INTERVIEW: ‘‘फिल्म ‘मदारी’ में इंसान की बेबसी की दास्तान है…’’ – इरफान खान

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राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तमाम पुरस्कार और शोहरत बटोरने के बाद इन दिनों इरफान अपनी नई फिल्म ‘मदारी’ को लेकर चर्चा में है, जिसके वह अपरोक्ष रूप से निर्माता भी हैं। इस फिल्म की कहानी का आइडिया खुद इरफान ने चुनकर उसे विकसित कराया।

आप अपने करियर को किस मुकाम पर पाते हैं?

मैं इस ढंग से कभी नहीं सोचता। मैं टीवी पर जो काम कर रहा था, वह सिर्फ जिंदा रहने/सरवाइव करने के लिए कर रहा था। मुझे उस दिन का इंतजार था, जब मैं उस काबिल हो जाऊं कि मैं अपनी पसंद की कहानी सुना सकूं। आज मेरे पास मौका है कि मैं अपनी कहानियां चुन पा रहा हूँ। मैं सिनेमा में जिस तरह की जगह चाह रहा था, उस तरह की जगह मिल रही है। यदि ऐसा न होता मैं तो अपनी पसंद के आइडिया पर फिल्म ‘मदारी’ न कर पाता।

फिल्म ‘मदारी’ की एक छोटी सी आइडिया थी। इसमें ऐसा क्या था कि आपको लगा कि इस पर फिल्म बनायी जा सकती है?

इसमें एक हृदय विदारक घटना थी। दूसरी बार जवाबदेही की बात थी। कुछ लोगों ने एक निर्णय लिया और निर्णय लेकर वह चले गए। पर 10 -15 साल बाद उस निर्णय की वजह से एक हादसा हो जाता है, तो अब आप किससे सवाल पूछेंगे? जिसने निर्णय लिया था, वह जिम्मेदार हैं नहीं। तो सवाल यह है कि जब निर्णय लिया गया और उस पर चिंतन क्यों नहीं किया गया। तो उस आइडिया में जवाबदेही किसकी तय हो? यही मुद्दा मुझे समझ में आया और मुझे लगा कि इस पर फिल्म बननी चाहिए। जवाबदेही तय करने की बात लोगों तक  पहुंचनी चाहिए। फिल्म में इंसान की बेबसी की दास्तान है।

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‘मदारी’ हो या कोई दूसरी फिल्म हो। दर्शक फिल्म देखते समय प्रभावित होता है, पर बाद में वह सोचता है कि ऐसा यथार्थ में नहीं हो सकता। यह तो फिल्म में दिखाया है?

ऐसा नहीं। सिनेमा चाहे मोहब्बत की बात करे या सिस्टम की बात करे। वह इमोशन कहीं न कहीं इंसान तक पहुँचता ही है। जो इंसान को इंस्पायर करता है। इंसान को इमोशनली भले ही इन्वाल्ब न करे, पर सोचने पर मजबूर जरुर करता है। अभी सिनेमा ग्रो हो रहा है। अब विविधतापूर्ण सिनेमा बन रहा है। अब सिनेमा में नए नए आयाम आएंगे। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि एक आवाज लोगों के अंदर पनप रही है। ऐसा सिनेमा देखने वाले लोग हैं। अब लोगों की सिनेमा को लेकर रूचि बदली है। अब दर्शक चाहता है कि सिनेमा उसकी बुद्धिमत्ता को चुनौती दे। दर्शक चाहता है कि सिनेमा में ऐसा कुछ हो, कि जब वह सिनेमा देखकर थिएटर से बाहर निकले, तो कुछ उसके साथ जाए, वह सोचने पर मजबूर हो।

 ‘मदारी’ इसे किस तरह से पूरा करेगी?

अभी हम कुछ नहीं कहना चाहते। जब फिल्म आएगी, तो अपने आप पता चल जाएगा। फिल्म में जो ड्रामा है, वह पहले कभी नहीं आया। इसमें सिनेमा का नया रूप नजर आएगा। इसमें रहस्य, मनोरंजन, यथार्थ नजर आएगा। इस फिल्म की कहानी के कई अलग अलग आयाम निकल कर आए हैं। इसे हम किसी एक परिभाषा के अंदर नहीं बांध सकते। फिल्म में कुछ समस्याओं से उपजा  हुआ ड्रामा है।

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फिल्म ‘मदारी’ के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

यह एक तलाकशुदा असहाय निर्मल नामक  इंसान है। टीवी रिपेयरिंग का काम करता है। पत्नी अमरीका जा चुकी है और अब वह अपने बेटे के साथ रहता है। वह बेटे की अच्छी से अच्छी परवरिश करना चाहता है, मगर एक हादसा सब कुछ बदल कर रख देता है। वास्तव में उसका बेटा खो जाता है। उसके बाद वह खुन्नस में मंत्री के बेटे का अपहरण कर लेता है। उसके बाद रोमांचक खेल शुरू होता है। निर्मल के किरदार में मेरा लुक काफी अलग है। मैंने दाढ़ी और बाल बढ़ाएं हैं। वैसे यह एक रहस्य रोमांच प्रधान फिल्म है। जिसमें देश के अंदर घटित कुछ सत्य घटनाक्रमों का मिश्रण भी है।

‘मदारी’ फिल्म के रिलीज होने के बाद क्या बदलाव आएगा?

देखिए, फिल्म ‘मदारी’ उस इंसान की दास्तान है, जो कि अपनी जिंदगी में एक स्टैंड लेता है। पर यह फिल्म दर्शकों पर क्या असर करेगी, यह कहना मुश्किल है। मेरी राय में सिनेमा घर में पहुंचने के वह दर्शकों की प्रॉपर्टी हो जाती है। फिर दर्शक क्या करेगा, यह तो वही जाने। लेकिन यदि कोई फिल्मकार यह सोचता है कि दर्शक फिल्म देखकर निकलेगा, तो उसके दिमाग में यह बात होगी, तो इससे बड़ी गलती कोई हो ही नहीं सकती। यदि दर्शक पहले से ही एक मन बनाकर सिनेमा देखने आया है, तो वह अपने मन को ही सही मानेगा, आपकी बात को गलत मानेगा।

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 ‘मदारी’ के निर्देशन के लिए निशिकांत कामत ही क्यों?

देखिए, हमारे यहां होता यह है कि निर्देशक कहानी चुनकर कलाकारों के पास जाता है। पर यहां हमने पहले कहानी चुनी, फिर उसे निर्देशित करने के लिए निर्देशक की तलाश शुरू की। तब हमारे दिमाग में पहला नाम निशिकांत कामत का आया। क्योंकि हम उनके साथ एक फिल्म ‘मुंबई मेरी जान’ कर चुके थे। इसके अलावा हमारी फिल्म के पटकथा लेखक और निशिकांत एक दूसरे से परिचित है। जब निशिकांत को कहानी सुनायी, तो उसकी तरफ से प्रतिक्रिया ऐसी आयी कि लगा कि यह वह कहानी है, जिसे वह बनाना चाहेगा। तो निशिकांत का चयन हो गया।

हॉलीवुड में आपकी एक पहचान हैं। पर दूसरे भारतीय कलाकारों के पास उस तरह के आफर नहीं आए?

आने वाले समय में दूसरे भारतीय कलाकारों को आफर मिलेंगे। आने वाले समय में जो लोग रूचि रखेंगे, उन्हें मौका मिलेगा। पर यह सच है कि हमारा काम करने का तरीका उनके काम करने के तरीके से बहुत अलग है।


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Mayapuri

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