INTERVIEW!! ‘‘फिल्म ‘हीरो’ निर्देशक नहीं, निर्माता की फिल्म है.’’ निखिल आडवाणी निर्देशक – फिल्म ‘हीरो’

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‘‘कल हो ना हो’’, ‘‘सलाम ए इश्क’’, ‘‘चांदनी चौक टू चाइना’’, ‘‘डी डे’’, ‘‘पटियाला हाउस’’ जैसी फिल्मों के सर्जक निखिल आडवाणी अब 1983 की सुभाष घई निर्देशित क्लासिक फिल्म ‘‘हीरो’’ का रीमेक लेकर आ रहे हैं, जिससे सूरज पंचोली और आथिया शेट्टी अपने करियर की शुरूआत कर रहे हैं।

2003 से करियर शुरू किया था धीमी गति से चल रहे थे, 11 साल में सिर्फ सात फिल्में की, पर अचानक एक साल के अंदर तीन फिल्में?

इससे अधिक तेज गति से किसी ने काम नहीं किया। करण जौहर ने 13 साल में 5 फिल्में बनायी। राज कुमार हिरानी ने चार फिल्में बनायी, जहां तक मेरा एक साल में तीन फिल्म बनाने का है, तो इसका जवाब सिर्फ इतना है कि मौका मिल गया, तो बना दी। मैंने ऐसी कोई योजना नही बनायी थी कि एक साल में मुझे तीन फिल्में या दो फिल्में रिलीज करनी है। मैं ‘हीरो’ बना रहा था, ‘कट्टी बट्टी’ की स्क्रिप्ट मेरे पास आ चुकी थी। मेरी योजना थी कि ‘हीरो’ के बाद ‘कट्टी बट्टी’ शुरू करुंगा, पर ‘हीरो’ को हम लोगों ने कुछ डिले कर दिया, क्योंकि हमें लगा कि सलमान खान के प्रोडक्शन की पहली फिल्म ‘‘बजरंगी भाईजान’’ होनी चाहिए, क्योंकि ‘बजरंगी भाईजान’ बडे़ बजट की फिल्म है। इसमें खुद सलमान खान हैं, यदि ‘बजरंगी भाईजान’ की सफलता के बाद हम ‘हीरो’ रिलीज करेंग, तो इसका फायदा ‘हीरो’ को मिलेगा, अन्यथा ‘हीरो’ पहले जुलाई माह में रिलीज होने वाली थी। अब 11 सितंबर को ‘हीरो’ और 18 सितंबर को ‘कट्टी बट्टी’ रिलीज होगी।

आपने ‘हीरो’ का रीमेक करने की बात क्यों सोची ?

यह मेरा अपना निर्णय नहीं रहा, सलमान खान की तरफ से मुझे ऑफर मिला। सबसे पहले सलमान खान ने सुभाष घई को फोन करके कहा कि वह हीरो का रीमेक करना चाहते हैं, फिर उन्होंने सूरज पंचोली को फोन करके कहा कि वह उनकी फिल्म का हीरो है। फिर उन्होंने अथिया शेट्टी को फोन करके कहा कि वह उनकी फिल्म ‘हीरो’ की राधा है, जिसके बाद सलमान खान ने मुझे फोन करके कहा कि मुझे इस फिल्म का निर्देशन करना है। ‘हीरो’ का रीमेक करने का निर्णय पूरी तरह से सलमान खान का है। सलमान खान ने मुझसे जो कहा, मैंने वह किया, फिल्म ‘हीरो’ का निर्देशन मैंने किया है, पर यह पूरी तरह से सलमान खान की अपनी फिल्म है। मैं साफ कह रहा हूं कि यह निर्देशक नहीं, बल्कि पूरी तरह से निर्माता की फिल्म है। मुझसे सलमान खान ने कहा-‘‘जिस तरह से पहली फिल्म में मुझे लांच किया था, उसी तरह से अब फिल्म ‘हीरो’ में सूरज और अथिया को लांच करना है। जिस तरह से मेरे लिए फिल्म बनायी थी, उसी तरह से सूरज और अथिया के लिए फिल्म बनाओ। हीरो में कुछ नयापन नही है, ‘हीरो’,‘दिलवाले’, ‘मैंने प्यार किया’, ‘बॉबी’ यह सब फिल्में एक ही हैं, मैंने बहुत सोचा कि मैंने कई फिल्में बनायी हैं। मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है, पर मैं जितना बदलाव करने की कोशिश करता था, घूम फिर कर वहीं आ जाता था। एक दिन सलीम खान ने फोन करके पूछा कि, ‘कैसा चल रहा है?’ मैंने उनसे कहा कि मैं एक जगह फंस गया हूं, मैंने उनसे कहा कि मैं कुछ बदलाव की कोशिश कर रहा हूं, पर हो नहीं रहा है, तो सलीम खान ने कहा कि,‘‘तुम सोच क्यों रहे हो? तुझे क्या लगता है कि तू जो बात सोच रहा है, वह बात सुभाष घई ने नहीं सोची होगी। आज तू जो अपने दिल के साथ कर रहा है, वही सुभाष घई ने भी किया होगा, तभी वह ‘हीरो’ जैसी क्लासिक बना सके इसलिए तू फिल्म को बदलने की बजाय बनाने की सोच’’ उसके बाद मैंने इस फिल्म में कोई बदलाव नही किया।

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यानि कि सुभाष घई की ‘हीरो’ और आपकी ‘हीरो’ में कोई फर्क नहीं है ?

फिल्म वही है बदलाव यह है कि हमारी फिल्म आज की फिल्म है, समसामायिक है। इसमें आज का संगीत है, 83 की राधा अब 2015 की राधा है, वह मॉडर्न है. उसके पास मोबाइल फोन है।

कभी आपने भी सुभाष घई निर्देशित फिल्म ‘हीरो’ देखी होगी, उस वक्त आपको क्या पसंद आया था?

मुझे सब कुछ पसंद आया था उसकी कहानी, किरदार, टेकिंग सब पसंद आया था। जैकी श्रॉफ का किरदार जबरदस्त था।

सुभाष घई निर्देशित फिल्म ‘हीरो’ देख चुके लोग आपके द्वारा बनायी गयी ‘हीरो’ के साथ तुलना तो करेंगे?

हमने नयी पीढ़ी के लिए फिल्म बनायी है, मैं लोगों से कहना चाहूंगा कि मेरी फिल्म की तुलना पुरानी फिल्म से ना करें। आप इसे सूरज पंचोली और अथिया शेट्टी की पहली फिल्म के रूप में देखें, इन दोनों कलाकारों की लांच वाली यह फिल्म है। हर फिल्मकार की कमी यह है कि वह हमेशा नोस्टॉल्जिया में जीने लगता है, जो फिल्मकार सोचता है कि अरे उसने आरडी बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार से गवाया था। यह सोच ही गलत है, आज की पीढ़ी किशोर कुमार को नहीं,हनी सिंह को जानती है, अरजीत सिंह को जानती है। आज की पीढ़ी जैकी श्रॉफ की बजाए टाइगर श्रॉफ को जानती है। नोस्टाल्जिया कुत्ती चीज होती है. मैंने फिल्म बनायी, क्योंकि मुझे कहानी पसंद आयी. मुझे लगा कि इस फिल्म में सूरज और अथिया अच्छा अभिनय कर सकेंगे। मैंने सुभाष घई की फिल्म का ढांचा लेकर एक नयी फिल्म बनायी है, मैं मूल फिल्म से बेहतर फिल्म नहीं बना सकता, उस क्लासिक फिल्म से बेहतर मैं काम कर सकता हूं, यह मैं सोचता भी नही हूं।

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निर्देशक के दृष्टिकोण से सूरज व अथिया किस तरह के कलाकार हैं?

दोनों में कॉन्फिडेंस है, दोनों के अंदर सीखने की भावना है, वह निर्देशक से कहते हैं कि उनसे और अधिक चुनौती पूर्ण काम करवाएं। उनके अंदर आज की पीढ़ी की ही तरह चुनौतीपूर्ण काम करने का जज्बा और कुछ सीखने की भूख है। दोनों एक दूसरे की कमजोरियों पर परदा डालते हुए मदद करते हैं, पर फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले दोनों ने नृत्य, मार्शल आर्ट व एक्शन में वर्कशॉप किया था, उन्हें जो कुछ दिया जाना चाहिए था, सलमान खान ने सब कुछ दिया है।

स्थापित कलाकारों की बनिस्बत इन दो नए कलाकारों के साथ काम करना आपके लिए ज्यादा सहज रहा ?

सहज नहीं अलग रहा, यहां निर्देशक के तौर पर मुझ पर जिम्मेदारी थी कि जो दो नए कलाकार अपने करियर की शुरूआत कर रहे हैं, उन्हें सही दिशा दी जाए। फिल्म देखकर लोगों को इस बात का अहसास नहीं होगा कि इन दोनों कलाकारों की यह पहली फिल्म है, लेकिन सूरज और शाहरूख खान दोनों के साथ काम करने का अंतर तो है, मेरी राय में यह बॉलीवुड के भविष्य है।

आज की पीढ़ी में कान्फिडेंस की वजह यह है कि वह पूरी तैयारी के साथ बॉलीवुड में कदम रखते हैं ?

जी हां! देखिए फिल्मों में अभिनय करने के लिए तमाम लोग तैयारी करते हैं, पर बहुत से लोगों को मौका नहीं मिलता है, कुछ बनने के लिए तीन चीजें जरूरी होती ह, पहली ट्रेनिंग, दूसरा कुछ कर दिखाने की इच्छा शक्ति और तीसरा लक। आप इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि सूरज पंचोली, आदित्य पंचोली के बेटे हैं। अथिया शेट्टी, सुनील शेट्टी की बेटी हैं, तो इन्हें मौका मिल गया, जबकि देश के 50 हजार लोग कुछ बनने आते हैं और उन्हें मौका नहीं मिलता। इन दो कलाकारों को सलमान खान के सामने खड़े रहने का मौका मिला, और सलमान खान को लगा इनमें कुछ जज्बा हैं।

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‘हीरो’ के संगीत में आपने क्या बदलाव किए हैं?

पूरा संगीत बदला है, मैं लोगों को याद नही दिलाना चाहता था कि यह किसी फिल्म का रीमेक है। मैंने पहले ही कहा कि मैंने नयी पीढ़ी के लिए नयी फिल्म बनायी है, जिन्हें पे्रम कहानी देखनी है, उनके लिए यह फिल्म बनायी है, इसलिए इसमें बांसुरी की धुन मैंने नहीं रखी।

आपकी फिल्म ‘हीरो’ की यूएसपी क्या है?

लंबे समय बाद आपको प्रेम कहानी के जॉनर में एक संजीदा फिल्म देखने को मिलेगी इसमें इमोषन है जज्बा है संगीत बहुत अच्छा है। यह पूरी तरह से पारिवारिक मनोरंजक फिल्म है।

‘हीरो’ और ‘कट्टी बट्टी’ में क्या फर्क है?

‘हीरो’ निर्माता की फिल्म है, ‘कट्टी बट्टी’ एक ऐसी प्रेम कहानी है, जिसकी कहानी वहां शुरू होती है, जहां दूसरी प्रेम कहानियां खत्म होती है। फिल्म ‘कट्टी बट्टी’ उन दो लोगों की कहानी है, जो एक दूसरे से इस कदर प्यार करते हैं कि एक दूसरे के बगैर रह नहीं सकते।

आपने ‘एयर लिफ्ट’ का सिर्फ निर्माण किया है, निर्देषन नहीं. ऐसा क्यों?

यह उसी की फिल्म है, उसी की कहानी है मुझे कहानी पसंद आयी. मुझे लगा कि फिल्म बननी चाहिए।

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Mayapuri