कलाकार की कला को कोई नही परखता – आशा सचदेव

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मायापुरी अंक, 55, 1975

रूप तारा स्टूडियो में आशा सचदेव से ‘सखी लुटेरा’ के सैट पर मुलाकात हुई। मैंने पूछा ।

पिछले दिनों जब आप इंडस्ट्री में आई थी तो आपके किसी न किसी के साथ स्कैंडल अखबारों में छपते ही रहते थे। लेकिन अब वैसा वातावरण नज़र नही आ रहा है। वो सब क्या पब्लिसिटी लेने का ढंग था? मैंने पूछा।

पब्लिसिटी मैंने नही ली अखबार वालों ने दी है। मैं तो अपने टैलेंट के बल पर लोकप्रियता लेना चाहती हूं। लेकिन यहां लोग इतने संकीर्ण-विचारों के है कि किसी लड़के-लड़की को हंसते बोलते देखकर रोमांस का फतवा दे देते है कि फलां का फलां के साथ रोमांस चल रहा है। कलाकार की कला को कोई नही परखता। आशा सचदेव ने कहा।

लेकिन लोग कहते है कि आप वाकई रोमांटिक है और जिस हीरो के साथ आती है उसी से रोमांस करने लगती है। इसीलिये विनोद मेहरा, किरण कुमार, साजिद खान, जोगेन्द्र आदि के साथ आपका नाम जुड़ रहा है। मैंने पूछा।

अभी मैंने कहा ना ये सब अखबार वालों की मेहरबानी है। वास्तविकता इसमें बिल्कुल नहीं है आज के हीरोज को प्रणय दृश्यों में हद से ज्यादा लिपटने की आदत है। जिस के कारण लोगों को कहानियां गढ़ने का अवसर मिल जाता है। हद तो यह है कि विजय अरोड़ा के साथ कोई फिल्म न होते हुए भी लोगों ने मेरा नाम उनके साथ जोड़ दिया था। हालांकि पूना इंस्टीट्यूट में वो मुझसे सीनियर थे। अगर ऐसा कोई चक्कर होता तो मुंबई आते ही हमारी जोड़ी हिट हो जाती लेकिन आपके भाई-बंधु सिर्फ जान-पहचान को मोहब्बत का रंग देने से नहीं चूकते। आशा सचदेव ने कहा।

बहुत दिनों से आपकी नई फिल्में नही आ रही है। इसका क्या कारण है?  मैंने पूछा

कारण सीधा-साफ है। फिल्मे होंगी तभी तो रजतपट पर प्रदर्शित होंगी। अनुमान, बागी, बादल कई फिल्में कई महीनों से बन रही है। जब पूरी होंगी तो प्रदर्शित हो ही जाएगी, इसके लिए हम बेबस है। आशा ने कहा।


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Mayapuri

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