INTERVIEW!!! ‘‘मुझे तो हर तरह के किरदार निभाना अच्छा लगता है.’’ – जिम्मी शेरगिल

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फिल्म ‘‘माचिस’’ से लेकर अब तक जिम्मी शेरगिल ने एक लंबी यात्रा तय की। वह सदैव विविधतापूर्ण किरदार निभाते रहे हैं। उन्होंने पंजाबी फिल्मों का न सिर्फ निर्माण किया, बल्कि पंजाबी फिल्मों में अभिनय भी किया। इन दिनों वह आनंद एल राय निर्देशित फिल्म ‘‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’’ को लेकर चर्चा में हैं। जो कि पांच साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’’ का सिक्वल है।

जब आपने ‘‘तनु वेड्स मनु’’ की थी, तब क्या आपको पता था कि इसका सिक्वल बनेगा?

जी नहीं! लेखक के दिमाग में कहानी को लेकर एक आइडिया तो होती ही है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक दो बार लेखक हिमांशु ने कहा भी था कि उनके पास आगे की भी कहानी है। मगर निर्देशक आनंद राय का मानना था कि वह कुछ अलग करना चाहेंगे। जब फिल्म हिट हो गयी, तो सभी को लगा कि इसके आगे की कहानी बनायी जानी चाहिए। पर निर्देशक आनंद एल राय तब तक ‘रांझणा’ पर काफी काम कर चुके थे, इसलिए पहले उन्होंने ‘राझणा’ बनायी। उसके बाद अब वह सिक्वल लेकर आए हैं।

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‘‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’’ के आपके किरदार में क्या बदलाव नजर आएगा?

यह फिल्म ‘‘तनु वेड्स मनु’’ का सिक्वल है। इसमें भी वही राजा का ही मेरा किरदार है। पर पांच साल के समय का जो अंतराल है,वह राजा की उम्र और उसकी परिपक्वता में नजर आएगा। फिल्म के निर्देशक आनंद एल राय की सोच यह रही है कि पांच साल के अंतराल में जब कोई किरदार दोबारा किसी फिल्म में आ रहा है, तो उसमें कितनी मैच्योरिटी आयी है, उसे दिखाया जाए। इस तरह राजा के बोलने के लहजे और सोच में पहले की अपेक्षा अंतर नजर आएगा। मेरे अनुसार इस बार इमोशन और ड्रामा में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। मैं इस फिल्म को लेकर बहुत उत्साहित हूं।

‘‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’’ में तो कंगना की दोहरी भूमिका भी है। ऐसे में आपका राजा का किरदार कितना महत्वपूर्ण रह जाता है?
-राजा का किरदार महत्वपूर्ण है। राजा अवस्थी तो राजा अवस्थी ही है। पांच साल में मैच्योर भी हो गया है.मैं बहुत ज्यादा विस्तार में कुछ कह नहीं सकता। लेकिन फिल्म देखते समय आपको राजा का किरदार बहुत पसंद आएगा। राजा का एक अलग पक्ष है, जो कि आपको इस फिल्म में नजर आएगा। पर उसके अंदर पहले जैसा तेज आज भी है। उसका एटीट्यूड नहीं बदला है।

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क्या वजह है कि आप बहुत कम फिल्में करते हैं?
मैं कम तो नही कहूंगा, पर हां चुनिंदा फिल्में करता हूं। मेरी आदत है कि मैं जिस फिल्म के साथ जुड़ता हूं, पूरे मन के साथ जुड़ता हूं। उस फिल्म की शूटिंग खत्म होने तक उसी में मगन रहता हूं। मैं अपने लुक वगैरह को भी बार बार बदलना पसंद नहीं करता। जब मैं फिल्म ‘बुलेट राजा’ कर रहा था, तो यह फिल्म छह माह में पूरी हुई। इस फिल्म के किरदार के लुक के अनुसार मैंने बाल वगैरह भी बढ़ा लिए थे। अब उस वक्त मैंने जो फिल्में साइन की थी, उनमें पुलिस इंस्पेक्टर के किरदार थे, जिन्हें लंबे बाल के साथ तो निभा नहीं सकता था। इसलिए वह फिल्में छोड़नी भी पड़ी। मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने आपको व्यस्त रखूं। हमेशा किसी न किसी फिल्म के साथ जुड़ा रहना मुझे अच्छा लगता है। पर मुझे दोहराव पसंद नही। मैं बार बार एक ही तरह के किरदार निभाने में यकीन नहीं करता। इस वजह से भी मैं कुछ फिल्में छोड़ देता हूं। पर जब कोई फिल्म ऐसी आती है, जिसकी कहानी सुनकर लगता है कि इसे करना चुनौती होगी, तो मैं जरूर करता हूं।

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आप पंजाबी फिल्मों के स्टार बने हुए हैं। इसलिए हिंदी फिल्में कम कर रहे हैं?

ऐसा कुछ नहीं है। हिंदी फिल्मों में एक अलग सा दौर आया हुआ ह। लोग अलग अलग तरह की फिल्में नए नए लोगों को लेकर बना रहे है। अब यदि आप अनजान चेहरों को लेकर एक अच्छी हिंदी फिल्म बनाते हैं, तो वह भी चल जाती है। कई नए निर्देशक आ रहे हैं, जो कि बेहतरीन विषयों पर फिल्में बना रहें हैं और वह फिल्में अपनी एक छाप छोड़ रही हैं। ऐसे में मैं हिंदी फिल्मों में जिस तरह के किरदार निभा रहा हूं, उन्हें निभाते हुए इंज्वाॅय कर रहा हूं। सच कहूं तो ‘साहब बीवी और गैंगस्टर’ के बाद से मुझे हिंदी फिल्मों में भी रोचक काम करने के ही मौके मिल रहे हैं। मगर जैसा कि मैने पहले ही कहा कि मैं एक समय में एक ही फिल्म से जुड़ता हॅंू। मैं पंजाबी में भी बहुत ज्यादा फिल्में नहीं कर रहा। पर मैं पंजाबी फिल्मों में उस तरह की फिल्में कर रहा हूं,जो कि हिंदी में नहीं बन सकती.मसलन-अब मैने पंजाबी में नवनीत सिंह निर्देशित फिल्म ‘‘शरीक’’ की है, जो कि दो परिवारों के बीच की दुश्मनी पर है।

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क्या ‘‘शरीक’’ एक एक्शन फिल्म है?

जी नहीं! यह एक भावनात्मक फिल्म है। इसकी कहानी 1994 से शुरू होकर 2006 तक जाती है। इसमें मैंने 25 साल के नवयुवक से लेकर 65 साल के बुजुर्ग तक का किरदार निभाया है। तो आप खुद अंदाजा लगा लीजिए कि एक कलाकार के तौर पर मुझे कितना रेंज मिला होगा।पहली बार मुझे पंजाबी फिल्म में इतना रोचक किरदार निभाने का मौका मिला है।

पंजाबी फिल्म ‘शरीक’ से लोग कितना रिलेट करेंगे?

यह एक ऐसी फिल्म है, जिसके साथ हर कोई रिलेट करेगा। कम से कम पंजाब में तो पारिवारिक दुश्मनी बहुत होती है। जमीन जायदाद को लेकर भाई भाई के बीच झगड़े होते हैं। बचपन में जिसने आपको अपनी गोद में खिलाया होता है, एक मुकाम पर आप उसी की हत्या कर देते है। वैसे इस तरह के झगडे़ पूरे देश में होते हैं, पर पंजाब और हरियाणा में कुछ ज्यादा ही होते हैं।

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पंजाबी फिल्मों का मार्केट बड़ी तेजी से बढ़ा है?

जी हाॅ! पंजाबी फिल्मे पूरे विश्व में रिलीज होती है। इसका बहुत बड़ा माॅर्केट है। नार्थ अमरीका, जापान, इंग्लैंड व कई यूरोपीय देशों में भी पंजाबी फिल्में रिलीज होती हैं। भारत में पंजाब और हरियाणा तो इसका गढ़ है।

किस तरह के किरदार निभाने आपको अच्छे लगते हैं?

मुझे तो हर तरह के किरदार निभाना अच्छा लगता है। वास्तव में यह इस बात पर निर्भर करता है कि किरदार किस तरह से लिखा गया है और निर्देशक उस किरदार को किस तरह से पेश करना चाहता है.यदि टिपिकल निगेटिव किरदार हो तो काम करने में मजा नहीं आता.पर नगेटिव किरदार में यदि हम उसके लुक एटीट्यूड आदि पर काम करें, तो वह रोचक भी हो सकता है।मैं कई ऐसी फिल्में कर रहा हूं,जिसमें मेरा निगेटिव किरदार अंत तक बहुत पाॅवरफुल नजर आएगा।

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आपके लिए सफलता असफलता क्या मायने रखती हैं?
-निजी स्तर पर कहूं तो जब हम किसी फिल्म पर काफी मेहनत करते हैं और वह फिल्म नहीं चलती है, तो काफी बुरा लगता है। जबकि मैं हमेशा पूरी इमानदारी और मेहनत के साथ काम करता हूं।

आपकी आने वाली फिल्में कौन सी हैं?

मैंने निशिकांत कामत के साथ एक फिल्म ‘‘मदारी’’ की है,यह बहुत रोचक फिल्म है। निशिकांत कामत के साथ काम करके मैं उनसे बहुत प्रभावित हुआ हूं। उनके काम करने का तरीका मुझे बहुत पसंद आया। इसके बाद जुलाई माह में मेरी एक पंजाबी फिल्म ‘‘शरीक’’ रिलीज होगी।
-शान्तिस्वरुप त्रिपाठी


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