INTERVIEW: इंडस्ट्री के तीन लीजेण्ड मेरी तारीफ करते हैं – नवाजूद्दीन सिद्दीकी

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नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक बेहतरीन एक्टर है ये उनकी अभी तक फिल्में बताती है। इतने कम समय में नवाज, सलमान, शाहरूख और अमिताभ जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम कर उनकी वाहवाही लूट चुके हैं। इनदिनो वे अनुराग कश्यप की फिल्म ‘रामन राघव 2.0’ को लेकर खासे चर्चित हैं। इस फिल्म के अलावा कुछ अन्य सवालों को लेकर उनसे एक बातचीत ।

नवाज रामन राघव को लेकर कहते हैं कि कहा जाता हैं उस दौरान अगर रामन राघव का नाम बच्चों के सामने ले लिया जाता था तो उनकी पतलून गीली हो जाती थी। इस किरदार को करने में मुझे सबसे ज्यादा परेशानी वहां पेश आई क्यों कि आप तो एक नार्मल शख्स है लेकिन उसका किलिंग के पीछे जस्टी फिकेशन कुछ और था वो जस्टीफाइव करता था कि मैने जो मारा है वो इसलिये मारा है। ऐसे आदमी की थ्यौरी पर बिलीव करना मेरे लिये काफी मुश्किल था ।

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मेरे जैसे कलाकार का हर फिल्म में अपना भी काफी कुछ होता है। अभी रिलीज हुई तीन देख लीजीये या अब इस फिल्म का किरदार देख ले दोनों कतई अलहदा किरदार है। दरअसल आज का दौर ऐसा है कि आपको सब कुछ करने को मिल रहा है। वक्त की बात है कल तक ऐसा नहीं था लेकिन आज में एक तरफ तो इतने भले आदमी की भूमिका निभा रहा हूं कि उसकी शराफत की कसमें खाई जा सकती हैं दूसरी तरफ इतने क्रूर हत्यारे के रोल में हूं जिसे देखकर नफरत से दिल भर जाये ।

वैसे मैं कई फिल्में बतौर हीरो भी कर रहा हूं और सेम टाइम में श्रीदेवी के साथ भी काम कर रहा हूं। इस फिल्म में मैं शर्त लगा सकता हूं कि आप मध्यांतर पहचान ही नहीं पायेगें कि ये कौन आदमी है ।

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बतौर हीरो मेरी कुछ फिल्में हैं जैसे सतीश बत्रा की फोटोग्राफर, बाबू मोशाय बंदूकबाज जिसकी हीरोइन भाग गई थी। एक फिल्म अली है जिसमें एमी जैक्शन है। इसके अलावा शाहरूख के साथ रईस और श्रीदेवी के साथ मॉम है। कुछ और फिल्में भी हैं।

रामन राघव को लेकर मैने देखा कि नैट पर काफी कुछ लिखा हुआ है। वो पढ़ने के अलावा मैने यूट्यूब पर साइको किलर्स के बारे में काफी रिसर्च किया कि वे क्या सोचते हैं किस तरह की बातें करते हैं किन किन बातों पर उन्हें गुस्सा आता है, किन बातों पर उन्हें हंसी आती है और कैसी परिस्थितियों में उन्हें मजा आता है । ये सब मैने पढ़ा और इन सारी जानकारियों को मिलाकर मैने रामन राघव का किरदार घढ़ा ।

कभी कभी किसी सीन में ऐसा कुछ हो जाता हैं कि आप अचानक उसे कर बैठते हैं और वो सीन को और ज्यादा प्रभावशाली बना देता है। जैसे एक सीन में अचानक एक कुत्ता आ गया तो मैने फौरन उसका फायदा उठाया, अचानक मेरे दिमाग में आया और मैं उसे मारने के लिये उसके पीछे दौड़ पड़ा। ये सीन बनाया नहीं जा सकता था क्योंकि कुत्ता तो बार बार सीन में नहीं आ सकता था। एक सीन में मैं स्पीच दे रहा हूं और एक कुत्ता आता है,वो मुझे बोलते हुये देखता है और मेरे पास बैठकर मुझे हर तरफ से चाटने लगता है लेकिन किसी कारण वश वो सीन फिल्म से निकाल दिया गया। इसी तरह लास्ट में मैं सिगरेट पी रहा हूं तभी एक बिल्ली आ जाती है जो बाकायदा मेरे पास आकर बैठ जाती है। मैं कह सकता हूं कि इस फिल्म में इत्तेफाक से ही सही एनीमल्स ने मेरे सीन्स को प्रभावशाली बनाने में बहुत योगदान दिया ।

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कई बार स्क्रिप्ट में कुछ भी फेर बदल करने की गुंजाइश नहीं होती। जैसे ये फिल्म। यहां डायलॉग्ज वाइज इंप्रोवाइज की जरा भी गुंजाईश नहीं थी। फिर भी कितने ही सीन ऐसे थे जंहा इंप्रोवाइज हुआ। न चाहते हुये भी हुआ। और ऐसा अक्सर होता हैं जब निर्देशक को न चाहते हुये भी काफी कुछ परिस्थितियों के अनुसार बदलना पड़ता है ।

बहुत सारी ऐसी फिल्में हैं जिन्हें बतौर एक्टर मैं देखता था। जैसे मंडी, सपर्श, अलबर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है आदि। ये फिल्में उन दिनों दूरदर्शन पर शनिवार को आया करती थी तो पूरा गांव इन फिल्मों को इग्नौर करता था, सिर्फ मैं ये सभी फिल्में देखा करता था ।

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कहते हैं हर चीज का एक वक्त होता है। एक्टिंग तो मैं दस साल पहले भी करता था चाहे वे एक या दो सीन हो और उसी शिद्दत से आज भी अभिनय करता हूं  लेकिन आज नसीर साहब मेरी तारीफ करते हैं तो कभी अमित जी शाबासी देते हैं। तो कभी शत्रुघ्न सिन्हा मुझे एक बेहतरीन एक्टर मानते हैं। सुन कर बहुत अच्छा लगता है, लेकिन मेरा मानना है शायद अगर दस साल पहले मेरे बारे में ये सब कहा जाता तो मेरे बिगड़ने या भटकने के ज्यादा चांसिस थे लेकिन आज ऐसा नहीं है। क्योंकि आज सब कुछ मेरे लिये बहुत सहज बन चुका है ।

 


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Mayapuri

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