INTERVIEW: लोग झूठ बोलते हैं – ऋषि दा

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मायापुरी अंक, 58, 1975

जसलोक अस्पताल में निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी को देखने गया तो उनसे भी दो-दो बातें हो गई। मैंने उनसे कहा।
क्या यह सही है कि आपके और गुलज़ार के संबंध अब पहले जैसे मधुर नही रहे हैं। इसीलिए आप गुलजार से संवाद नही लिखवाते।
ऋषि दा बोले। नही! यह बिल्कुल गलत है। वह अब पहले से अधिक बिजी हो गया है। इसीलिए उसके पास बाहर की फिल्म लिखने का समय नही है।
दादा आजकल कमलेश्वर आपके बारे में कह रहे हैं कि आपने अपनी घटिया एक्टिंग से उसकी बनी फिल्म ‘डाक बंगला’ का सत्या नाश कर दिया है। क्या वाकई ऐसा हुआ है?

यह इंडस्ट्री ही ऐसी है। अच्छा हो गया तो क्रेडिट कोई भी ले लेगा और खराब होगा तो सब दूसरे पर दोष डाल देगा। दुनिया बोलती है कि हमारी एडिटिंग से ‘डाक बंगला’ से कुछ गति आ गई है। अन्यथा फिल्म इससे भी अधिक बोर थी ऋषि दा ने कहा। तब कमलेश्वर ऐसा क्यों कहते हैं? मैंने पूछा।

आंधी की सफलता ने उनका दिमाग बिगाड़ दिया है। हालांकि उसका सारा क्रेडिट गुलज़ार को जाता है और वहीं गुलज़ार ने वर्षों हमारी एडिटिंग टेबल पर कार्य किया है। इसीलिए अगर यह कहा जाए कि गुलजार को बनाने में स्व. बिमल राय और मेरा बहुत बड़ा हाथ है तो झूठ न होगा। ऋषि दा ने बताया।

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Mayapuri