INTERVIEW!! मैंने टेंडर के रूप में कभी किसी एक्टर को स्क्रिप्ट सब्मिट नहीं की – धर्मेश दर्शन

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शर्मीले व कम बोलने वाले निर्देशक धर्मेश दर्शन को ‘रोमांस का राजा’ कहा जाने लगा था जब उन्होंने ‘राजा हिंदुस्तानी’ फिल्म बनाई थी। आठ साल के विश्राम के बाद एक नई फिल्म को डायरेक्ट करने के लिए धर्मेश दर्शन पूरी तरह से तैयार हैं

ज्योति वेंकटेश

आपको बतौर डायरेक्टर काम करने का ख्याल कैसे आया?

मुझे लगता है मैं अपनी मां शीला भट्ट की तरह हूं। मेरी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं थी। मैंने काफी कामचलाऊ ढ़ग से पढ़ाई-लिखाई की थी, मेरी मां जो नानाभाई भट्ट (जिन्होंने 98 फिल्मों डायरेक्ट की थी) की बेटी थी व महेश भट्ट, मुकेशभट्ट (जो दिल से डायरेक्टर है ) की बहन हैं तब भी उन्होंने मेरे स्वर्गीय पिता दर्शन सभरवाल जो एक डिस्ट्रीब्यूटर थे, जिनका फिल्म इंडस्ट्री से कोई नाता नहीं था उनसे शादी की। मेरी माँ को लगता था कि मैं बेहद संवेदनशील हूं और वही चाहती थी कि मैं डायरेक्टर बनूं। उनका सपना था मुझे डायरेक्टर बनाने का। मैंने 24 साल की उम्र में अपनी ‘लूटेरे’ फिल्म डायरेक्ट की थी।

आपने 17 साल के करियर की अवधि में सिर्फ 7 फिल्में डायरेक्ट की है?

फिल्म ‘लुटेरे’ को मैंने डायरेक्ट किया व मेरे बड़े भाई सुनील दर्शन द्वारा इसे निर्मित किया गया। नम्बर-1 डायरेक्टर बनना बहुत ही मुश्किल था। फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ के बाद लगभग छह साल तक लगातार मैं नम्बर-1 डायरेक्टर रहा। हर एक्टर मेरे साथ काम करना चाहता था। मेरी मां की मृत्यृ 2009 में हुई थी तब मैंने फिल्म के लिए जो साइनिंग अमाउंट लिया था वो वापस लौटा दिया व काम ना करने का निर्णय लिया, इसके साथ ही काम से विश्राम लिया।

Dharmesh Darsahn

फिल्म ‘लुटेरे’ बनाने से पहले आपने कभी किसी डायरेक्टर को असिस्ट किया?

मैंने कभी किसी डायरेक्टर को असिस्ट नहीं किया है। उस समय राज कूपर व मनोज जी बहुत ही बड़े डायरेक्टर हुआ करते थे। मेरी मां मनोज कुमार को राखी बांधा करती थी। 80 के दशक में जब मैंने डायरेक्शन के क्षेत्र में रुचि दिखाना शुरु किया तो मनोज जी ने मुझसे पूछा कि तुम डायरेक्टर क्यों बनना चाहते हो। तब मैंने उनसे कहा कि मुझे फिल्म मेकिंग का कोई भी अनुभव नहीं हैं पर मुझे म्यूजिक व स्टोरी टेलिंग का ज्ञान है। सूरज बड़जात्या व आदित्य चोपड़ा मेरे समकालीनों के विपरीत थे क्योंकि उनका परिवार फिल्में बनाता था पर मेरे पिता किसी भी प्रोडक्शन बैकग्राउंड से नहीं थे पर वह एक प्रमुख डिस्ट्रीब्यूटर थे।

जब आपने अपने पिता को यह बताया कि आप फिल्ममेकर बनना चाहते हैं तब आपके पिता की प्रतिक्रिया क्या रही?

मैंने जब अपने पिता को फिल्ममेकिंग के बारे मे बताया तब वह बहुत गुस्सा हुए व उन्होंने यह भी कहा कि दर्शन नाम को मत डूबाओ। मेरे दादाजी दीवान सभरवाल पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री के फाउंडर थे व उन्होंने नाजीर खान व दिलीप कुमार के भाई के साथ पहली पाकिस्तानी फिल्म ‘तेरी याद’ निर्मित की थी।

आपके करियर की पांच सर्वश्रेष्ठ फिल्में कौन-कौन सी रही?

मैंने 17 साल के करियर की अवधि में सिर्फ 7 फिल्में डायरेक्ट की है। मुझे लगता है फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ मेरी बाकी फिल्मों से बेहतरीन है। उसके बाद फिल्म धड़कन व लुटेरे है जो मेरे हिसाब से अच्छी साबित हुई पर मेरी फिल्म ‘मेला ‘बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी।

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पिछले कुछ सालों में किस तरह से फिल्म उद्योग में बदलाव आया है?

जब से मैं इस इंडस्ट्री में आया हूं मैंने लोगों द्वारा काफी कुछ सुना है। मैंने इस इडस्ट्री में यह देखा है कि जो लोग बहुत ज्यादा बोलते है उनका काम कम बोलता है, वही जो लोग कम बोलते उनका काम बहुत कुछ बोलता है। पहले डायरेक्टर कैमरे के पीछे काम करके खुश रहा करते थे व उन्हें दिखावा करना पसंद नही था। बहुत दुख की बात है कि आज के समय में दिग्गजों का मजाक बनाया जाता है। यहां तक कि मीडिया भी ज्यादा समझदार नहीं थी। हमने मौलिकता को खो दिया है क्योंकि हॉलीवुड हमें निगल चुका है।

आप कभी स्टार्स के पीछे नहीं भागते?

मैंने यह देखा है कि एक्टर्स कहते हैं कि हम फिल्म की स्क्रिप्ट तभी सुनेंगे जब डायरेक्टर्स के 50 बार से ज्यादा कॉल आएंगे। मैंने टेंडर के रूप में कभी किसी एक्टर को स्क्रिप्ट सब्मिट नहीं की। हालांकि हिंदी सिनेमा अनिवार्य कामचलाऊ व्यवस्था है पर स्क्रिप्ट भी बेहद महत्वपूर्ण है। आज भी मैं किसी स्टार के पीछे नहीं भागता। मैंने सिनेयुग, बोनी कपूर सहित टॉप के प्रोडक्शन हाउस के साथ काम किया है।

आप उन सितारों से कैसे निपटते हैं जो आपके काम मे हस्तक्षेप करते हैं?

मैं डायलॉग्स में विश्वास रखता हूं। इसके साथ ही मेरा यह भी मानना है कि अंतिम निर्णय निर्देशक का होना चाहिए। फिल्म ‘लूटेरे’ के रिलीज के बाद जब ‘राजा हिंदुस्तानी’ की शूटिंग शुरू हुई थी तब मैंने आमिर खान से पूछा था कि फिल्म के कितने डायरेक्टर्स होते हैं तब आमिर ने मुझे कहा था कि फिल्म का एक ही डायरेक्टर होता है। उन्होंने फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ के डायरेक्शन के साथ बिल्कुल भी छेड़खानी नहीं की। लेकिन इस बारे में चर्चा नहीं करते कि फिल्म ‘मेला’ में क्या हुआ था जिसमे आमिर के भाई फैसल खान भी थे।

Dharmesh Darshan with Aamir Khan
Dharmesh Darshan with Aamir Khan

आप अपने मामा महेश भट्ट से किस हद तक प्रभावित थे?

महेश मामा मुझसे 20 साल बड़े हैं। मैंने उनसे कभी ट्रेनिंग नही ली, मेरी मां उनसे बहुत प्यार करती थी। यह तो मैं कह ही नहीं सकता कि मैं उनसे प्रभावित नहीं हुआ। वह इंडस्ट्री में शुरुआत में लोकप्रिय नहीं हुए थे। मैं महेश मामा से बहुत प्यार करता हूं हालांकि मैं राज कपूर, यश चोपड़ा, गुरु दत्त और रमेश सिप्पी से काफी प्रभावित हुआ। मुझे महेश मामा की फिल्म ‘लहु के दो रंग’ बेहद पसंद है।

आगे आपका क्या प्लान है?

हर कोई मुझसे यही पूछता है, जब मैं अपनी नई फिल्म बनाने का प्लान करता हूं। ‘आप की खातिर’ मेरी आखिरी फिल्म थी। मैं सिर्फ अपने आप को साबित करना चाहता था। पिछले आठ सालों मे मैंने फिल्मों का विरोध किया। जब बात पैसों की आने लगी तब स्थिति असुविधाजनक होने लगी थी। मौसम आते हैं और जाते हैं पर अंत में सिर्फ आपको फिल्में में ही याद किया जाएगा।

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Mayapuri