INTERVIEW!! “फिलहाल मैं सिंगल हूं और अपने करियर पर ध्यान दे रही हूं।” अथिया शेटी

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अथिया शेट्टी अपनी पहली फिल्म, “हीरो” से अपने पैर मजबूती से फिल्मी दुनिया  में ज़माने के लिए आ रही हैं। अथिया का बचपन भले ही फिल्मी माहौल से होकर ना  गुजरा हो पर वह हमारे चहिते, “अन्ना” [सुनील शेटी] की इकलौती बिटिया हैं। एक बहुत ही संस्कारिक माहौल में अथिया का पालन पोषण हुआ है, जहां उन्होंने अपनी माँ को  अपने सास -ससुर  की सेवा करते देखा है और अपने पापा को भी माता-  पिता की सेवा में रत देखा है सो वह एक संस्कारी लड़की है।  अब फिल्मी दुनिया ही उनके लिए सही जगह है ऐसा अथिया का मानना है क्योंकि  ज्यों हीं  उन्होंने होश संभाला  तब से ही उनका एक सपना  रहा है- फिल्मी दुनिया का हिस्सा बनने का

एक खास मुलाकात में हमारी संवाददाता लिपिका वर्मा के साथ अनूठी बातें की अथिया ने –

फिल्म, “हीरो “से आप फिल्मों में कदम रख रही हो क्या कहना चाहेंगी  अपने किरदार के बारे में?

दरअसल मेरा रील किरदार कुछ मुझ से मिलता जुलता है और कुछ नहीं। यह एक ऐसी लड़की है जो कुछ भी हासिल करने में पीछे  नहीं हटती है। जो भी काम अपने हाथ में लेती है उसकी और उसका ध्यान केंद्रित ही रहता है। यह लड़की काफी आधुनिक  विचारों की भी है। यह नृत्य में रूचि रखती है.. यह जो कुछ भी करती है अपने दिल से ही करती है। यह आज की लड़की है।

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अथिया रियल में कैसी लड़की हैं ?

मैं एक होश में रहने वाली लड़की हूं। बचपन से चेतना में रहना सीखा है मैंने। मुझे हमेशा बहुत ही अच्छे परसेंटेज मिला करते और यदि थोड़े कम अंक मिलते तो मैं बहुत दुखी हो जाती। मुझे शुरू से मेहनत करने की आदत है और मुझे सफल होना अच्छा लगता है। मैं कुछ करने से पहले अपना गोल सेट कर लेती हूं और फिर उसके बाद मैं पीछे मुड़ कर नहीं  देखती हूं  और वह गोल हासिल करने के लिए मुझे कोई भी विचलित नहीं कर सकता है। मैं अपनी तारीफ को गंभीरता  से नहीं लेती हूं। अपनी आलोचना से अपने आप में कुछ बदलाव  की कोशिश  जरूर करती हूं।

अपनी माँ के और अपने पिता जी के कौन कौन से गुण आप में है ? 

मुझे ऐसा लगता है कि मेरे अंदर दोनों के गुण समाये  है। मैं अपने पिताजी जैसी फिक्रमंद हूं कभी कभी जब कुछ चीज़ मन मुताबिक नहीं होती है तो मेरे  अंदर बहुत तनाव पैदा हो जाता है। अक्सर मुझे तनाव में देख कर मेरे पापा मुझे समझाने  आते है तब मैं उन्हें यही  कहती हूं कि यह गुण तो मुझे आप से ही विरासत में मिला है सो आप मुझे  कुछ नहीं बोल सकते हैं। मेरी माँ को मैंने अपने सास ससुर और माँ बाप की सेवा करते भी देखा है सो यह गुण मेरे अंदर है और वह कुकिंग बहुत अच्छी कर लेती है और मुझे कुछ कुछ  खाना बनाना भी आता  है, मेरे डैड भी अपने माता पिता का बहुत ख्याल रखते हैं। हमें अपनों से बड़ो का आदर करना भी सिखाया गया है। मैं अपने डैड के बहुत ही करीब हूं।

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अपनी बचपन की कोई यादें हमसे शेयर करना चाहोगी ?

नैतिक मूल्य हमारे अंदर कूट कूट के भरे  गए हैं। हम एक संयुक्त परिवार से बिलोंग करते हैं, जहां हम अपने दादा दादी के साथ रह रहे हैं। जब मैं छोटी हुआ करती तो मैं  अपने माता पिता एवं दादा दादी के बीच में ही पलंग  पर सोया करती। मेरा अपने माँ -बाप और दादा दादी के साथ अलग समीकरण है। मेरी दादी बहुत ही अच्छी है किन्तु जब ममी हमे डॉँट रही हो तो उन्हें उस समय कुछ नहीं बोलती लेकिन कुछ चीज़े  जब हमे करने देती, जैसे टेलीविजन हम उनके साथ समय बेसमय देखा करते तब वह सीधे सीधे माँ को कह देती-,”अरे भाई मैं  इनकी दादी हूं  तो मुझे इनको थोड़ा सा बिगाड़ने का अधिकार तो है ही। किन्तु मेरी दादी  भी कड़क अनुशासन पेश करती है और हम कभी कोई गलती करें तो बख्शती भी नहीं थीं।  ”

आपके दादाजी  से आपका बहुत प्यार है कुछ बतायें ?

जी हाँ मै  अपने दादाजी के बहुत करीब हूं। जब मेरी फिल्म, “हीरो” फ्लोर्स पर जा रही थी तब मेरे दादाजी लगवा ग्रस्त हो गये। उन्हें  दिन में एक बारी  कमरे से बाहर निकाल  कर घुमाया  जाता है। जब मैं घर पर रहती हूं तो, मैं  उनके ही पास रहती हूं, मैंने जब पहली बारी अपनी फिल्म हीरो की फोटो उन्हें दिखलायी  तो उन्होंने उसे चुम लिया और उनके आँखों में आंसूं आ गये. मैं अपनी हर चीज उन्हें सब से पहले दिखलाती  हूं।  जब हमारी फिल्म हीरो के गाने का पहला  वीडियो रिलीज़ हुआ तो उन्हें- वह भी मैंने दिखाया। वह बहुत खुश हुए और मुझे ढेर सारा प्यार भी किया। उन्हें मुझ पर गर्व भी होता है और ख़ुशी भी मिलती है अपनी पोती के काम को  देख कर, ऐसा वह मुझे इशारो में बताने की कोशिश  करते हैं।

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सूरज के साथ काम कर रही हैं क्या कहना है उनके बारे में?

सूरज और मैं बचपन के दोस्त हैं। किन्तु अब फिल्म, “हीरो” करने के बाद  मैं सूरज के काफी नजदीक आ गयी हूं। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन चुके हैं। अक्सर लोगों को ऐसा लगता  है जब एक लड़का और लड़की साथ काम कर रहे हों तो उनके बीच रोमांस हो जाता है। किन्तु मेरे और सूरज के बीच ऐसा नहीं हुआ है।  हाँ सूरज मेरा बेस्ट फ्रेंड बन गया है। हम एक दूसरे के साथ सब कुछ शेयर करते है। सूरज बहुत ही सीधा एवं सिंपल लड़का है। कई  मर्तबा मैं उसे समझाती  भी हूं की इतने अच्छे भी मत बनो, कभी कभी तो गुस्सा करा करो। मैंने सूरज से उसके केस के बारे में कभी कोई प्रश्न नहीं पूछा है। वह एक शर्मीला लड़का है सो जब सेट पर हम दोनों पहली बारी मिले मैंने ही उसे नार्मल किया था।

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तो क्या आपने कभी “पप्पी लव”चखा है

मुझे मेरा काम पसंद है। और कुछ बनने की लालसा है। फ़िलहाल बॉय फ्रैंड्स के लिए मेरे पास समय नहीं है। जीवन में बहुत कुछ करना है अभी मुझे। किसी  भी रिश्ते  का अपना  एक महत्व होता है फिर चाहे वह माता पिता, दादा दादी, भाई बहन और रोमांटिक रिश्ता ही क्यों ना हो। सच्चाई  की बुनियाद पर जो भी रिश्ता खड़ा हो वह बहुत लम्बा जाता है फ़िलहाल मै  सिंगल हू और अपने करियर पर ध्यान दे रही हूं।

 

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Mayapuri