INTERVIEW: ‘‘अब तो मैं भी कह देती हूं कि मुझे उसी वक्त सेट पर बुलायें जब हीरो आ जाये’’ – इलियाना डीक्रूज

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दो हजार छह में साउथ में तेलगू फिल्म देवदासू से अपना फिल्मी करियर शुरू करने वाली अभिनेत्री इलियाना डीक्रूज ने बाद में साउथ की सभी भाषाओं में फिल्में करने के बाद फिल्म ‘बर्फी’ से हिन्दी फिल्मों में पर्दापण किया। उसके बाद फटा पोस्टर निकला हीरो तथा मैं तेरा हीरो आदि फिल्में करते हुये अब वो अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘रुस्तम’ में एक अलग सी भूमिका निभाती नजर आने वाली है। फिल्म के अलावा कुछ अन्य सवालों के साथ हाल ही में इलियाना से हुई एक मुलाकात।

रुस्तम जैसी फिल्म को लेकर क्या सोचती हैं?

मैं अपने आपको लकी मानती हूं कि मुझे ऐसी फिल्म के लिये चुना गया जिसे कोई भी नायिका भाग कर कर सकती थी।illiana dcruz

फिल्म में कितनी फुटैज मिली हैं इस किरदार को?

मैं समझती हूं कि ये फिल्म का सैन्ट्रल किरदार है। ये 1959 के वक्त का किरदार हैं जिसे मेरे लिये निभाना एक चेलेन्ज था। रोल कहीं न कहीं नेगेटिव फीलिंग देता है। अभी इससे ज्याद बताना मेरे लिये मुनासिब नहीं होगा। हां ये रोल उस दौर की चार अलग अलग सच्ची कहानियों को मिलाकर गढ़ा गया है। पूरी तरह से जैसे कि माना जा रहा है ये एक ही कैरेक्टर पर आधारित रोल नहीं है।

इस रोल का आपकी इमेज पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है?

हम एक्टर्स हैं और हर तरह के रोल करते हैं। इससे हमारे निजी जीवन या इमेज पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ये रोल भी अन्य रोल्स की तरह ही है। जिसे मैनें उसी तरह निभाया है जैसे अन्य किरदार निभाती आई हूं। अब जैसे ये रोल 1959 का है, मैं तो उस वक्त पैदा भी नहीं हुई थी। सो हमें जैसे किसी रोल के बारे में बताया जाता हैं हम उसे उसी प्रकार निभाने की कोशिश करते हैं।akshayrustom-

कहा जाता है कि फिल्म ये रास्ते हैं प्यार के तथा अचानक जैसी फिल्मों से प्रेरित है जिनमें नानवटी केस का कहानी का आधार बनाया था?

मैने न तो वो दोनों फिल्में देखी हैं और न ही अभी तक मुझे रुस्तम देखने का मौका मिला है। वैसे भी मैं अपनी फिल्में ज्यादा नहीं देखती। अगर ऐसा है भी तो मैं इस बारे में कुछ नही कहना चाहती क्योंकि ये फिल्म किसी प्रटीक्यूलर इंसान पर आधारित नहीं है। जैसा कि पहले भी मैनें बताया कि चार कहानियों को जोड़कर एक कहानी तैयार की गई है जिसको नाम दिया है रुस्तम, लेकिन ये पूरी तरह से नानावटी केस पर आधारित फिल्म नहीं है।

इस फिल्म को आप किस तरह की फिल्म मानती है?

इसे आप रैगुलर फिल्म नहीं कह सकते। ये एक काफी समझदार फिल्म है। इसमें ऐसा नहीं हैं कि ग्लैसरीन आंखों में डाल कर सीन कर लिये। फिल्म में कुछ सीन्स ऐसे थे जिनके लिये मैने फिल्म के डायरेक्टर नीरज पांडे जी को कहा था कि आप को मुझे तैयार होने के लिये कुछ वक्त देना होगा। इसके बाद कही जाकर मैं अपने आपको इस भूमिका के लिये तैयार कर पाई। बाद में मैने पूरी ऑनेस्टी के साथ ये फिल्म की।ileana-dcruz

आपने साउथ में काफी बड़े बडे़ स्टार्स के साथ काम किया है और अब यहां हिन्दी में भी। इन दोनों में क्या फर्क महसूस करती हैं?

सबसे बड़ा फर्क डिसिप्लीन है जो वहां का बड़े से बड़ा स्टार फॉलों करता है। अगर शिफ्ट नो बजे की हैं तो सब वक्त पर सेट पर नो बजे दिखाई देगें। यहां ऐसा नहीं है। मुझे यहां स्टार का दो दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। लेकिन अब मैं डायरेक्टर को पहले ही कह देती हूं कि मुझे वही वक्त दें जो वक्त फिल्म का हीरो दे रहा हो।

आपकी आने वाली फिल्म?

फिलहाल तो ‘बादशाह’ का ही नाम लेना चाहूंगी। हालांकि अभी फिल्म के साथ फार्मेलिटी करना बाकी हैं लेकिन वे मेरा नाम एनाउंस कर चुके हैं इसलिये मैं फिल्म का नमा ले रही हूं।


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Mayapuri

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