INTERVIEW!! ‘‘मुझे अच्छा काम करने का अवसर मिल रहा है’’ – गुलशन देवैया

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कई फिल्मों में निगेटिव किरदार निभाने के बाद गत वर्ष प्रदर्शित फिल्म ‘हंटर’ में इरोटिक किरदार निभाकर गुलशन देवैया ने हर किसी को चौंकाया था। अब वह एक बार फिर चौंकाने वाले हैं। इस बार वह दस जून को रिलीज होने वाली पूजा भट्ट निर्मित तथा कौस्तुब नारायण नियोगी निर्देशित फिल्म ‘कैबरे’ में रिचा चड्ढा के साथ पॉजीटिव किरदार में नजर आने वाले हैं।

अब आपको अपना करियर किस दिशा में जाता हुआ नजर आ रहा है ?

इतनी दूर का सोचा नहीं, मैं जहाँ पहुँचा हूँ, उससे खुश हूँ, पर संतुष्ट नहीं हूं मुझे उम्मीद है कि अभी मैं बहुत आगे जाऊंगा क्योंकि मुझे अच्छा काम करने का अवसर मिल रहा है। उम्मीद है कि इस तरह का अच्छा काम मिलता रहेगा और एक दिन उस मुकाम पर पहुंच जाऊंगा, जहाँ अपने नाम का खा सकूँगा अभी तो अपने काम व मेहनत का खा रहा हूं पर वह मुकाम मिल जाएगा। फिलहाल मेरा सारा ध्यान ‘कैबरे’ पर लगा हुआ है।

फिल्म ‘कैबरे’ किस तरह की फिल्म है ?

कैबरे एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म है जिसमें रिचा चड्ढा एक डाँसर हैं। रिचा की जिंदगी कुछ ऐसी है कि वह मौत से भाग रही है। मैं गौरव ग्रेवाल नामक एक पत्रकार के किरदार में हूँ, जो कि होनहार खोजी पत्रकार था अब शराबी हो गया है। जिंदगी में किसी बात में रूचि नहीं रही तो वह भी मौत की तरफ भाग रहा है इसी दौरान इन दोनों की मुलाकात हो जाती है तो दो बिखरे हुए लोग मिलते हैं। दोनों को अहसास होता है कि वह दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं। इस पत्रकार को उससे प्यार हो जाता है फिर उनकी जिंदगी एक नए मोड़ की तरफ बढ़ती है इस डाँसर की जिंदगी के रहस्य को तोड़ने का काम मेरा किरदार करता है।

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फिल्म का नाम ‘कैबरे’ क्यों ?

रिचा एक डाँसर है और वह जिस शो को लेकर चलती है, उस शो का नाम ‘कैबरे’ है। यह फिल्म कैबरे नृत्य पर आधारित नहीं है यह फिल्म टीनएजर फिल्म है, जिसमें संगीत, नृत्य और प्यार के साथ रहस्य व रोमांच का भी संगम है कहानी रिचा के नजरिए से कही गयी है।

रिचा चड्ढा के साथ यह आपकी दूसरी फिल्म है क्या फर्क महसूस किया ?

इस फिल्म में उन्होंने बहुत ही अलग तरह का काम किया है उनकी परफार्मेंस बहुत ही जबरदस्त है। वह अपनी देहाती ईमेज को तोड़ना चाहती थीं। इसमें काफी ग्लैमरस किरदार हैं नृत्य भी किया है, उन्होंने काफी मेहनत की है उन्होंने इतना नैचुरल डाँस किया है कि लोगों को लगेगा ही नहीं कि उन्होंने इस डाँस के लिए मेहनत की होगी। ‘रामलीला’ में वह मेरी भाभी बनी थी जबकि इस फिल्म में वह मेरी प्रेमिका हैं और दोनों ही फिल्मों में उनके किरदार व उनकी परफार्मेंस में जबरदस्त अंतर है हम दोनों चाहते थे कि हम एक साथ एक पूरी फिल्म करें, तो वह मौका हमें फिल्म ‘कैबरे’ में मिल गया। हर कलाकार बेहतरीन अभिनेत्री के साथ काम करने की इच्छा रखता है। ‘रामलीला’ के मुकाबले कहीं ज्यादा ग्लैमरस किरदार ‘कैबरे’ में रिचा ने निभाया है। इस फिल्म की वह हीरोइन हैं फिल्म ‘कैबरे’ नायिका प्रधान फिल्म है। ‘रामलीला’ के दौरान हमारी दोस्ती हो गयी थी।

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इन दिनों जब एक फिल्म रिलीज होने वाली होती है, तो उस फिल्म को लेकर कई बड़े कलाकार ट्विटर पर कुछ न कुछ अच्छा लिखते हैं इससे फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर फायदा होता है ?

सच कहूं तो शायद होता होगा, शायद नहीं होता होगा। मुझे इसकी ज्यादा समझ नही है कई कलाकार सोशल मीडिया पर सदैव लगे रहते हैं, तो वहीं रणबीर कपूर जैसे कई कलाकार सोशल मीडिया से दूर हैं। मुझे लगता है कि यह हर कलाकार के अपने व्यक्तित्व और उनका अपने फैन के साथ जुड़ने की कला पर निर्भर करता है। कई कलाकार अपने प्रशंसको के साथ सोशल नेटवर्किंग साइट पर बात करते हैं, यह अच्छा भी हो सकता है और गलत भी हो सकता है।

आप खुद सोशल मीडिया पर कितना व्यस्त हैं ?

बहुत कम कभी कभार अपने प्रशंसकों के साथ बातचीत कर लेता हूं यदि किसी फिल्म को लेकर प्रचार करने लायक कुछ है, तो वह भी करता हूं, जिससे दर्शकों के बीच अवेयरनेस पैदा हो। सोशल मीडिया पर फालतू की बातें लिखना मेरी आदत का हिस्सा नहीं है।

किस तरह के किरदार करना चाहते हैं ?

ऐसा कुछ सोचा नहीं है जो ऑफर मिलेगा, उसमें से जो अच्छा लगेगा, वह करूंगा। मेरे दिल ने गवाही दी, तो मैं सैलपस्टिक कॉमेडी भी कर सकता हूं। दिल ने गवाही दी तो द ग्रेट हॉरर फिल्म भी करूंगा। वैसे मैं पागल का किरदार भी निभाना चाहता हूं अभी मैंने कोंकणा सेन शर्मा के निर्देशन में फिल्म ‘ए डेथ इन द गंज’ की शूटिंग पूरी की है और बच्चों की फिल्म ‘पिक्चर’ की शूटिंग करने वाला हूँ।

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फिल्म ‘ए डेथ इन द गंज’ क्या है?

फिल्म की कहानी क्रिसमस 1978  से एक जनवरी 1979 के बीच की है यह पारिवारिक फिल्म है। एक परिवार कोलकाता से झारखंड के गंज शहर में आता है और वहां क्या होता है, उसकी कथा है।

फिल्म ‘ए डेथ इन द गंज’ की निर्देशक कोंकणा सेन शर्मा को लेकर क्या कहेंगे ?

वह अनुभवी व राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अदाकारा हैं, जिन्होंने इस फिल्म से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा है। इस फिल्म में अभिनय करने से पहले मैं उनसे कई बार मिला था, पर बहुत अच्छी तरह से उन्हें नहीं जानता था लेकिन इस फिल्म में उनके निर्देशन में काम करते हुए मुझे उनकी कई खूबियां पता चली। एक कलाकार होने की वजह से वह इस बात को ज्यादा बेहतर समझती हैं कि एक कलाकार किसी सीन को करते समय किस ढंग से सोचता है।

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आपने अपना करियर थिएटर से शुरू किया था क्या अब थिएटर को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया ?

समय मिला तो थिएटर करता रहूंगा पर मेरी पहली प्राथमिकता फिल्में हैं। फिल्में करते हुए मैं ज्यादा इंज्वॉय करता हूं बचपन से ही मेरी ख्वाहिश रही है कि मैं फिल्में करूं लेकिन मैं यह कभी नहीं भूल सकता कि मैं थिएटर से हूं।

चर्चाएं है कि आप निर्देशन में भी कदम रखने जा रहे हैं ?

मैंने एक फिल्म की कहानी पर काम किया है जिसे निर्देशित करने की इच्छा है पर अभी कुछ तय नहीं है।


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Mayapuri

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