INTERVIEW!! ‘‘चंडीगढ़ से अभिनय में ग्रेजुएशन की और ‘दिलवाले’ से पीएचडी की’’ – वरूण शर्मा

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बाॅलीवुड में टेलेन्ट के साथ साथ बुलन्द किस्मत का होना भी जरूरी है। वरूण शर्मा एक ऐसी ही बढि़या किस्मत वाले अदाकार हैं जिन्हें बाॅलीवुड ने हाथों हाथ लिया। पहली थ्रीडी फिल्म ‘वाॅरनिंग’ के बाद उन्हें फुकरे, डाॅली की डोली, किस किस को प्यार करूं  आदि फिल्में मिली। उनकी फिल्म फुकरे देखने के बाद निर्देशक रोहित शेट्टी ने उन्हें फिल्म ‘दिलवाले’ में कास्ट किया। जल्द रिलीज होने जा रही इस फिल्म को लेकर वरूण से एक मुलाकात।

बड़ा बैनर, बड़ा डायरेक्टर और शाहरुख खान तथा काजोल जैसे लीजेन्ड स्टार्स के साथ फिल्म करने का सोचा था?

मैंने तो कभी सपने में भी नही सोचा था कि  महज तीन चार फिल्मों के बाद ही मुझे मेरे ड्रीम स्टार के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। दरअसल बाजीगर में शाहरूख सर को देखने के बाद ही मेरे दिमाग में एक्टर बनने का ख्याल आया था। इसके बाद मैंने चंडीगढ़ से एक्टिंग में ग्रेजुएशन की, इसके बाद मैं थियेटर से जुड़ गया। आज मैं कह सकता हूं कि अभिनय में ग्रेजुएशन मैने चंडीगढ़ से की लेकिन मेरी पीएचडी हुई दिलवाले से।

इस फिल्म तक कैसे पहुंच बनाई ?

दरअसल मैं उन दिनों राजस्थान में किस किस को प्यार कंरू की शूटिंग कर रहा था। उसी दौरान मुझे रोहित शेट्टी सर का फोन आया और उन्होंने मुझे इस फिल्म का आॅफर देते हुए कहा मेरे आॅफिस में आकर मिलो। मैंने उन्हें कहा कि मैं अभी राजस्थान में शूट कर रहा हूं यहां से फ्री होते ही आपसे मिलता हूं लेकिन मुझे यकीन ही नहीं हो पा रहा था कि अभी जो एक मिनट पहले हुआ वह कोई सपना तो नहीं था। इसके बाद मुझे शाहरुख सर के साथ एक डिश टीवी का एड करने का अवसर मिला तो मैंने उन्हें अपने बारे में बताते हुए कहा कि आपके साथ काम करने का अवसर मिला है तो वे बहुत खुश हुए और उन्होंने कहा ठीक हैं, सेट पर मिलते हैं।

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अपने रोल के बारे में क्या कुछ बताना चाहेंगे?

मेरे किरदार का नाम सिद्धार्थ उर्फ निक्कू है। निक्कू वीर यानि वरूण धवन का जिगरी दोस्त है। दोनों जो भी करते हैं मिलकर करते हैं। उनकी शरारतें एक साथ होती है। निक्कू वीर को कृति को पटाने में साहयता करता है। उसकी भी गर्लफ्रेंड हैं जिसका नाम हैं चेतना पांडे। जिस प्रकार शाहरुख वरूण के बड़े भाई हैं उसी तरह मुकेश तिवारी मेरे बड़े भाई हैं। हां  अगर फिल्म में मैं हंसा रहा हूं तो मेरे कुछ इमोशन भी हैं। इसके अलावा संजय मिश्रा के साथ एक ट्वीस्ट है वो आपको फिल्म में ही देखना पड़ेगा।

अब्बास मस्तान बाजीगर के निर्देशक थे, शाहरुख उस फिल्म के हीरो। आज आपको दोनों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इसे लेकर क्या सोचते हैं ?

मैं जब अब्बास मस्तान जी से मिला तो मैंने उन्हें बताया कि मैंने बाजीगर से इंस्पायर होकर एक्टर बनने का सोचा था। आज मेरी मम्मी बहुत खुश होने वाली हैं जब उन्हें पता चलेगा कि मैं आपके साथ फिल्म करने जा रहा हूं। यही बात मैंने शाहरुख सर को भी बताई।

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शाहरुख के साथ पहले दिन की शूटिंग के वक्त आपकी क्या स्थिती थी?

डैफिनेटनी मैं उस दिन बहुत नर्वस था। मैंने वरूण को कहा भी कि यार बस आज का दिन किसी तरह अच्छा निकल जाये आगे तो मैं सब संभाल लूंगा। इसके बाद शाहरूख सर हमें मिले और पांच मिनट में उन्होंने पता नहीं क्या मैजिक किया कि उसके बाद मैं पूरी तरह आत्मविश्वास से भरा हुआ था। मैंने उस दिन बढि़या काम किया।

शाहरुख और काजोल दोनों को लेकर क्या अनुभव रहे ?

मैं आपको एक किस्सा बताता हूं कि उन दिनों मैं किस किस को प्यार कंरू का प्रमोशन कर रहा था। हम जहां भी जा रहे थे तो वहां मौजूदा फिल्म की बात कम दिलवाले के बारे में लोग ज्यादा जानना चाहते थे। मतलब मेरे यार दोस्तों को गर्व हो रहा था कि उनका दोस्त शाहरुख की फिल्म कर रहा है। काजोल मैम की बात की जाये तो वे बहुत ही रीयल हैं उन्हें दिखावा पसंद नहीं। यही रवैया उनके अभिनय में भी है। क्योंकि वे किसी भी सीन को फील करने के बाद एक्ट करती हैं।

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शूटिंग के वक्त कोई वाक्या ?

कई हैं। दरअसल मैं भूतप्रेतों में बिलिव करता हूं इसलिए रात को मुझे डर लगता है। ये बात रोहित राॅय और वरूण तथा कृति को पता लग गई। एक दिन उन्होंने होटल वालों से मेरे कमरे की डुप्लीकेट चाबी ली और जब मैं गहरी नींद सो गया जो वे तीनों चुपके से मेरे कमरे में आये और उछल कर मेरे ऊपर चढ़कर बैठ गये। कुछ देर तो मुझे कुछ समझ ही नहीं आया, उसके बाद मैं जोर जोर से चिल्लाने लगा। कुछ देर बाद जब उन्होंने लाइट जलाई तब मेरी समझ में आया कि वहां मेरी फिरकी ली जा रही थी। इसी तरह एक दिन रोहित सर ने कहा कि तुम्हारा फाइट सीन है। इसके बाद अचानक सात आठ फाइटर मुझ से उलझ गये। अब मैं तो उन्हें नकली मार रहा था लेकिन वे सभी मेरी असली धुनाई कर रहे थे। मैं उनके नीचे दबा हुआ सोच था कि शाॅट खत्म होने के बाद मैं इन्हें देखता हूं। करीब दस मिनट बाद कट् की आवाज आई तो सारे फाइटर मेरे ऊपर से हाथ झाड़ते हुये उठकर एक तरफ जा खड़े हुए। मैंने देखा कि मुझ पर सब ठहाके लगा रहे थे। मैं समझ गया कि वो भी एक प्लान था। लेकिन अपने करियर में मेरे लिये इस फिल्म के संस्मरण भूलने मुश्किल होंगे।

इसके अलावा कोई और फिल्म ?

बातचीत चल रही है। लेकिन डाॅली की डोली के निर्माताओं की दूसरी फिल्म लगभग फाइनल है। उसका नाम ‘तफरी’ है।


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Mayapuri

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