INTERVIEW: ‘‘उस दिन मैं शर्म के मारे सेट से घर भाग गई थी’’ – जया भट्टाचार्य

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क्योंकि सास भी कभी बहू थी, बनूं मैं तेरी दुल्हन, शराब, पल छिन, कसम से, केसर, करम अपना अपना तथा गंगा व थपकी प्यार की आदि ढ़ेर सारे धारावाहिकों और दर्जनों फिल्मों में अपने अभिनय के रंग दिखा चुकी अभिनेत्री जया भट्टाचार्य किसी परिचय की मोहताज नहीं। पिछले दिनों वे धारावाहिक ‘गंगा’ में दिखाई दी और अब वे डी डी के किसान चैनल पर प्रसारित धारावाहिक ‘शिक्षा-एक मजबूत आधारशिला’ में एक अहम रोल में दिखाई दे रही हैं। सीरियल और उनके करियर से जुड़े सवालों के साथ एक बातचीत।

धारावाहिक क्यूंकि सास…. के किरदार पायल से अभी तक पीछा छूटा या नहीं ?

सवाल ही पैदा नहीं होता। दरअसल कोई रोल ऐसा होता है जिसके बारे में पहले से कुछ भी पता नहीं होता कि वो दर्शकों के बीच कैसी इमेज बनाने वाला हैं। पायल एक ऐसा निगेटिव रोल था, जिसके लिये मुझे उन दिनों रोजाना सैंकड़ों गालियां खानी पड़ती थी। मेरे ख्याल से वही उस रोल की सफलता थी।

निगेटिव रोल निभाने के लिये क्या पहले से तैयार थी ?

वह शुरूआत में छोटी सी भूमिका थी बाद में उसकी लोकप्रियता को देखते हुये उसे विस्तार दिया गया। परन्तु मैंने जरा भी नही सोचा था कि यह रोल इस कदर पॉपुलर होगा कि घर घर तक पहुंच जायेगा। जहां तक रोल की नकारात्मकता की बात की जाये तो इससे पहले मैंने कभी कोई निगेटिव रोल नहीं किया था और इसके बारे में भी इतना पता था कि वो एक ग्रे शेड रोल है लेकिन जब ये जम गया तो यहां मेरी डांस ट्रेनिंग काफी काम आई।  क्योंकि यहां बात करते हुये भवें मटकाना या कमर मटकाना जरूरी था और यह सब मैं इसलिये कर पाई क्योंकि मैं डांस जानती थी लेकिन बाद में पायल का रोल इतना टाइप कास्ट हो गया कि सालों मुझे उसी तरह के रोल ऑफर होते रहे। उन दिनों मैंने करीब चालीस पचास ऐसे शोज नकारे थे जिनमें इसी तरह के रोल्स थे।

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सुना है आप प्रोडक्शन में भी खासी दिलचस्पी रखती हैं ?

यस, मुझे वाकई प्रोडक्शन का एक हद तक शौंक तो है। मैं पिछले सात आठ सालों से सिद्धार्थ नागर (अचला नागर के बेटे) जिन्हें मैं अपना भाई मानती हूं। उनके साथ एक्टिंग के अलावा उनके प्रोडक्शन में भी उनका हाथ बंटाती हूं। प्रोडक्शन करते हुये मुझे पता चला कि यहां टीम का हर सदस्य बहुत अहम है फिर चाहे वों स्पॅाट ब्वॉय ही क्या न हो। मैं उसकी भी इज्ज्त करती हूं।

किसी रोल के लिये क्या पहले से भी कुछ तैयारी करती हैं ?

मैं मैथड एक्टर नहीं हूं, न ही मैंने कहीं से एक्टिंग सीखी है। मैं हमेशा सेट पर दिमाग को खाली कर के आती हूं। वहां जो मुझे करने के लिये कहा जाता है वही मैं करती हूं। रोल की पहले से तैयारी न करने के पीछे एक घटना है। एक फिल्म थी जो लखनऊ में शूट हो रही थी, जिसमें काफी दिग्गज अभिनेता थे भूमिका के तहत जिन्हें सीन में मुझे डांटना था। मैं मुबंई से लखनऊ तक उस सीन के सवांद बुदबुदाते हुये गई थी लेकिन जैसे ही सीन स्टार्ट हुआ मैं सब भूल गई, यही नहीं उस दिन मैंने अपने करियर का इतना खराब अभिनय किया कि मैं शर्म के मारे सेट से घर भाग गई। उसके बाद से मैंने प्रण किया कि आगे से जो होगा सेट पर ही होगा।

इस धारावाहिक के बारे में क्या कहना है ?

‘शिक्षा – एक मजबूत आधारशिला’ है इस धारावाहिक का नाम। सिद्धार्थ नागर ने यह कांसेप्ट महज दो दिन में लिखा और एग्जीक्यूट किया था। दरअसल किसान चैनल पर यह सब्जेक्ट पांच दिन के भीतर जमा करना था। हम सब बैठकर सोच रहे थे, तीन दिन तक किसी के दिमाग में कुछ नहीं आया लेकिन चौथे दिन सिद्धार्थ के दिमाग में आया उसने हमें सुनाया और फिर इसे लिखकर जमा कर दिया।

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शो क्या है ?

शिक्षा का तात्पर्य क ख ग से नहीं है बल्कि इसका तात्पर्य तजुर्बे से है। आपको किसी चीज का जितना तजुर्बा होगा लाइफ में आप उतना ही आगे बढ़ेंगे। हम बहुत सारी चीजें इसलिये भी नहीं कर पाते क्योंकि हमें उसकी समझ नहीं होती। इस शो में एक गांव को आगे कर वह सारी बातें बताई जा रही हैं वह सारी शिक्षा दी जा रही है जिसकी उनके जीवन में जरूरत है। फिल्म का मुख्य किरदार एक लड़की सारिका ढिल्लन का है जो शहर जाकर एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर फिर वापस गांव आती हैं और वह यहां आकर न सिर्फ गांववालों को वहां के जमींदार के कर्ज से मुक्ति दिलवाती हैं बल्कि उन्हें खेती करने के आधुनिक तरीकों से भी परिचित करवाती हैं।

शो में आपकी भूमिका क्या है ?

मैं सारिका की मां बनी हूं जो हमेशा उसके साथ रहते हुये हर अच्छे काम में उसका साथ देती है।

-श्याम शर्मा


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