंसान को खुद की खोज करने के लिए इंस्पायर करेगी। यह फिल्म संदेश देती है कि आप अपनी जिंदगी जिस तरह से जीना चाहते हैं, उसी तरह से जिएं।

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शाहरूख खान आपको अपने लिए लक्की चार्म मानते हैं। आप क्या सोचती हैं?

-मैं बहुत खुश हूं कि उन्होंने मेरे बारे में ऐसा कहा। खासतौर पर शाहरूख खान को लेकर मैं बहुत ज्यादा पोजेसिव हूं। जब वह मेरे बारे में इस तरह की बातें करते हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। मैं उन्हें अपनी शुभकामनाएं देती हूं। मुझे पता है कि उन्होंने फिल्म ‘दिलवाले’ के लिए बड़ी मेहनत की है। मैं चाहती हूं कि यह फिल्म सफल हो। मैं भी दर्शक की हैसियत से इस फिल्म को देखना चाहूंगी।

शाहरूख खान की ‘दिलवाले’ और आपकी फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ एक ही दिन 18 दिसंबर को रिलीज हो रही है ?

हमें जो करना है, हम कर रहे हैं। उन्हें जो करना है, वह करेंगे। हम दोनों लोग चिंतित नहीं है। पर मीडिया में ही बहुत कुछ कहा जा रहा है कि दो फिल्में क्लैश हो रही हैं।

 

 


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Mayapuri

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